मुंगेर जिले में भूकंप आपदा से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए गुरुवार को एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के निर्देश पर बिहार के 18 जिलों में एक साथ संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य राहत, बचाव, स्वास्थ्य, पुलिस और यातायात प्रबंधन की समन्वित कार्यप्रणाली की समीक्षा करना था। मॉक ड्रिल की शुरुआत समाहरणालय भवन से जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पीणीकर और पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने संयुक्त रूप से की। सुबह आठ बजे एक काल्पनिक सूचना मिली कि शहर के छह स्थानों पर भूकंप से भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं और लगभग 50 लोग घायल हुए हैं। सूचना मिलते ही पोलो मैदान स्थित स्टेजिंग एरिया से अग्निशमन दल, आपदा मित्र और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को तुरंत घटनास्थलों पर भेजा गया। एंबुलेंस सेवाओं की तत्परता का परीक्षण इन टीमों ने क्षतिग्रस्त भवनों से घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार प्रदान करने और उन्हें मॉडल अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन किया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम, दवाओं की उपलब्धता, आपातकालीन कक्ष की तैयारी और एंबुलेंस सेवाओं की तत्परता का भी परीक्षण किया गया। अभ्यास के लिए समाहरणालय भवन, वैजनाथ बालिका प्लस टू उच्च विद्यालय, भारत पेट्रोल पंप, सदर अस्पताल मुंगेर और बेलन बाजार क्वार्टर सहित कई स्थानों को चिन्हित किया गया था, जहाँ बचाव कार्य प्रदर्शित किए गए। इंडोर स्टेडियम में एक राहत केंद्र और पोलो मैदान में एक स्टेजिंग एरिया स्थापित किया गया था, जहाँ से समन्वय और संसाधनों का संचालन किया गया। यातायात व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में यातायात व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ट्रैफिक डीएसपी के नेतृत्व में शहर के दस प्रमुख स्थानों पर विशेष यातायात प्रबंधन किया गया, ताकि घायलों को अस्पताल पहुंचाने में कोई बाधा न आए। मॉक ड्रिल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीआरपीएफ कमांडेंट रमेश कुमार ने बताया कि अभ्यास का उद्देश्य जिला प्रशासन, पुलिस बल एवं आमजन की तैयारियों का वास्तविक आकलन करना है। अभ्यास के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी मोबाइल के माध्यम से जिलाधिकारी से लाइव जुड़े रहे और अस्पतालों सहित संपूर्ण तैयारियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जनता को जागरूक करना तथा आपदा की स्थिति में त्वरित, संगठित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि संभावित जनहानि को न्यूनतम किया जा सके। यह मॉक ड्रिल जिला प्रशासन की सजगता और समर्पित तैयारी का सशक्त उदाहरण रही। मुंगेर जिले में भूकंप आपदा से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए गुरुवार को एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के निर्देश पर बिहार के 18 जिलों में एक साथ संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य राहत, बचाव, स्वास्थ्य, पुलिस और यातायात प्रबंधन की समन्वित कार्यप्रणाली की समीक्षा करना था। मॉक ड्रिल की शुरुआत समाहरणालय भवन से जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पीणीकर और पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने संयुक्त रूप से की। सुबह आठ बजे एक काल्पनिक सूचना मिली कि शहर के छह स्थानों पर भूकंप से भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं और लगभग 50 लोग घायल हुए हैं। सूचना मिलते ही पोलो मैदान स्थित स्टेजिंग एरिया से अग्निशमन दल, आपदा मित्र और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को तुरंत घटनास्थलों पर भेजा गया। एंबुलेंस सेवाओं की तत्परता का परीक्षण इन टीमों ने क्षतिग्रस्त भवनों से घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार प्रदान करने और उन्हें मॉडल अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन किया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम, दवाओं की उपलब्धता, आपातकालीन कक्ष की तैयारी और एंबुलेंस सेवाओं की तत्परता का भी परीक्षण किया गया। अभ्यास के लिए समाहरणालय भवन, वैजनाथ बालिका प्लस टू उच्च विद्यालय, भारत पेट्रोल पंप, सदर अस्पताल मुंगेर और बेलन बाजार क्वार्टर सहित कई स्थानों को चिन्हित किया गया था, जहाँ बचाव कार्य प्रदर्शित किए गए। इंडोर स्टेडियम में एक राहत केंद्र और पोलो मैदान में एक स्टेजिंग एरिया स्थापित किया गया था, जहाँ से समन्वय और संसाधनों का संचालन किया गया। यातायात व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में यातायात व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ट्रैफिक डीएसपी के नेतृत्व में शहर के दस प्रमुख स्थानों पर विशेष यातायात प्रबंधन किया गया, ताकि घायलों को अस्पताल पहुंचाने में कोई बाधा न आए। मॉक ड्रिल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीआरपीएफ कमांडेंट रमेश कुमार ने बताया कि अभ्यास का उद्देश्य जिला प्रशासन, पुलिस बल एवं आमजन की तैयारियों का वास्तविक आकलन करना है। अभ्यास के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी मोबाइल के माध्यम से जिलाधिकारी से लाइव जुड़े रहे और अस्पतालों सहित संपूर्ण तैयारियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जनता को जागरूक करना तथा आपदा की स्थिति में त्वरित, संगठित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि संभावित जनहानि को न्यूनतम किया जा सके। यह मॉक ड्रिल जिला प्रशासन की सजगता और समर्पित तैयारी का सशक्त उदाहरण रही।


