मध्य प्रदेश में सहारा इंडिया के 9 लाख से ज्यादा छोटे-मध्यम निवेशकों की ₹6,689 करोड़ की पूंजी फंसी हुई है। विधानसभा में पूर्व मंत्री और राघौगढ़ से कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश के जमाकर्ताओं को अब तक केवल ₹355 करोड़ ही वापस मिले हैं, जो कुल राशि का महज 5% है । अफसरों ने छिपाई 123 एफआईआर की जानकारी
123 FIR में से सिर्फ 4 की जानकारी दी सिंह ने सदन में आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस विभाग सहारा के खिलाफ दर्ज 123 एफआईआर की जानकारी छिपा रहे हैं। सदन में सरकार की ओर से केवल 4 एफआईआर का ही जिक्र किया गया, जो संसदीय मर्यादा के खिलाफ है। देश में 39 लाख लोगों को मिले 8,429 करोड़
केंद्र सरकार के ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ के जरिए देशभर के निवेशकों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया जारी है । ताजा स्थिति के अनुसार देशभर से करोड़ों निवेशकों ने आवेदन किए हैं, जिनमें से अकेले एमपी से 9,06,661 आवेदन मिले हैं । एमपी में प्राप्त आवेदनों में से अब तक केवल 1,55,049 आवेदन ही प्रोसेस किए जा सके हैं । 50 हजार प्रति निवेशक खातों में भेजी जा रही राशि वर्तमान में प्रति निवेशक 50,000 रुपए तक की राशि सीधे आधार लिंक बैंक खातों में भेजी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया है। एमपी के कई थानों में एफआईआर
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, सहारा इंडिया समूह के खिलाफ मध्य प्रदेश के विभिन्न थानों में धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं के तहत दर्जनों एफआईआर दर्ज हैं । विदिशा जिले में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां विदिशा देहात, सिरोंज, पथारी और कुरवाई जैसे थानों में करीब 11 एफआईआर दर्ज की गई हैं । ग्वालियर में भी कैंपू, मुरार, भितरवार और क्राइम ब्रांच को मिलाकर 11 मामले सामने आए हैं। दतिया जिले के कोतवाली, बड़ोनी, सेवढ़ा, भांडेर और इंदरगढ़ थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज हैं । मुरैना जिले में कोतवाली, कैलारस और जौरा थानों को मिलाकर 7 प्रकरण दर्ज किए गए हैं । रायसेन जिले के बेगमगंज, बरेली, मंडी और रायसेन सिटी थानों में 5 मामले दर्ज हैं । सीहोर जिले के नसरुल्लागंज और आष्टा थानों में 4 प्रकरण दर्ज हैं। इसके अलावा, भोपाल में ईओडब्ल्यू (EOW) और जहांगीराबाद थानों को मिलाकर 3 एफआईआर दर्ज हैं । सागर के बांदा, मोती नगर और बीना थानों में 3 मामले हैं । शिवपुरी के कोतवाली और पिछोर में 3, रतलाम के रिंगनोद, आलोट और जावरा में 3, तथा गुना कोतवाली में 2 एफआईआर दर्ज पाई गई हैं। बड़वानी, रीवा, सतना, मंडला, कटनी, पन्ना, बुरहानपुर, अशोकनगर, देवास, मंदसौर, खरगोन, भिंड, नीमच, शहडोल और उज्जैन जिलों में भी 1-1 एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि हुई है । इन सभी मामलों में मुख्य रूप से आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (अमानत में खयानत), 409, 120-बी (साजिश) और मध्य प्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम, 2000 की धारा 6(1) के तहत कार्रवाई की गई है । मैंने सवाल पूछा तो मुख्यमंत्री जी ने गलत जवाब दिया
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने बताया – मैंने विधानसभा में ये प्रश्न पूछा था कि सहारा समूह के चिटफंड घोटाले में मध्य प्रदेश के कितने निवेशकों का पैसा फंसा हुआ है? मैंने यह भी पूछा था कि इस मामले में मध्य प्रदेश में कुल कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं?
मुझे गृह मंत्री जो स्वयं मुख्यमंत्री जी हैं उन्होंने मुझे गलत उत्तर दिया। उन्होंने उत्तर में बताया कि मात्र चार एफआईआर भोपाल में हुई हैं। जबकि मेरे पास पूरी जानकारी है मैंने विधानसभा के अंदर कहा भी था कि पिछले 6 साल में 123 एफआईआर सहारा समूह के ऊपर दर्ज हुई हैं।
मैंने सदन में पूछा कि निवेशकों का कितना पैसा फंसा हुआ है और अब तक कितना पैसा वापस दिया गया है। उसके उत्तर में आंकडे़ नहीं दिए गए। जब मैंने सदन के अंदर राज्यमंत्री जी से पूछा तो उन्होंने स्वीकारा कि इसमें करीब साढे़ छह हजार करोड़ रुपए अटके पडे़ हैं। जो निवेशक छोटे परिवार के हैं किसान हैं, छोटे व्यापारी, घरेलू महिलाओं ने अपना पैसा सहारा समूह में जमा किया था। उनको यह कहा गया था कि तीन साल में वो राशि दोगुना हो जाएगी।
अफसोस की बात ये है कि उनको न्याय नहीं मिल पाया। सदन के अंदर मंत्री ने बताया कि साढे़ छह हजार करोड़ में से मात्र 300 करोड़ की रिकवरी हो पाई। ये मामला केन्द्र सरकार का गृह मंत्रालय देख रहा है फिर भी 5% वसूली हो पाई है। मैंने सदन के अंदर यह भी कहा कि इतनी बड़ी रकम अटकी पड़ी है, दूसरी तरफ 23 हजार करोड़ लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत दे रही है। तो क्या बचे हुए 6 हजार करोड़ रुपए छोटे निवेशकों को सरकार नहीं दे सकती।
हमने यह मांग की है कि सहारा समूह की जो जमीनें हैं उनका प्रकाशन करके नीलामी करके छोटे निवेशकों को पैसा वापस लौटाना चाहिए।


