60 लाख खर्च के बाद सड़कों किनारे जल रहा कचरा:मुंगेर में धुएं से कचरा भवन की दीवारें काली हुई

60 लाख खर्च के बाद सड़कों किनारे जल रहा कचरा:मुंगेर में धुएं से कचरा भवन की दीवारें काली हुई

मुंगेर में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर हर महीने 60 लाख 60 हजार रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कई पंचायतों में घर-घर से उठाया गया कचरा डंपिंग यार्ड तक पहुंचने के बजाय सड़कों किनारे फेंककर जलाया जा रहा है। यह स्थिति अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है। खुले में कचरा जलाने से न सिर्फ पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। यह कचरा प्रबंधन के लिए आवंटित भारी भरकम राशि के बावजूद हो रहा है। कचरा डंप कर उसमें आग लगाने की तस्वीरें सामने आईं भास्कर टीम की पड़ताल में हवेली खड़गपुर, जमालपुर और तारापुर अनुमंडल क्षेत्रों में कई जगहों पर खुले में कचरा डंप कर उसमें आग लगाने की तस्वीरें सामने आईं। खड़गपुर प्रखंड की नाकी पंचायत में सति स्थान जाने वाली सड़क पर बने कचरा भवन के बजाय करीब 500 मीटर दूर तक कचरा फेंककर जलाया जा रहा है। धुएं से कचरा भवन की दीवारें तक काली पड़ गई हैं, जो उसकी निष्क्रियता का प्रमाण है। जिले के नौ प्रखंडों में 1283 वार्ड के 487 गांवों में घर-घर कचरा उठाव किया जा रहा है। धरहरा में 8.30 लाख, सदर में 8.63 लाख, जमालपुर में 6.44 लाख, हवेली खड़गपुर में 6.34 लाख और तारापुर में 5.60 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद कचरे का समुचित निस्तारण नहीं हो पा रहा है। नौ पंचायतों में अब तक कचरा भवन ही नहीं बना स्थिति यह है कि धरहरा के सिंघिया, बरियारपुर के कल्याण टोला व कालारामपुर, जमालपुर के पड़हम, सदर के जानकीनगर, तारापुर के मानिकपुर और हवेली खड़गपुर के दरियापुर-2 समेत नौ पंचायतों में अब तक कचरा भवन ही नहीं बना है। यह बुनियादी ढांचे की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है। मुंगेर विश्वविद्यालय के पीजी बॉटनी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप टाटा के अनुसार, खुले में कचरा जलाने से डाइऑक्सिन व फ्यूरान जैसे कैंसरकारी रसायन निकलते हैं। ये रसायन अस्थमा, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, इससे मिट्टी, पानी और ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचता है। मामले की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी इस संबंध में जिला समन्वयक अशीम आनंद ने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जहां भी लापरवाही मिलेगी, संबंधित प्रखंड कोऑर्डिनेटर का वेतन रोका जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुंगेर में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर हर महीने 60 लाख 60 हजार रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कई पंचायतों में घर-घर से उठाया गया कचरा डंपिंग यार्ड तक पहुंचने के बजाय सड़कों किनारे फेंककर जलाया जा रहा है। यह स्थिति अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है। खुले में कचरा जलाने से न सिर्फ पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। यह कचरा प्रबंधन के लिए आवंटित भारी भरकम राशि के बावजूद हो रहा है। कचरा डंप कर उसमें आग लगाने की तस्वीरें सामने आईं भास्कर टीम की पड़ताल में हवेली खड़गपुर, जमालपुर और तारापुर अनुमंडल क्षेत्रों में कई जगहों पर खुले में कचरा डंप कर उसमें आग लगाने की तस्वीरें सामने आईं। खड़गपुर प्रखंड की नाकी पंचायत में सति स्थान जाने वाली सड़क पर बने कचरा भवन के बजाय करीब 500 मीटर दूर तक कचरा फेंककर जलाया जा रहा है। धुएं से कचरा भवन की दीवारें तक काली पड़ गई हैं, जो उसकी निष्क्रियता का प्रमाण है। जिले के नौ प्रखंडों में 1283 वार्ड के 487 गांवों में घर-घर कचरा उठाव किया जा रहा है। धरहरा में 8.30 लाख, सदर में 8.63 लाख, जमालपुर में 6.44 लाख, हवेली खड़गपुर में 6.34 लाख और तारापुर में 5.60 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद कचरे का समुचित निस्तारण नहीं हो पा रहा है। नौ पंचायतों में अब तक कचरा भवन ही नहीं बना स्थिति यह है कि धरहरा के सिंघिया, बरियारपुर के कल्याण टोला व कालारामपुर, जमालपुर के पड़हम, सदर के जानकीनगर, तारापुर के मानिकपुर और हवेली खड़गपुर के दरियापुर-2 समेत नौ पंचायतों में अब तक कचरा भवन ही नहीं बना है। यह बुनियादी ढांचे की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है। मुंगेर विश्वविद्यालय के पीजी बॉटनी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप टाटा के अनुसार, खुले में कचरा जलाने से डाइऑक्सिन व फ्यूरान जैसे कैंसरकारी रसायन निकलते हैं। ये रसायन अस्थमा, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, इससे मिट्टी, पानी और ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचता है। मामले की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी इस संबंध में जिला समन्वयक अशीम आनंद ने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जहां भी लापरवाही मिलेगी, संबंधित प्रखंड कोऑर्डिनेटर का वेतन रोका जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  

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