विदिशा में कमर की हड्डी टूटने के बाद परिजनों द्वारा छोड़ी गई 70 वर्षीय वृद्धा को आखिरकार सहारा मिल गया। विदिशा जिले के उमरिया गांव की रहने वाली लक्ष्मीबाई जाटव को दो महीने तक अस्पताल में लावारिस हालत में रहना पड़ा। अब अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज और एक वृद्धाश्रम की पहल से उन्हें सुरक्षित आश्रय और देखभाल मिल सकी है। लगभग दो महीने पहले लक्ष्मीबाई को उनके नाती ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। उस समय उसने अपना मोबाइल नंबर, पता और आधार कार्ड भी जमा किया, लेकिन इसके बाद वह संपर्क से बाहर हो गया। अस्पताल प्रबंधन ने कई बार दिए गए नंबर पर कॉल किया, मगर कोई जवाब नहीं मिला। इलाज भी हुआ, देखभाल भी लावारिस होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए वृद्धा का पूरा इलाज कराया। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने दो महीने तक नियमित उपचार के साथ उनकी देखभाल भी की। किसी भी सरकारी अस्पताल में किसी मरीज को अनिश्चितकाल तक रखना संभव नहीं होता। ऐसे में प्रशासन ने पुलिस और अन्य विभागों की मदद से परिजनों की तलाश कराई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद एक वृद्धाश्रम से संपर्क कर लक्ष्मीबाई के पुनर्वास की व्यवस्था की गई। वृद्धाश्रम में अब मिलेगी पूरी देखभाल वृद्धाश्रम की टीम अस्पताल पहुंची और लक्ष्मीबाई को अपने साथ ले गई। आश्रम अध्यक्ष इंदिरा शर्मा ने बताया कि वृद्धा को बिस्तर पर ही भोजन, स्नान और शौच सहित सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी। उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच और विशेष निगरानी भी की जाएगी। वृद्धाश्रम संचालक वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि भविष्य में लावारिस और असहाय बुजुर्गों की बेहतर सेवा के लिए विशेष केयरगिवर टीम बनाने की योजना है। इसमें सामाजिक संगठनों के साथ मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों को भी जोड़ा जाएगा।


