समस्तीपुर के विभूतिपुर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की का बाल विवाह रोका गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर यह कार्रवाई की। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीणों को बाल विवाह न करने की शपथ भी दिलाई गई। घटना विभूतिपुर थाना क्षेत्र के आलमपुर कोदरिया मुसहरी गांव की है। यहां मुसहर समुदाय के एक परिवार ने अपनी नाबालिग बेटी का बाल विवाह करने की पूरी तैयारी कर ली थी। एक निजी संस्था से मिली सूचना के आधार पर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह बाल विवाह निषेध पदाधिकारी चंद्र मोहन पासवान और चाइल्ड हेल्पलाइन समस्तीपुर से मुन्ना कमलेश कुमार की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम ने हस्तक्षेप कर विवाह को रुकवाया। बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाया प्रखंड विकास पदाधिकारी ने लड़की के माता-पिता को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाया। उन्होंने माता-पिता से भविष्य में बाल विवाह न करने का लिखित वचन पत्र भी लिया। हालांकि, माता-पिता ने लड़के पक्ष का पता बताने से इनकार कर दिया। इस दौरान, बीडीओ ने गांव के सैकड़ों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया और सभी को इस कुरीति को रोकने की शपथ दिलाई। निजी संस्था के रेस्क्यू टीम इंचार्ज कमलेश कुमार ने बताया कि उनकी टीम को बाल विवाह की सूचना मिली थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। बिहार सरकार बाल विवाह रोकने के लिए कई कठोर कानून बना चुकी है और समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाती है। प्रशासनिक और सामाजिक संगठनों के ऐसे प्रयास बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समस्तीपुर के विभूतिपुर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की का बाल विवाह रोका गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर यह कार्रवाई की। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीणों को बाल विवाह न करने की शपथ भी दिलाई गई। घटना विभूतिपुर थाना क्षेत्र के आलमपुर कोदरिया मुसहरी गांव की है। यहां मुसहर समुदाय के एक परिवार ने अपनी नाबालिग बेटी का बाल विवाह करने की पूरी तैयारी कर ली थी। एक निजी संस्था से मिली सूचना के आधार पर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह बाल विवाह निषेध पदाधिकारी चंद्र मोहन पासवान और चाइल्ड हेल्पलाइन समस्तीपुर से मुन्ना कमलेश कुमार की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम ने हस्तक्षेप कर विवाह को रुकवाया। बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाया प्रखंड विकास पदाधिकारी ने लड़की के माता-पिता को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाया। उन्होंने माता-पिता से भविष्य में बाल विवाह न करने का लिखित वचन पत्र भी लिया। हालांकि, माता-पिता ने लड़के पक्ष का पता बताने से इनकार कर दिया। इस दौरान, बीडीओ ने गांव के सैकड़ों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया और सभी को इस कुरीति को रोकने की शपथ दिलाई। निजी संस्था के रेस्क्यू टीम इंचार्ज कमलेश कुमार ने बताया कि उनकी टीम को बाल विवाह की सूचना मिली थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। बिहार सरकार बाल विवाह रोकने के लिए कई कठोर कानून बना चुकी है और समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाती है। प्रशासनिक और सामाजिक संगठनों के ऐसे प्रयास बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


