होली से पहले मुर्गियों में मिला खतरनाक H5N1 बर्ड फ्लू:पटना जू 7 दिनों के लिए बंद, सिविल सर्जन बोले-हाईअलर्ट पर अस्पताल; जानिए लक्षण और बचाव

होली से पहले मुर्गियों में मिला खतरनाक H5N1 बर्ड फ्लू:पटना जू 7 दिनों के लिए बंद, सिविल सर्जन बोले-हाईअलर्ट पर अस्पताल; जानिए लक्षण और बचाव

पटना में बर्ड फ्लू खतरनाक रूप लेते जा रहा है। पीसी कॉलोनी, कंकड़बाग के जू-सेक्टर पार्क और पटना हाईकोर्ट परिसर में कौवों और मुर्गियों की अचानक मौत के बाद H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने प्रभावित इलाके के 1 किलोमीटर क्षेत्र को संक्रमित घोषित कर दिया है। करीब 4575 मुर्गियों को मारा गया है। 9662 अंडे और 530 किलो दाना नष्ट किया गया है। जू-सेक्टर पार्क और संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है। H5N1 बर्ड फ्लू को कोरोना से भी खतरनाक माना जाता है। इसका जानवरों से इंसानों में फैलने का ज्यादा खतरा रहता है। इधर ऐसे मामले सामने आने के सिविल सर्जन ने सभी अस्पतालों को हाईअलर्ट पर रखा है। पटना में 6000 मुर्गियों को दफनाया गया पटना के चितकोहरा स्थित कौशल नगर में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पोल्ट्री फार्म में 6000 मुर्गियां बर्ड फ्लू से संक्रमित पाई गईं हैं। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने सभी मुर्गियों को दफना दिया है। संक्रमण की पुष्टि के बाद पूरे इलाके को सेनिटाइज किया गया। लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। मुर्गी फार्म क्षेत्र में बिना मास्क प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। यह इलाका एयरपोर्ट के पास चितकोहरा पुल के नीचे स्थित है। क्षेत्र में बड़ी आबादी रहने के कारण प्रशासन सतर्क है। पटना डीएम के आदेश पर नगर निगम क्षेत्र में मुर्गे और मुर्गियों को बाहर से लाने और बाहर ले जाने पर रोक लगा दी गई है। पशु स्वास्थ एवं उत्पादन संस्थान की 6 सदस्यीय टीम कौशल नगर स्थित पोल्ट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर में जांच के लिए पहुंची है। कौशल नगर के सभी वीवीआईपी इलाके में सैनिटाइजेशन का काम शुरू किया गया है। 1KM का एरिया इंफेक्शन जोन घोषित संक्रमित क्षेत्र के एक किलोमीटर दायरे को इंफेक्शन जोन घोषित किया गया है। 9 किलोमीटर क्षेत्र को सर्विलांस एरिया बनाया गया है। इस क्षेत्र में अंडा, मुर्गी और चारे के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। सेनिटाइजेशन प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही उपयोग की अनुमति होगी। कौशल नगर में चेक पोस्ट बनाया गया है। शास्त्रीनगर और बाइपास थाना पुलिस को निगरानी में लगाया गया है। अब जानिए डॉक्टर्स की टीम ने क्या कहा कौवों की मौत के बाद भेजे गए थे सैंपल भागलपुर, कटिहार, पटना और दरभंगा में 400 से अधिक कौवों में बर्ड फ्लू मिलने के बाद पोल्ट्री सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। डेयरी एवं पशु संसाधन विभाग द्वारा सैंपल भोपाल भेजे गए थे, जहां संक्रमण की पुष्टि हुई। एक महीने में पटना हाईकोर्ट, आईजीआईएमएस, मोकामा, कंकड़बाग और एफसीआई गोदाम समेत कई क्षेत्रों में 200 से अधिक कौवों की मौत हुई थी। मृत कौवों में एच-1एन-1 संक्रमण मिला था। अब जानिए H5N1 बर्ड फ्लू क्या है? H5N1 बर्ड फ्लू एक वायरस के कारण होता है। जो मुर्गियों, टर्की, कबूतर और तीतर जैसे पक्षियों को संक्रमित करता है। यह वायरस संक्रमित पक्षी के मल के साथ-साथ उसकी आंख, नाक या मुंह से निकलने वाले तरल पदार्थ में भी पाया जाता है। हाल ही में अमेरिका में H5N1 बर्ड फ्लू के वायरस ने बकरी, गाय और बिल्ली जैसे जानवरों को संक्रमित किया है। जो पहले कभी नहीं देखा गया।अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक संक्रमित जानवर या पक्षी के संपर्क रहा है तो उसके संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। बर्ड फ्लू आमतौर पर सीधे लोगों को संक्रमित नहीं करता है, हालांकि कुछ वजह हैं, जिनसे कोई व्यक्ति बर्ड फ्लू से संक्रमित हो सकता है। जैसेकि- H5N1 बर्ड फ्लू के लक्षण क्या हैं? H5N1 बर्ड फ्लू लोगों में आंख, नाक और मुंह के जरिए फैल सकता है। H5N1 बर्ड फ्लू के लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, बुखार और खांसी से लेकर गंभीर निमोनिया हो सकता है। इसके अलावा गंभीर स्थिति में पीड़ित को दौरा या उसकी मौत तक हो सकती है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके लक्षणों को समझ सकते हैं। H5N1 बर्ड फ्लू का डेथ रेट क्या है? विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक 1 जनवरी 2003 से 26 फरवरी 2024 तक H5N1 बर्ड फ्लू के 887 मामले दर्ज किए गए। इसमें 462 लोगों की मौत हो गई। यानी H5N1 बर्ड फ्लू से पीड़ित 52% लोगों की मौत हो जाती है। इस बीमारी को इसलिए भी बहुत घातक माना जा रहा कि क्योंकि कोविड-19 से संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 0.1% से कम है। हालांकि शुरुआत में कोविड-19 की मृत्यु दर 20% थी। डॉ. मनीष मंडल ने कहा- चिकेन को रोस्ट करके खाना बेहद खतरनाक बिहार में बर्ड फ्लू मामले पर चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. मनीष मंडल ने बताया, ये वायरस बीमारी है और इससे बचने का सामान्य सा तरीका है। अभी ऐसी हालत में मुर्गियों का सेवन नहीं करना चाहिए और अगर इसका सेवन करना है तो उसे प्रॉपर उबाल कर खाएं। रोस्ट करके खाना बेहद हानिकारक होगा। उबालने से उसके अंदर का वायरस मर जाता हैं। जिसके बाद उसका सेवन करने से कोई परेशानी नहीं होगी। ऐसे में लोगों को खाना हैं तो प्रॉपर उबाल कर खाएं अन्यथा इसका सेवन न करें। बर्ड फ्लू में अक्सर सांस संबंधित मरीजों को बचना चाहिए। क्योंकि इसका वायरस लंग्स और थ्रोट को प्रभावित करती हैं। सांस के मरीजों को गला और लंग्स से इफेक्ट होने के कारण ही परेशानी होती है। ऐसे में संक्रमण होने के कारण दमा और हार्ट के पेशेंट भी काफी प्रभावित होते है। उन्होंने बताया कि लोगों को अक्सर ऐसी अवस्था में गर्म पानी का सेवन करना चाहिए, जिससे गले एवं फेफड़ों में किसी प्रकार का संक्रमण न फैले। बर्ड फ्लू के खतरे से बचने के लिए किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए? पक्षियों या जानवरों के बीच H5N1 को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण जरूर कराएं। इसके अलावा ये टिप्स अपना सकते हैं, जैसेकि- ऐसे क्षेत्र में जाने के बाद हमेशा अपने हाथ धोएं, जहां पक्षी और अन्य वन्यजीव रहते हैं। H5N1 संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए जरूरी है कि पोल्ट्री फार्मों में काम करते समय ग्लव्स, फुल बाजू के कपड़े पहनें। ग्लव्स उतारने के बाद अपने हाथों को हैंड सैनिटाइजर से अच्छे से धोएं। अगर हैंड सैनिटाइजर नहीं है तो साबुन और पानी से भी साफ कर सकते हैं। पक्षियों, वन्यजीवों और उनके मल से अपने पालतू जानवर को दूर रखें। नीचे ग्राफिक में कुछ तरीके बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर H5N1 के संक्रमण से बचा जा सकता है। पटना में बर्ड फ्लू खतरनाक रूप लेते जा रहा है। पीसी कॉलोनी, कंकड़बाग के जू-सेक्टर पार्क और पटना हाईकोर्ट परिसर में कौवों और मुर्गियों की अचानक मौत के बाद H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने प्रभावित इलाके के 1 किलोमीटर क्षेत्र को संक्रमित घोषित कर दिया है। करीब 4575 मुर्गियों को मारा गया है। 