कोरबा में जिला कोर्ट में कूटरचित पट्टे से जमानत लेने का मामला सामने आया है। इस मामले में एक ग्रामीण ने आरोपी की जमानत के लिए कोर्ट में एक पट्टा पेश किया, लेकिन पट्टे के कुछ पन्ने गायब थे। कोर्ट को शक हुआ और तहसील ऑफिस से जांच कराने का आदेश दिया। जांच में पता चला कि पट्टा नकली था। इसके बाद पट्टेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, यह मामला बिजली विभाग की शिकायत पर एक उपभोक्ता के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ा है। आरोपी जीवनदास महंत, जो ग्राम डूमरडीह का रहने वाला है, 1 जनवरी 2026 को रजगामार पुलिस चौकी में जमानत लेने कोर्ट गया था। जमानत के लिए उसने अपनी ऋण पुस्तिका नंबर 314955 पेश की। जांच के दौरान पता चला कि इसी पुस्तिका से 16 दिसंबर 2025 को उसने पहले ही पांच हजार रुपए की जमानत ली थी, लेकिन यह राशि पुस्तिका में दर्ज नहीं थी। इससे कोर्ट को शक हुआ। संदेह पर कोर्ट ने भैसमा तहसीलदार कार्यालय से ऋण पुस्तिका की जांच कराने का आदेश दिया। जांच में पता चला कि पुस्तिका फर्जी थी। हल्का पटवारी की रिपोर्ट में कहा गया कि यह किसान पुस्तिका उन्होंने जारी नहीं की थी और न ही उस पर उनके हस्ताक्षर हैं। रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि भैसमा में 4 अगस्त 2023 से नियमित तहसीलदार पदस्थ हैं, इसलिए 8 अप्रैल 2024 को अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा यह किताब जारी नहीं की जा सकती थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि तहसील कार्यालय से सत्यापन में कूटरचना का खुलासा होने के बाद कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इस आदेश का पालन करते हुए सिविल लाइन पुलिस ने फर्जी पट्टे से जमानत लेने का प्रयास करने वाले जीवनदास महंत के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(2), 336(3), 340(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।


