दरभंगा में प्राइवेट अस्पताल में चार दिन के बच्चे की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और पैसे की अवैध वसूली का आरोप लगाकर सख्त कार्वाई की मांग की है। घटना बिरौल थाना क्षेत्र की है। बंदा दसौत निवासी लालदाइ देवी और शंभू पासवान की शादी दस साल पहले हुई थी। लंबे इंतजार के बाद एक साल पहले भी पुत्र हुआ था, लेकन जन्म के बाद ही मौत हो गई थी। मौत की खबर सुनने के बाद घर में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। चार दिन पहले बच्चे का जन्म हुआ था जानकारी के मुताबिक चार दिन पहले अनुमंडलीय अस्पताल में लालदाई देवी ने बेटे को जन्म दिया था। जन्म के एक दिन बाद 26 फरवरी को बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए डीएमसीएच रेफर कर दिया, लेकिन परिजन वनदेवी नगर स्थित शिशु रोग अस्पताल लेकर गए। लापरवाही से जान चली गई मामा रोहित पासवान ने बताया कि एडमिट करने के समय 7 हजार रुपए जमा कराया। स्टाफ ने बताया कि 50 से 60 हजार तक खर्च आ सकता है। इसके बाद हमलोग पैसों की व्यवस्था में जुट गए। डॉक्टरों ने आश्वासन दिया था कि बच्चा ठीक हो जाएगा। हमने कहा था कि अगर ठीक नहीं होगा तो दरभंगा रेफर कर दीजिए, लेकिन डॉक्टर बोले कि ठीक हो जाएगा। रविवार सुबह जब अस्पताल पहुंचा तो देखा कि बच्चे को ऑक्सीजन लगा है, लेकिन वह पहले से मृत था। इसके बावजूद स्लाइन चढ़ाया जा रहा था। रात में बच्चे को समुचित दवा नहीं दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद भी अस्पताल वाले कह रहे थे कि जिंदा है। 10 रुपए मांग रहे थे। सिर्फ पैसा कमाने के लिए इलाज का नाटक कर रहे थे। स्टाफ ने कहा कि 10 हजार लेकर आइए नानी रोगही देवी ने बताया कि शनिवार शाम करीब चार बजे डॉक्टर ने कहा था कि बच्चा ठीक हो जाएगा। रात दो बजे नर्सिंग स्टाफ ने मुझे जगाया। मेरे सामने बच्चे को स्लाइन चढ़ाया। फिर कहा कि आप जाकर सो जाइए। सुबह जब देखने गई तो गेट नहीं खोल रहे थे। कहा कि पहले 10 हजार रुपए लेकर आइए। जब घर के पुरुष सदस्य अस्पताल पहुंचे तो देखा कि बच्चा मृत अवस्था में है। इस बीच अस्पताल संचालक और स्टाफ मौके से फरार हो गए। जांच में जुटी पुलिस वहीं, इस संबंध में बिरौल थानाध्यक्ष चंद्रमणि ने बताया कि मामले की सूचना मिली है। लिखित आवेदन मिलने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। दरभंगा में प्राइवेट अस्पताल में चार दिन के बच्चे की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और पैसे की अवैध वसूली का आरोप लगाकर सख्त कार्वाई की मांग की है। घटना बिरौल थाना क्षेत्र की है। बंदा दसौत निवासी लालदाइ देवी और शंभू पासवान की शादी दस साल पहले हुई थी। लंबे इंतजार के बाद एक साल पहले भी पुत्र हुआ था, लेकन जन्म के बाद ही मौत हो गई थी। मौत की खबर सुनने के बाद घर में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। चार दिन पहले बच्चे का जन्म हुआ था जानकारी के मुताबिक चार दिन पहले अनुमंडलीय अस्पताल में लालदाई देवी ने बेटे को जन्म दिया था। जन्म के एक दिन बाद 26 फरवरी को बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए डीएमसीएच रेफर कर दिया, लेकिन परिजन वनदेवी नगर स्थित शिशु रोग अस्पताल लेकर गए। लापरवाही से जान चली गई मामा रोहित पासवान ने बताया कि एडमिट करने के समय 7 हजार रुपए जमा कराया। स्टाफ ने बताया कि 50 से 60 हजार तक खर्च आ सकता है। इसके बाद हमलोग पैसों की व्यवस्था में जुट गए। डॉक्टरों ने आश्वासन दिया था कि बच्चा ठीक हो जाएगा। हमने कहा था कि अगर ठीक नहीं होगा तो दरभंगा रेफर कर दीजिए, लेकिन डॉक्टर बोले कि ठीक हो जाएगा। रविवार सुबह जब अस्पताल पहुंचा तो देखा कि बच्चे को ऑक्सीजन लगा है, लेकिन वह पहले से मृत था। इसके बावजूद स्लाइन चढ़ाया जा रहा था। रात में बच्चे को समुचित दवा नहीं दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद भी अस्पताल वाले कह रहे थे कि जिंदा है। 10 रुपए मांग रहे थे। सिर्फ पैसा कमाने के लिए इलाज का नाटक कर रहे थे। स्टाफ ने कहा कि 10 हजार लेकर आइए नानी रोगही देवी ने बताया कि शनिवार शाम करीब चार बजे डॉक्टर ने कहा था कि बच्चा ठीक हो जाएगा। रात दो बजे नर्सिंग स्टाफ ने मुझे जगाया। मेरे सामने बच्चे को स्लाइन चढ़ाया। फिर कहा कि आप जाकर सो जाइए। सुबह जब देखने गई तो गेट नहीं खोल रहे थे। कहा कि पहले 10 हजार रुपए लेकर आइए। जब घर के पुरुष सदस्य अस्पताल पहुंचे तो देखा कि बच्चा मृत अवस्था में है। इस बीच अस्पताल संचालक और स्टाफ मौके से फरार हो गए। जांच में जुटी पुलिस वहीं, इस संबंध में बिरौल थानाध्यक्ष चंद्रमणि ने बताया कि मामले की सूचना मिली है। लिखित आवेदन मिलने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।


