टक्कर से ऑक्सीजन प्लांट की पाइप लाइन और केबल टूटी:सप्लाई बाधित, प्लांट की टीम ने हाथोहाथ दुरुस्त की सप्लाई की व्यवस्था, बड़ा हादसा टला

टक्कर से ऑक्सीजन प्लांट की पाइप लाइन और केबल टूटी:सप्लाई बाधित, प्लांट की टीम ने हाथोहाथ दुरुस्त की सप्लाई की व्यवस्था, बड़ा हादसा टला

जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के न्यू मेडिसिन ब्लॉक में गुरुवार देर रात नए पलंग लेकर आए ट्रक कंटेनर की टक्कर से ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट का पाइप और केबल टूट गई। अचानक ऑक्सीजन की पाइप लाइन टूटने से पुरानी बिल्डिंग में सप्लाई बाधित हो गई। गनीमत रही कि नाइट शिफ्ट में मौजूद स्टाफ ने हाथोहाथ व्यवस्था करके मैनीफोल्ड और लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से सप्लाई चालू कर दी। यह प्लांट करीब 1 साल से बंद था। इसे 15 दिन पहले ही रिपेयर करके फिर से चालू किया गया था। यह दोनों प्लांट पीएम केअर और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कोरोना में बनाए गए थे। इनकी क्षमता एक 1000 एम्पियर की है। न्यू मेडिसिन ब्लॉक में ढाई सौ पलंग की सप्लाई का काम पिछले दो दिनों से चल रहा है। दो दिन से यहां कंटेनर सामान लेकर आ रहा है। प्लांट के कर्मचारियों ने बताया कि कल सुबह से ही चालक को मना किया जा रहा है कि इस तरफ से कंटेनर नहीं लेकर आए। विजयलक्ष्मी पार्क के वहां से रास्ता खाली है। इसके बावजूद कंटेनर चालक शॉर्टकट के चक्कर में यहां से कंटेनर लेकर आ रहा है। रात को लिक्विड प्लांट के निकट से गुजरते समय ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट की केवल और पाइप उसकी जद में आ गए। कंटेनर का ऊपरी हिस्सा उसमें फंस जाने से दोनों टूट गए। प्लांट से एकदम गैस लीक की आवाज आने के बाद वह मौजूद स्टाफ ने सप्लाई बंद की। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। कर्मचारियों ने बताया कि 1000 लीटर एमपीएल क्षमता वाले इन प्लांट से प्रति मिनट ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। 15 दिन पहले ही चालू हुआ था प्लांट पीएम केअर और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से दोनों ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट बनाए गए थे। इतने समय से यह प्लांट खराब थे इन्हें 15 दिन पहले ही रिपेयर करके फिर से चालू किया गया था। इन दोनों के खराब होने से मैनीफोल्ड और लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से ही सप्लाई हो रही थी। गनीमत रही कि कंटेनर की टक्कर से कुछ कदम की दूरी पर स्थित लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट के कंटेंट कैप्सूल को कोई नुकसान नहीं हुआ। 22 केएल की क्षमता वाले इस लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में बुधवार को ही ऑक्सीजन भरी गई थी। इसके दूसरी तरफ मिनी लिक्विड ऑक्सीजन के 12 कंटेनर लगे हुए हैं। कंटेनर चालक की यह लापरवाही अस्पताल में बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।

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