कोर्ट:पति बेरोजगार हो तो परिवार की देखभाल करना उसकी जिम्मेदारी

हाई कोर्ट ने 40 हजार रुपए गुजारा भत्ता देने के आदेश को सही ठहराया मप्र हाई कोर्ट ने पति और पत्नी की क्रिमिनल रिवीजन को खारिज कर दिया। 23 नवंबर 2023 को कुटुंब न्यायालय, ग्वालियर के आदेश को यथावत रखते हुए हाई कोर्ट ने कहा- एक सक्षम पति को अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त धन कमाने में सक्षम माना जाना चाहिए। वह यह कहकर अपनी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि उसके पास आय का स्रोत नहीं है। पति ने अपनी वास्तविक आय का स्पष्ट खुलासा नहीं किया, जिसके आधार पर उसके विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष लिया गया। मामला ग्वालियर निवासी पति-पत्नी का है। दोनों का विवाह 24 जून 2012 को हुआ था। दोनों के दो बच्चे भी हैं। पत्नी का आरोप है कि 2018 में उसे ससुराल से भगा दिया गया। इसके बाद पत्नी ने गुजारा भत्ता प्राप्त करने कुटुंब न्यायालय में केस लगाया। इसमें कोर्ट ने पत्नी को 20 हजार रुपए और दोनों बच्चों को 10-10 हजार रुपए प्रतिमाह (कुल 40 हजार) देने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ पति के साथ ही पत्नी ने ​क्रिमिनल रिवीजन पेश की। पति ने दलील दी कि वह वर्तमान में बेरोजगार है, जबकि पत्नी ट्यूशन पढ़ाती है।पत्नी की ओर से दलील दी गई कि पति मर्चेंट नेवी में कार्यरत है और मासिक वेतन 2 लाख रुपए है। ऐसे में उसे एक लाख रुपए गुजारा भत्ता दिलाया जाए।

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