इंडियन ऑयल के बरौनी रिफाइनरी में आज भूकंप आधारित मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य था कि संभावित आपदा की स्थिति में आपातकालीन तैयारियों की प्रभावशीलता का आकलन करना और प्रतिक्रिया तंत्र को और सुदृढ़ बनाना। इसके लिए बरौनी रिफाइनरी की कैंटीन बिल्डिंग को चिन्हित किया गया। जहां परिदृश्य के अनुसार भवन के पश्चिमी हिस्से में गंभीर संरचनात्मक दरार उत्पन्न होने की संभावना दर्शाई गई। जिसमें अंदर कार्यरत कर्मियों के फंसने और घायल होने की स्थिति का आकलन किया गया। आपातकालीन सूचना मिलते ही रिफाइनरी का फायर एंड सेफ्टी विभाग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। जहां कैंटीन का मुख्य प्रवेश द्वार गिरी हुई मेटल शीट के कारण अवरुद्ध पाया गया, जिसे रेस्क्यू टीम ने कटर की सहायता से हटाकर सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इसके साथ ही जिला प्रशासन को सूचना देते हुए समन्वित बहु-एजेंसी प्रतिक्रिया प्रणाली सक्रिय की गई। जिसमें इंडियन ऑयल की सुरक्षा एजेंसी CISF और DGR शामिल थी। टीम ने भी बचाव व सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ड्रिल के तहत प्रभावित व्यक्तियों को बेगूसराय स्थित गांधी स्टेडियम ले जाया गया, जहां कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और अस्थायी राहत शिविर की स्थापना की गई थी। आईओसीएल की ओर से केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, डीजीआर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सूचना प्रणाली, तकनीकी सेवा, मानव संसाधन, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, स्वास्थ्य सुरक्षा व पर्यावरण, अग्नि एवं सुरक्षा और अधिगम व विकास विभागों की टीमों ने जिला प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित किया। दो घंटे तक चले इस मॉक ड्रिल के बाद कैंटीन बिल्डिंग के असेंबली पॉइंट पर डी-ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया। प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव वर्चुअल माध्यम से जुड़े अंतिम डी-ब्रीफिंग गांधी स्टेडियम में अपर जिला दंडाधिकारी आपदा प्रबंधन की अध्यक्षता में हुई। जिसमें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव वर्चुअल माध्यम से जुड़े। कॉर्पोरेट संचार अधिकारी अर्पिता पटेल ने बताया कि यह मॉक ड्रिल बरौनी रिफाइनरी की आपातकालीन तैयारियों, अंतर-एजेंसी समन्वय तथा जन-धन की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। इंडियन ऑयल के बरौनी रिफाइनरी में आज भूकंप आधारित मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य था कि संभावित आपदा की स्थिति में आपातकालीन तैयारियों की प्रभावशीलता का आकलन करना और प्रतिक्रिया तंत्र को और सुदृढ़ बनाना। इसके लिए बरौनी रिफाइनरी की कैंटीन बिल्डिंग को चिन्हित किया गया। जहां परिदृश्य के अनुसार भवन के पश्चिमी हिस्से में गंभीर संरचनात्मक दरार उत्पन्न होने की संभावना दर्शाई गई। जिसमें अंदर कार्यरत कर्मियों के फंसने और घायल होने की स्थिति का आकलन किया गया। आपातकालीन सूचना मिलते ही रिफाइनरी का फायर एंड सेफ्टी विभाग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। जहां कैंटीन का मुख्य प्रवेश द्वार गिरी हुई मेटल शीट के कारण अवरुद्ध पाया गया, जिसे रेस्क्यू टीम ने कटर की सहायता से हटाकर सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इसके साथ ही जिला प्रशासन को सूचना देते हुए समन्वित बहु-एजेंसी प्रतिक्रिया प्रणाली सक्रिय की गई। जिसमें इंडियन ऑयल की सुरक्षा एजेंसी CISF और DGR शामिल थी। टीम ने भी बचाव व सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ड्रिल के तहत प्रभावित व्यक्तियों को बेगूसराय स्थित गांधी स्टेडियम ले जाया गया, जहां कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और अस्थायी राहत शिविर की स्थापना की गई थी। आईओसीएल की ओर से केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, डीजीआर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सूचना प्रणाली, तकनीकी सेवा, मानव संसाधन, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, स्वास्थ्य सुरक्षा व पर्यावरण, अग्नि एवं सुरक्षा और अधिगम व विकास विभागों की टीमों ने जिला प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित किया। दो घंटे तक चले इस मॉक ड्रिल के बाद कैंटीन बिल्डिंग के असेंबली पॉइंट पर डी-ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया। प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव वर्चुअल माध्यम से जुड़े अंतिम डी-ब्रीफिंग गांधी स्टेडियम में अपर जिला दंडाधिकारी आपदा प्रबंधन की अध्यक्षता में हुई। जिसमें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव वर्चुअल माध्यम से जुड़े। कॉर्पोरेट संचार अधिकारी अर्पिता पटेल ने बताया कि यह मॉक ड्रिल बरौनी रिफाइनरी की आपातकालीन तैयारियों, अंतर-एजेंसी समन्वय तथा जन-धन की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।


