सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की एनसीआरटी किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ नामक चैप्टर शामिल किए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग के सचिव और एनसीआरटी के डायरेक्टर डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि इस विवादित कंटेंट को तैयार करने वालों के खिलाफ अवमानना या अन्य कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। बीजेपी सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि कोर्ट इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।
कक्षा 8 की किताब पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, अवमानना की चेतावनी
भले ही एनसीआरटी ने इस चैप्टर के लिए माफी मांग ली है, लेकिन चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कक्षा 8 की उस किताब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। बेंच ने साफ चेतावनी दी है कि इस आदेश को नजरअंदाज करने या किसी भी तरह से बाईपास करने की कोशिश को न्याय के काम में सीधा दखल और कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।
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विवादित चैप्टर पास करने वाली कमेटी तलब
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआरटी को आदेश दिया है कि वह उस ‘टीचिंग-लर्निंग मटीरियल्स कमेटी’ की पूरी जानकारी रिकॉर्ड पर रखे जिसने इस चैप्टर को मंजूरी दी थी। कोर्ट ने चैप्टर बनाने वाली टीम के सभी सदस्यों के नाम, उनकी पढ़ाई-लिखाई और उनके अनुभव का पूरा ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया है, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।
सीजेआई की सख्त टिप्पणी, न्यायपालिका आज खून से लथपथ है
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर सुनियोजित हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘आज ज्यूडिशियरी खून से लथपथ है और कोई भी कुछ भी कह सकता है।’ सीजेआई के मुताबिक, इंटरनेट और दुकानों पर ऐसा मटीरियल उपलब्ध कराना एक सोची-समझी साजिश है, ताकि पूरी शिक्षा व्यवस्था के जरिए समाज में गलत संदेश जाए। उन्होंने इसे भारतीय न्यायपालिका की छवि खराब करने की एक गहरी और सुनियोजित साजिश करार दिया।
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सॉलिसिटर जनरल और बार काउंसिल ने की सख्त कार्रवाई की मांग
बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल इस कदम से बेहद गुस्से में है। कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल भी मौजूद थे और उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले के दोषियों का पता लगाकर उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि बाजार में मौजूद ऐसी सभी किताबों को तुरंत वापस लिया जाए। बार काउंसिल के नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख का समर्थन किया है और इसे संस्थान की गरिमा बचाने के लिए जरूरी बताया है।


