ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद चीन पूरी तरह से अमेरिका और इजराइल पर भड़क गया है। चीन ने कहा है कि ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।
उसने यह तक कह दिया है कि चीन एक इस्लामिक देश नहीं है, फिर भी वह ईरान के साथ खड़ा है, मुस्लिम देशों को शर्म आनी चाहिए। साथ ही चीन ने तुरंत सीजफायर की अपील की है।
कल भी चीन ने जताई थी नाराजगी
अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए मिलिट्री हमलों को लेकर चीन ने एक दिन पहले भी नाराजगी जताई थी. इस खूंखार कार्रवाई को लेकर चीन काफी परेशान दिख रहा था। उसने शनिवार को भी कहा था कि ईरान की सॉवरेनिटी, सिक्योरिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान किया जाना चाहिए।
चीन ने इस मिलिट्री एक्शन को तुरंत रोकने का आग्रह किया था। उसने टेंशन वाली स्थिति को और न बढ़ाने, बातचीत और नेगोशिएशन को फिर से शुरू करने की बात कही। साथ ही चीन ने मिडिल ईस्ट में शांति और स्टेबिलिटी बनाए रखने की कोशिश करने की मांग की है।
चीन ने ईरान को बेचा था मिसाइल
बता दें कि चीन और ईरान के बीच हाल ही में एक बड़ी मिसाइल डील हुई थी। ईरान ने कुछ ही दिनों पहले चीन से सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल खरीदा था। यह ईरान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक कदम था। अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह डील हुई थी।
चीन के स्टैंड पर क्या बोले थे पूर्व अमेरिकी अधिकारी?
उधर, इजराइल-ईरान तनाव में चीन के रोल के बारे में पेंटागन के पुराने अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा- इस लड़ाई में चीन बीच में ही रहेगा। उन्होंने कहा कि जब हम चीन के ईरान का तेल खरीदने की बात करते हैं, तो साफ कर दें कि वे ऑफिशियली ज्यादा तेल नहीं खरीद रहे थे।
पेंटागन के पूर्व अधिकारी ने कहा- वे तेल को तथाकथित टीपॉट रिफाइनरियों में भेज रहे थे, जो थ्योरी में प्राइवेट और नॉन-गवर्नमेंटल थीं। वे डिस्काउंट पर सैंक्शन किया हुआ ईरानी तेल खरीद रहे थे। यह बीजिंग के लिए बहुत सारा पैसा कमाने का एक तरीका था, लेकिन इससे इनकार करने का भी एक तरीका था।


