कचरा घोटाले में ठेकेदार सहित अन्य जिम्मेदार कार्रवाई से बचे।
बैतूल। ट्रेंचिंग ग्राउंड घोटाले की जांच में नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने निविदा शर्तों के अनुरूप कार्य निष्पादन नहीं होने के बावजूद ठेकेदार को अनियमित रूप से भुगतान किए जाने के मामले में सीएमओ और उपयंत्री को निलंबित कर दिया हैं, लेकिन मामले में नोएडा की ईको स्टैंड कंपनी के ठेकेदार के विरूद्ध अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है। हालांकि जांच के दौरान ही नगरपालिका से ठेका अनुबंध, किए गए कार्य और भुगतान आदि के संबंध में पूरा डेटा पहले ही ले लिया गया था, लेकिन ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाई में विलंब को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में जांच रिपोर्ट का विवरण भी अभी तक सामने नहंीं आया हैं। केवल आयुक्त के आदेश के आधार पर ही निलंबन की कार्रवाई की गई है। इधर, सीएमओ के निलंबन के बाद एसडीएम को नगरपालिका सीएमओ और डूडा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
ईको स्टैंड कंपनी को 2.41 करोड़ का भुगतान
ट्रेंचिंग ग्राउंड में मौजूद 1.35 लाख टन कचरे का वैज्ञानिक पद्धति से निष्पादन किए जाने के लिए नगरपाकिला ने टेंडर किए थे। नोएडा की ईको स्टैंड कंपनी ने बिलो रेट पर 5 करोड़ 70 लाख में टेंडर हासिल किया था। कंपनी को 9 माह की तय-समय सीमा में कचरे का निष्पादन कर उठाव करना था। ट्रेंचिंग ग्राउंड में काम शुरू करने के बाद नगरपालिका ने नपा द्वारा ठेकेदार को सबसे पहले 20 मई 2025 को 87 लाख 83 हजार, 28 मई को 87 लाख 83 हजार और 17 जून को 65 लाख 87 हजार रूपए का भुगतान कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी ठेकेदार द्वारा काम पूरा नहीं किया गया। ठेका कंपनी द्वारा दावा किया जाने लगा कि उन्होंने टेंडर शर्तो के अनुसार काम पूरा कर लिया है। यही से विवाद शुरू हुआ। ठेका कंपनी द्वारा ट्रेंचिंग ग्राउंड पर काम बंद कर दिया गया। जिसकी वजह से कचरे के ढेर के कारण रहवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। मामले में शिकायत के बाद विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कलेक्टर को जांच कराने के आदेश दिए थे।
अन्य अधिकारी भी जांच के दायरे में
नगरपालिका द्वारा ईको स्टैंड कंपनी के ठेकेदार को किए गए भुगतान की एक प्रक्रिया है। इस निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपयंत्री द्वारा स्थल निरीक्षण कर कार्य का सत्यापन किया जाता है और माप पुस्तिका (एमबी) में दर्ज किया जाता है। इसके बाद फाइल एई और ईई के स्तर से होकर सीएमओ तक पहुंचती है। अंतिम स्वीकृति के बाद ही भुगतान जारी होता है। ऐसे में केवल सीएमओ और उपयंत्री पर कार्रवाई होने तथा अन्य अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई लंबित रहने से प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। जांच रिपोर्ट का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। फिलहाल आयुक्त के आदेश के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है, जबकि अन्य
अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी बताई जा रही है।
एसडीएम को पीओ डूडा और सीएमओ बैतूल का प्रभार
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने एसडीएम बैतूल डॉ अभिजीत सिंह को परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण बैतूल और मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद बैतूल का प्रभार सौंपा है। एसडीएम बैतूल अपने कार्यों के साथ साथ आगमी आदेश पर्यंत पीओ डूडा और सीएमओ बैतूल के दायित्वों का भी निर्वहन करेंगे। एसडीएम के पास पहले से अतिरिक्त प्रभारी हैं। ऐसे में उन्हें बैतूल सीएमओ व डूडा इंचार्ज बनाए जाने प्रशासनिक कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस पार्षद ने कार्रवाई को बताया पक्षपातपूर्ण
बैतूल। जाकिर हुसैन वार्ड की कांग्रेस पार्षद नंदिनी तिवारी ने गौठाना ट्रेचिंग ग्राउंड की लीगेसी वेस्ट सफाई परियोजना में हुई गड़बड़ी को लेकर सीएमओ और उपयंत्री के निलंबन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लगभग तीन करोड़ रुपए की परियोजना में केवल दो अधिकारियों पर कार्रवाई करना वास्तविक जिम्मेदारों को बचाने और पूरे मामले को दबाने का प्रयास प्रतीत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी वित्तीय परियोजना में निर्णय और भुगतान किसी एक या दो अधिकारियों के स्तर पर संभव नहीं होते। नगर निकायों के नियमों के अनुसार मुख्य नगर पालिका अधिकारी पांच लाख रुपए से अधिक के भुगतान पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता, ऐसे में तीन करोड़ रुपए के कार्य में हुए भुगतानों की स्वीकृति किन स्तरों से मिली, यह बड़ा प्रश्न है।


