नवयुग कन्या महाविद्यालय में ‘संस्थापक दिवस’ के अवसर पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत स्वर्गीय दीनदयाल ‘बाबूजी’ की 112वीं जयंती को समर्पित था। कार्यक्रम की शुरुआत बाबूजी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद शिक्षाविदों ने उनके जीवन दर्शन और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद किया।मुख्य वक्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जिस दौर में बालिका शिक्षा के लिए एक अलग संस्थान की कल्पना करना भी एक बड़ी चुनौती थी, उस समय बाबूजी ने यह साहसिक कदम उठाया। शिक्षा समाज के उत्थान का सबसे सशक्त माध्यम प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने बताया कि महाविद्यालय हर वर्ष इस दिन को ‘संस्थापक दिवस’ के रूप में मनाता है, ताकि संस्थान की पुरानी परंपराओं को अक्षुण्ण रखा जा सके। उन्होंने बाबूजी के अनुशासन और दूरदर्शिता को संस्थान की मजबूत नींव बताया, साथ ही शिक्षा को समाज के उत्थान का सबसे सशक्त माध्यम करार दिया।सभा में यह भी बताया गया कि महाविद्यालय की भूमि राजा बलरामपुर द्वारा दान में दी गई थी, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है। महाविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प प्रो. गीताली रस्तोगी ने शिक्षा रूपी वटवृक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. ऋचा शुक्ला और प्रो. संगीता शुक्ला ने महिला शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को वंदनीय बताया।प्रो. संगीता कोतवाल ने उनके आदर्शों पर चलते हुए महाविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प दोहराया। प्रो. सीमा सरकार ने नैतिक मूल्यों और संस्थागत अनुशासन के महत्व पर जोर दिया। सभा में सभी शिक्षिकाओं और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की, और संस्मरण साझा करते समय माहौल भावुक हो गया।


