मिर्जापुर में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के विरोध में गुरुवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग को लेकर डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा गया। इस प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ और उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के पदाधिकारी और सदस्य शामिल रहे। नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से छूट की मांग वक्ताओं ने बताया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 को 27 जुलाई 2011 से लागू किया गया था। इस अधिनियम के प्रभावी होने के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था, जबकि इससे पहले नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से छूट दी गई थी। शिक्षक नेताओं के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद अब देशभर में आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षकों ने इसे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के साथ अन्याय बताया है। शिक्षकों पर नई शर्त थोपना न्यायसंगत नहीं शिक्षकों ने कहा कि वे ‘टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं। उनकी केंद्र सरकार से मांग है कि अध्यादेश लाकर आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए। उनका तर्क है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्त थोपना न्यायसंगत नहीं है। धरने के बाद शिक्षकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से संसद के माध्यम से कानून पारित कर पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट प्रदान करने की मांग की। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


