Pali Bull Attack Case: पाली जिले में अरावली की तलहटी में बसे जोजावर में एक परिवार 12 दिनों तक अपने बुजुर्ग की मौत को प्राकृतिक मानकर शोक मनाता रहा। परंपराओं और रस्मों के बीच बीते उन दिनों में किसी को अंदाजा भी नहीं था कि उनकी जिंदगी से जुड़ा सबसे बड़ा सच एक सीसीटीवी कैमरे में कैद है और वह सच बेहद दर्दनाक है।
जब फुटेज सामने आया तो परिवार की दुनिया हिल गई। जिस मौत को वे सामान्य समझ रहे थे, वह दरअसल एक सांड के हमले से हुई थी। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि गांवों में बढ़ती आवारा गोवंश की समस्या का भयावह चेहरा बनकर सामने आया है।
घर से निकले… फिर लौटे नहीं
6 फरवरी सुबह 76 वर्षीय नारायणलाल रावल घर से दुकान निकले थे। रास्ते में अचानक एक सांड ने उन पर हमला कर दिया। जोरदार टक्कर से वे गिर पड़े और अचेत हो गए। परिजन उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल, फिर पाली और बाद में जोधपुर ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घर में शोक छा गया। अंतिम संस्कार और सामाजिक परंपराओं में परिवार 12 दिनों तक व्यस्त रहा। सभी यही मानते रहे कि बुजुर्ग की मौत स्वाभाविक कारणों से हुई है।
पत्नी के आग्रह ने खोला सच
मृतक की पत्नी को लगातार शंका बनी रही। उनके बार-बार कहने पर बेटे ने उस जगह के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी। स्क्रीन पर जो दिखा, वह किसी भी बेटे के लिए असहनीय था, सांड के हमले से गिरते और तड़पते पिता। एक झटके में भ्रम टूट गया। शोक के साथ अब आक्रोश और बेबसी भी जुड़ गई।
परिवार की अपील: किसी और के साथ न हो ऐसा
मृतक नारायणलाल के बेटे विनय रावल का कहना है कि अगर सीसीटीवी नहीं देखते तो वे आज भी इसे प्राकृतिक मौत ही मानते। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि आवारा गोवंश की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए ताकि कोई और परिवार इस दर्द से न गुजरे।


