भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में शनिवार को शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय और भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन के सहयोग से यह कार्यक्रम शताब्दी वर्ष समारोह के उपलक्ष्य में राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. मांडवी सिंह और एलुमनी एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. सीमा भारद्वाज ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागाध्यक्ष, शिक्षक, पूर्व छात्र और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। मुख्य आकर्षण पूर्व छात्र अक्षत अवस्थी की प्रस्तुति रही कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अक्षत अवस्थी की प्रस्तुति रही। उन्होंने राग देवगिरी बिलावल में विलंबित तिलवाड़ा ताल पर ‘ए बना ब्याहन आयो’ प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने तीनताल में छोटा ख्याल ‘मानो जरा अब माननी’ और एक दादरा बंदिश भी गाई।अक्षत अवस्थी के साथ हारमोनियम पर दिनकर द्विवेदी, तबले पर मोहित दुबे और तानपुरा पर अभिषेक कुमार ने संगत की। विश्वविद्यालय कलाओं की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने इस अवसर पर कहा कि शताब्दी वर्ष के ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान परंपरा से जोड़ते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय भारतीय संगीत और कलाओं की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा का संरक्षण और प्रचार-प्रसार करना था। विद्यार्थियों को उत्कृष्ट कलाकारों को सुनने और समझने का अवसर मिला, जिससे उन्हें अपने अध्ययन और साधना में नई दिशा मिली।