9662 अंडे और 530 किलो दाना नष्ट किया गया है। जू-सेक्टर पार्क और संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है। H5N1 बर्ड फ्लू को कोरोना से भी खतरनाक माना जाता है। इसका जानवरों से इंसानों में फैलने का ज्यादा खतरा रहता है। इधर ऐसे मामले सामने आने के सिविल सर्जन ने सभी अस्पतालों को हाईअलर्ट पर रखा है। पटना में 6000 मुर्गियों को दफनाया गया पटना के चितकोहरा स्थित कौशल नगर में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पोल्ट्री फार्म में 6000 मुर्गियां बर्ड फ्लू से संक्रमित पाई गईं हैं। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने सभी मुर्गियों को दफना दिया है। संक्रमण की पुष्टि के बाद पूरे इलाके को सेनिटाइज किया गया। लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। मुर्गी फार्म क्षेत्र में बिना मास्क प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। यह इलाका एयरपोर्ट के पास चितकोहरा पुल के नीचे स्थित है। क्षेत्र में बड़ी आबादी रहने के कारण प्रशासन सतर्क है। पटना डीएम के आदेश पर नगर निगम क्षेत्र में मुर्गे और मुर्गियों को बाहर से लाने और बाहर ले जाने पर रोक लगा दी गई है। पशु स्वास्थ एवं उत्पादन संस्थान की 6 सदस्यीय टीम कौशल नगर स्थित पोल्ट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर में जांच के लिए पहुंची है। कौशल नगर के सभी वीवीआईपी इलाके में सैनिटाइजेशन का काम शुरू किया गया है। 1KM का एरिया इंफेक्शन जोन घोषित संक्रमित क्षेत्र के एक किलोमीटर दायरे को इंफेक्शन जोन घोषित किया गया है। 9 किलोमीटर क्षेत्र को सर्विलांस एरिया बनाया गया है। इस क्षेत्र में अंडा, मुर्गी और चारे के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। सेनिटाइजेशन प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही उपयोग की अनुमति होगी। कौशल नगर में चेक पोस्ट बनाया गया है। शास्त्रीनगर और बाइपास थाना पुलिस को निगरानी में लगाया गया है। अब जानिए डॉक्टर्स की टीम ने क्या कहा कौवों की मौत के बाद भेजे गए थे सैंपल भागलपुर, कटिहार, पटना और दरभंगा में 400 से अधिक कौवों में बर्ड फ्लू मिलने के बाद पोल्ट्री सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। डेयरी एवं पशु संसाधन विभाग द्वारा सैंपल भोपाल भेजे गए थे, जहां संक्रमण की पुष्टि हुई। एक महीने में पटना हाईकोर्ट, आईजीआईएमएस, मोकामा, कंकड़बाग और एफसीआई गोदाम समेत कई क्षेत्रों में 200 से अधिक कौवों की मौत हुई थी। मृत कौवों में एच-1एन-1 संक्रमण मिला था। अब जानिए H5N1 बर्ड फ्लू क्या है? H5N1 बर्ड फ्लू एक वायरस के कारण होता है। जो मुर्गियों, टर्की, कबूतर और तीतर जैसे पक्षियों को संक्रमित करता है। यह वायरस संक्रमित पक्षी के मल के साथ-साथ उसकी आंख, नाक या मुंह से निकलने वाले तरल पदार्थ में भी पाया जाता है। हाल ही में अमेरिका में H5N1 बर्ड फ्लू के वायरस ने बकरी, गाय और बिल्ली जैसे जानवरों को संक्रमित किया है। जो पहले कभी नहीं देखा गया।अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक संक्रमित जानवर या पक्षी के संपर्क रहा है तो उसके संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। बर्ड फ्लू आमतौर पर सीधे लोगों को संक्रमित नहीं करता है, हालांकि कुछ वजह हैं, जिनसे कोई व्यक्ति बर्ड फ्लू से संक्रमित हो सकता है। जैसेकि- H5N1 बर्ड फ्लू के लक्षण क्या हैं? H5N1 बर्ड फ्लू लोगों में आंख, नाक और मुंह के जरिए फैल सकता है। H5N1 बर्ड फ्लू के लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, बुखार और खांसी से लेकर गंभीर निमोनिया हो सकता है। इसके अलावा गंभीर स्थिति में पीड़ित को दौरा या उसकी मौत तक हो सकती है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके लक्षणों को समझ सकते हैं। H5N1 बर्ड फ्लू का डेथ रेट क्या है? विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक 1 जनवरी 2003 से 26 फरवरी 2024 तक H5N1 बर्ड फ्लू के 887 मामले दर्ज किए गए। इसमें 462 लोगों की मौत हो गई। यानी H5N1 बर्ड फ्लू से पीड़ित 52% लोगों की मौत हो जाती है। इस बीमारी को इसलिए भी बहुत घातक माना जा रहा कि क्योंकि कोविड-19 से संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 0.1% से कम है। हालांकि शुरुआत में कोविड-19 की मृत्यु दर 20% थी। डॉ. मनीष मंडल ने कहा- चिकेन को रोस्ट करके खाना बेहद खतरनाक बिहार में बर्ड फ्लू मामले पर चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. मनीष मंडल ने बताया, ये वायरस बीमारी है और इससे बचने का सामान्य सा तरीका है। अभी ऐसी हालत में मुर्गियों का सेवन नहीं करना चाहिए और अगर इसका सेवन करना है तो उसे प्रॉपर उबाल कर खाएं। रोस्ट करके खाना बेहद हानिकारक होगा। उबालने से उसके अंदर का वायरस मर जाता हैं। जिसके बाद उसका सेवन करने से कोई परेशानी नहीं होगी। ऐसे में लोगों को खाना हैं तो प्रॉपर उबाल कर खाएं अन्यथा इसका सेवन न करें। बर्ड फ्लू में अक्सर सांस संबंधित मरीजों को बचना चाहिए। क्योंकि इसका वायरस लंग्स और थ्रोट को प्रभावित करती हैं। सांस के मरीजों को गला और लंग्स से इफेक्ट होने के कारण ही परेशानी होती है। ऐसे में संक्रमण होने के कारण दमा और हार्ट के पेशेंट भी काफी प्रभावित होते है। उन्होंने बताया कि लोगों को अक्सर ऐसी अवस्था में गर्म पानी का सेवन करना चाहिए, जिससे गले एवं फेफड़ों में किसी प्रकार का संक्रमण न फैले। बर्ड फ्लू के खतरे से बचने के लिए किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए? पक्षियों या जानवरों के बीच H5N1 को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण जरूर कराएं। इसके अलावा ये टिप्स अपना सकते हैं, जैसेकि- ऐसे क्षेत्र में जाने के बाद हमेशा अपने हाथ धोएं, जहां पक्षी और अन्य वन्यजीव रहते हैं। H5N1 संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए जरूरी है कि पोल्ट्री फार्मों में काम करते समय ग्लव्स, फुल बाजू के कपड़े पहनें। ग्लव्स उतारने के बाद अपने हाथों को हैंड सैनिटाइजर से अच्छे से धोएं। अगर हैंड सैनिटाइजर नहीं है तो साबुन और पानी से भी साफ कर सकते हैं। पक्षियों, वन्यजीवों और उनके मल से अपने पालतू जानवर को दूर रखें। नीचे ग्राफिक में कुछ तरीके बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर H5N1 के संक्रमण से बचा जा सकता है।  

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