Memory Doctor Mohit Gupta: किसी किताब का पूरा पन्ना, अंकों की लंबी श्रृंखला या वर्षों पुराना कैलेंडर। अगर कोई व्यक्ति केवल एक बार देखकर या सुनकर उसे शब्दशः दोहरा दे तो हैरानी होना स्वाभाविक है।
राजस्थान के बारां जिले से ताल्लुक रखने वाले मोहित गुप्ता, जिन्हें सोशल मीडिया पर मैमोरी डॉक्टर के नाम से जाना जाता है अपनी असाधारण मेमोरी क्षमता के कारण आज देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
फोटोग्राफिक और ऑडिटरी मेमोरी का कमाल
मोहित की सबसे बड़ी विशेषता उनकी फोटोग्राफिक और ऑडिटरी मेमोरी है। वे किसी भी जानकारी को केवल एक बार पढ़कर या सुनकर सही क्रम में हुबहू दोहरा सकते हैं। चाहे सैकड़ों अंकों की श्रृंखला हो, तारीखों का जटिल संयोजन हो या नंबरों के घन (क्यूब्स)। उनकी सटीकता और गति देखकर लोग अक्सर यही सवाल करते हैं कि यह मानवीय मस्तिष्क है या कोई सुपर कंप्यूटर।
लॉकडाउन की खामोशी से शुरू हुआ सफर
मोहित बताते हैं कि कोविड लॉकडाउन के दौरान उन्होंने समय का सदुपयोग करते हुए मेमोरी मैपिंग, पैटर्न रिकग्निशन, माइंड पैलेस और अन्य एडवांस मेमोरी तकनीकों का गहन अभ्यास शुरू किया। रोजाना कई घंटे के अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास ने धीरे-धीरे उनकी क्षमता को उस स्तर तक पहुंचा दिया जहां वे एक बार पढ़ी या सुनी गई जानकारी को तुरंत दोहरा सकते हैं।
10 हजार साल का कैलेंडर, नंबरों का अद्भुत खेल
अपनी मेमोरी क्षमता के प्रदर्शन में मोहित ने 10,000 वर्षों के कैलेंडर की तिथियां याद कर प्रस्तुत की। 1 से 100 तक के अंकों के क्यूब्स बेहद कम समय में स्मरण किए। सैकड़ों अंकों को सुनकर सीधे और उल्टे क्रम में दोहराया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी तकनीकी सहायता के इतनी अधिक जानकारी को एक ही बार में याद रखना अत्यंत दुर्लभ क्षमता है, जिसके लिए उच्च स्तर की एकाग्रता, विजुअलाइजेशन और वैज्ञानिक मेमोरी तकनीकों की आवश्यकता होती है।
रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज हुआ नाम
इन असाधारण उपलब्धियों के चलते मोहित का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया जा चुका है। बारां जैसे छोटे जिले से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान बनाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इसके बाद मिली डिजिटल पहचान
आज मोहित सोशल मीडिया पर छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और आम लोगों को मैमोरी की तकनीकें सिखा रहे हैं। उनके बताए अभ्यासों से कई लोग अपनी याददाश्त, फोकस और सीखने की गति में स्पष्ट सुधार महसूस कर रहे हैं।
पॉडकास्ट से दिया संदेश
हाल ही में मोहित मंथनहब पॉडकास्ट में भी शामिल हुए, जहां उन्होंने कहा कि मैमोरी कोई जन्मजात चमत्कार नहीं है। सही तकनीक, नियमित अभ्यास और धैर्य से कोई भी व्यक्ति अपनी याददाश्त को कई गुना बेहतर बना सकता है।
बारां के युवाओं के लिए प्रेरणा
बारां जिले से निकलकर विश्व स्तर पर पहचान बनाना मोहित गुप्ता की मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास का परिणाम है। उनकी कहानी यह भी बताती है कि बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं, बशर्ते लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर।


