स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। सिद्धार्थनगर के मोहाना चौराहे पर बिना वैध पंजीकरण के पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित होने का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ कि आदर्श पैथोलॉजी और आर्यन अल्ट्रासाउंड का स्वास्थ्य विभाग में कोई वैध रजिस्ट्रेशन दर्ज नहीं है, इसके बावजूद यहां रोजाना मरीजों की जांच हो रही है। पड़ताल के दौरान स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड की जांच की गई। मोहाना चौराहे पर स्थित आदर्श पैथोलॉजी और आर्यन अल्ट्रासाउंड सेंटर का कोई वैध पंजीकरण नहीं मिला। नियमों के मुताबिक, किसी भी पैथोलॉजी सेंटर को संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। वहीं अल्ट्रासाउंड सेंटर को पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के तहत पंजीकरण और निर्धारित मानकों का पालन करना होता है। इसके बावजूद दोनों केंद्रों पर खुलेआम मरीजों की जांच की जा रही है। आदर्श पैथोलॉजी के बाहर बोर्ड स्पष्ट रूप से लगा है, जिससे साफ है कि यह लंबे समय से संचालित है। पैथोलॉजी से अल्ट्रासाउंड तक ‘नेटवर्क सिस्टम’ जांच में यह भी सामने आया कि दोनों सेंटर आपस में मिलकर काम कर रहे हैं। पैथोलॉजी में जांच कराने आए मरीजों को कर्मचारियों द्वारा पास के आर्यन अल्ट्रासाउंड सेंटर भेजा जाता है। आर्यन अल्ट्रासाउंड सेंटर के बाहर कोई बोर्ड नहीं लगा है, लेकिन अंदर मशीन के पास “आर्यन अल्ट्रासाउंड” नाम अंकित है और वहीं मरीजों की जांच की जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि यह पूरा सिस्टम एक नेटवर्क की तरह काम कर रहा है—एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक मरीजों को भेजकर जांच की जा रही है, वह भी बिना वैध अनुमति के। मोगीस हॉस्पिटल का मामला भी ठंडे बस्ते में मोहाना चौराहे पर स्थित मोगीस हॉस्पिटल एंड पॉलीक्लिनिक का मामला भी पहले सामने आ चुका है। अस्पताल के पास केवल 10 बेड का पंजीकरण है, लेकिन जांच के दौरान तीन अलग-अलग इमारतों में मरीज भर्ती मिले थे।पैथोलॉजी, एक्स-रे, ओपीडी और भर्ती वार्ड संचालित पाए गए, जो पंजीकरण की सीमा से अधिक था। खुलासे के बाद भी अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। यह स्थिति बताती है कि निरीक्षण प्रणाली या तो कमजोर है या फिर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। देखें 3 तस्वीरें… जांच होगी तक सीमित जवाब, मरीजों की सुरक्षा पर खतरा जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार चौरसिया से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और अवैध संचालन पाए जाने पर कार्रवाई होगी। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह जवाब पहले भी कई बार दिया जा चुका है। मोहाना चौराहा जिले का प्रमुख स्थान है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग आते-जाते हैं। ऐसे में इतने बड़े स्तर पर अवैध सेंटरों का संचालन बिना विभाग की जानकारी के संभव नहीं लगता। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पंजीकरण संचालित जांच केंद्र मरीजों के लिए गंभीर खतरा हैं। गलत रिपोर्ट के आधार पर गलत इलाज हो सकता है, जिससे मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है।


