समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 12 दिन में दो बार कानपुर पहुंचे। पहले 13 फरवरी को शहर में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। इसके बाद 25 फरवरी को वह फिर कानपुर पहुंचे। इस दौरे में वह छोटी दुकान से लेकर रेस्टोरेंट और बड़े उद्योगपतियों के यहां तक पहुंचे। दूसरी बार जब अखिलेश कानपुर आए तो 2027 चुनाव में पीडीए से हटकर वोट बैंक की तलाश में दिखे, जिसमें एक बड़े उद्योगपति से लेकर छोटे दुकान तक जाकर उन्होंने वोट बैंक साधने की कोशिश की। अखिलेश बोले- लाल इमली फिर से गुलजार हो सकती है कानपुर में 13 फरवरी को सिविल लाइंस में प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश ने कहा- कानपुर की पहचान औद्योगिक नगरी के रूप में रही है। लाल इमली मिल जैसी मिलों की अपनी पहचान थी। इसे मैनचेस्टर ऑफ इंडिया कहा जाता था। कई दुकानें और पुरानी चीजें गिरा दी गई हैं। अगर कानपुर को लेकर लोगों में ऐसी राय बनेगी तो यहां निवेश कैसे आएगा? उन्होंने कहा- कानपुर में कारोबार और उद्योग बड़े पैमाने पर होने की संभावना है। बस सही दिशा में काम करने की जरूरत है। लाल इमली फिर से गुलजार हो सकती है। सरकार को अपने लोगों को इंसेंटिव देकर मिल में टेक्सटाइल का काम शुरू कराना चाहिए। 2027 में हमारी सरकार होगी तो हम इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत करेंगे। पहले पढ़िए 25 फरवरी को कहां जाने का कार्यक्रम था 25 फरवरी को जब अखिलेश कानपुर आए तो उनके तीन कार्यक्रम तय थे। बिना तय कार्यक्रम के 25 फरवरी को कहां पहुंचे पढ़िए… तय कार्यक्रम के अलावा अखिलेश स्वरूप नगर में कारोबारी और सपा कार्यकर्ता अशर अख्तर के घर पहुंचे। यह कार्यक्रम पहले से तय नहीं था। इसके अलावा बिरहाना रोड में समोसे की दुकान से निकलने के बाद वह सोना-चांदी ज्वैलर्स की दुकान पर भी गए। यहां जाने का कार्यक्रम भी तय नहीं था। वापस लखनऊ जाते समय वह जाजमऊ में चमड़ा कारोबारी असद कमाल इराकी के घर रोजा इफ्तार कार्यक्रम में पहुंचे, जहां लोगों से मुलाकात की। सपा जिला इकाई द्वारा जारी प्रोटोकाल में तीन कार्यक्रम थे, लेकिन अखिलेश कुल 6 अलग-अलग जगहों पर पहुंचे। इनमें से तीन जगहों की सूचना पहले जारी कार्यक्रम में नहीं थी। 2027 चुनाव से पहले क्या साध रहे समीकरण? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में शहरी इलाकों में सपा को कम सीटें मिली थीं। ऐसे में अखिलेश शहरी वोट बैंक साधने की कोशिश में हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक महेश शर्मा का कहना है- अखिलेश केवल PDA के सहारे सरकार बनाने की रणनीति में नहीं हैं। वह अपने कोर वोटर के साथ-साथ हर वर्ग के वोट बैंक से कुछ न कुछ लेने की कोशिश में लगे हैं। मुलायम सिंह यादव भी इसी तरह अचानक अलग-अलग जगहों पर पहुंच जाते थे डीएवी कालेज से रिटायर प्रोफेसर समर बहादुर सिंह ने कहा- चुनावी माहौल से पहले इस तरह छोटी दुकान से लेकर बड़े कारोबारी तक पहुंचना वोट बैंक साधने का संकेत हो सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भी इसी तरह अचानक अलग-अलग जगहों पर पहुंच जाते थे।
कानपुर को औद्योगिक शहर के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी अहम माना जाता है। ऐसे में 2027 से पहले यहां बढ़ती सक्रियता को चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा सकता है।


