सीतापुर में वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य किए जाने के विरोध में गुरुवार को जिले भर के शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। टीईटी की अनिवार्यता को अन्यायपूर्ण बताया। शिक्षकों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना दिया और सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की। जिलाधिकारी के माध्यम से पीएम मोदी ज्ञापन प्रेषित कर अध्यादेश लाकर छूट देने की मांग की। जिलाध्यक्ष रविंद्र कुमार दीक्षित का कहना है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 को 27 जुलाई 2011 से लागू किया गया था। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, लागू होने की तिथि से अथवा उसके बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया, जबकि उससे पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को इस शर्त से मुक्त रखा गया था। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों ने इसी नियम के तहत नियुक्ति और पदोन्नति प्राप्त की। शिक्षकों का कहना है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 सितंबर 2025 को दिए गए निर्णय के बाद देश के सभी राज्यों में टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षकों का आरोप है कि यह फैसला उनके साथ सरासर अन्याय है और उनके भविष्य को असुरक्षित करता है। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने बताया कि इसी निर्णय के विरोध में देशभर में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले आंदोलन चल रहा है। संगठन की मांग है कि भारत सरकार अध्यादेश लाकर टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट प्रदान करे। धरने के दौरान शिक्षकों ने सरकार से अपील की कि वे मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संसद के माध्यम से कानून पारित कर वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करें। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस दौरान कलेक्ट्रेट में नायाब तहसीलदार महेंद्र तिवारी ने ज्ञापन लिया।


