वाराणसी: बाल यौन शोषण के आरोपों से घिरे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस बारे में शंकराचार्य ने बताया कि झूठ की उम्र ज्यादा देर तक नहीं होती और सच आखिरकार सामने आ ही जाता है, इसलिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है।
मुझे पता था लोग झूठ से परेशान होंगे: शंकराचार्य
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदने कहा कि शंकराचार्य नामक संस्था को बदनाम करने की पूरी कोशिश की गई थी। न्यायालय के आदेश ने उसको ढहा दिया है। उन्होंने कहा कि मुझे पता था झूठ की भी ताकत होती है, लेकिन झूठ की ताकत परेशान करने की होती है, जबकि सत्य की ताकत पराजित करने की होती है। मुझे पता था कि झूठ थोड़ी देर तक अपना काम करेगा और लोग इससे परेशान होंगे।
झूठ की कलई न्यायालय में खुल गई: शंकराचार्य
उन्होंने कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिन बातों को जनता के सामने रखा और जिस तरह से झूठा प्रोपेगेंडा फैलाया, आज उसकी कलाई न्यायालय में खुल गई। हम इस बात के साक्षी बने हैं कि एक व्यक्ति झूठा प्रोपेगेंडा लेकर लोगों के सामने आता है, सभी को अपने पीछे घूमने की कोशिश करता है, कानून का किस तरह से दुरुपयोग होता है, यह सब हमने देख लिया। शंकराचार्य ने कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाने को सत्य की जीत बताया है।
24 फरवरी को दायर हुई थी याचिका
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया। इस मामले में जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। शंकराचार्य ने 24 फरवरी को मामले में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।


