औरंगाबाद में दवा खाने से 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ी है। दरअसल, ओबरा प्रखंड अंतर्गत करसांवा मध्य स्कूल में आज फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया गया। इसके तहत बच्चों को सामूहिक रूप से दवा खिलाई गई। दवा खाने के आधे से एक घंटे के अंदर करीब 25 बच्चे बीमार हो गए। इन्होंने पेट में जलन, चक्कर, सिरदर्द और उल्टी की शिकायत की। अचानक कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने से स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षकों ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी और सभी प्रभावित बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओबरा पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। इधर, पैरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चों को गलत दवा खिला दी गई है। स्कूल और डॉक्टर की तरफ से उन्हें बच्चों के बीमार होने की जानकारी भी नहीं दी गई। वो बच्चा चोरी की अफवाह से डरे हुए थे। बच्चे घर नहीं पहुंचे, तो उन्होंने खोजबीन की। जिसके बाद बच्चों के हॉस्पिटल में एडमिट होने का पता चला। चार बच्चों की स्थिति अधिक खराब होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, रेफर किया गया। डॉक्टरों ने सभी बच्चों को स्लाइन चढ़ाकर निगरानी में रखा। देर शाम तक सभी बच्चों की हालत में सुधार हो गया और डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि दवा खिलाने से पहले पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई, जबकि कुछ ने दवा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। ग्रामीण सिकंदर पासवान ने बताया कि एक साथ 25 बच्चों के बीमार होने की सूचना पर स्कूल में अफरा तफरी मच गई। लेकिन डॉक्टरों ने इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी। जब बच्चे घर नहीं पहुंचे तो परिजनों को उनकी चिंता हुई। आजकल बच्चा चोर के अफवाह को लेकर परिजन भयभीत हो गए। जब जानकारी ली गई, तो पता चला कि बच्चों को अस्पताल ले जाया गया है। सूचना मिलने पर सभी बच्चों के परिजन अस्पताल पहुंचे। जहां चार बच्चों की स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें रेफर कर दिया गया था। उन्होंने दवा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया। सिविल सर्जन बोले – पूरी तरह सुरक्षित है दवा सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत डाइएथाइलकार्बामाज़ीन (DEC) और अल्बेंडाजोल की दवा दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा पूरी तरह सुरक्षित है और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में ही बच्चों को दी जाती है। दवा सेवन के बाद हल्का बुखार, चक्कर, उल्टी या पेट में जलन जैसे लक्षण सामान्य प्रतिक्रिया हो सकते हैं, जो शरीर में मौजूद परजीवियों के नष्ट होने के कारण होते हैं। ये लक्षण अस्थायी होते हैं और कुछ समय बाद खुद ही ठीक हो जाते हैं। सिविल सर्जन ने अभिभावकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और फाइलेरिया मुक्त समाज के निर्माण में मदद करें। औरंगाबाद में दवा खाने से 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ी है। दरअसल, ओबरा प्रखंड अंतर्गत करसांवा मध्य स्कूल में आज फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया गया। इसके तहत बच्चों को सामूहिक रूप से दवा खिलाई गई। दवा खाने के आधे से एक घंटे के अंदर करीब 25 बच्चे बीमार हो गए। इन्होंने पेट में जलन, चक्कर, सिरदर्द और उल्टी की शिकायत की। अचानक कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने से स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षकों ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी और सभी प्रभावित बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओबरा पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। इधर, पैरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चों को गलत दवा खिला दी गई है। स्कूल और डॉक्टर की तरफ से उन्हें बच्चों के बीमार होने की जानकारी भी नहीं दी गई। वो बच्चा चोरी की अफवाह से डरे हुए थे। बच्चे घर नहीं पहुंचे, तो उन्होंने खोजबीन की। जिसके बाद बच्चों के हॉस्पिटल में एडमिट होने का पता चला। चार बच्चों की स्थिति अधिक खराब होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, रेफर किया गया। डॉक्टरों ने सभी बच्चों को स्लाइन चढ़ाकर निगरानी में रखा। देर शाम तक सभी बच्चों की हालत में सुधार हो गया और डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि दवा खिलाने से पहले पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई, जबकि कुछ ने दवा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। ग्रामीण सिकंदर पासवान ने बताया कि एक साथ 25 बच्चों के बीमार होने की सूचना पर स्कूल में अफरा तफरी मच गई। लेकिन डॉक्टरों ने इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी। जब बच्चे घर नहीं पहुंचे तो परिजनों को उनकी चिंता हुई। आजकल बच्चा चोर के अफवाह को लेकर परिजन भयभीत हो गए। जब जानकारी ली गई, तो पता चला कि बच्चों को अस्पताल ले जाया गया है। सूचना मिलने पर सभी बच्चों के परिजन अस्पताल पहुंचे। जहां चार बच्चों की स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें रेफर कर दिया गया था। उन्होंने दवा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया। सिविल सर्जन बोले – पूरी तरह सुरक्षित है दवा सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत डाइएथाइलकार्बामाज़ीन (DEC) और अल्बेंडाजोल की दवा दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा पूरी तरह सुरक्षित है और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में ही बच्चों को दी जाती है। दवा सेवन के बाद हल्का बुखार, चक्कर, उल्टी या पेट में जलन जैसे लक्षण सामान्य प्रतिक्रिया हो सकते हैं, जो शरीर में मौजूद परजीवियों के नष्ट होने के कारण होते हैं। ये लक्षण अस्थायी होते हैं और कुछ समय बाद खुद ही ठीक हो जाते हैं। सिविल सर्जन ने अभिभावकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और फाइलेरिया मुक्त समाज के निर्माण में मदद करें।


