Parvo virus symptoms : पिल्लों की जान ले रहा ‘पार्वो वायरस’, डॉग में दिखे ये लक्षण तो हो जाएं सावधान, डॉक्टर ने बताया

Parvo virus symptoms : पिल्लों की जान ले रहा ‘पार्वो वायरस’, डॉग में दिखे ये लक्षण तो हो जाएं सावधान, डॉक्टर ने बताया

Parvo Virus in Puppies, Symptoms and Treatment: अगर आपका पेट जल्द ही पैरेंट्स बना है या आप अपने घर में एक प्यारा सा पप्पी लाए हैं, तो हमारी आज की यह स्टोरी आपके लिए है। आज के इस स्टोरी में हम छोटे पिल्लों यानी पप्पी में होने वाले पार्वो वायरस (Parvo Virus) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी शेयर करने जा रहे हैं। इन जानकारियों को ध्यान में रखकर आप अपने पालतू की सुरक्षा कर सकते हैं। आइए जानते हैं डॉ. अनिरुद्ध मित्तल से इसके बारे में विस्तार से कि यह वायरस कैसे फैलता है, इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए और क्या यह वायरस जानलेवा हो सकता है। इसके अलावा, हम आपको कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें भी बताएंगे, जो हर पेट पेरेंट्स को अपने पप्पी की अच्छी सेहत के लिए जाननी चाहिए।

पार्वो वायरस क्या है? (What is Parvo Virus in Puppies)

पार्वो वायरस कुत्तों में होने वाली एक खतरनाक और तेजी से फैलने वाली बीमारी है। यह ज्यादातर छोटे पिल्लों को प्रभावित करती है और उनके पेट और दिल पर बुरा असर डाल सकती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए इसके लक्षणों को शुरुआत में पहचान लेना बहुत जरूरी होता है, ताकि पिल्ले की जान बचाई जा सके।

पार्वो वायरस किस उम्र में ज्यादा होता है? (Parvo Virus Risk Age in Puppies)

आमतौर पर 6 हफ्ते से 6 महीने तक के पिल्लों में पार्वो होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसका मतलब यह नहीं कि बड़े पिल्ले बिल्कुल सुरक्षित हैं, लेकिन छोटे पिल्लों की इम्युनिटी कमजोर होती है, इसलिए उनमें जोखिम ज्यादा होता है। इस उम्र में पिल्लों की खास देखभाल करना बहुत जरूरी है।

किन नस्लों में पार्वो का खतरा ज्यादा रहता है? (Breeds Most Susceptible to Parvo Virus)

कुछ नस्लों के पिल्लों में पार्वो जल्दी हो सकता है। जैसे रॉटवीलर, जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और अमेरिकन पिटबुल। अगर आपके पास इन नस्लों का पिल्ला है, तो उसकी साफ-सफाई, खान-पान और समय पर वैक्सीन लगवाने का ध्यान रखें।

पार्वो वायरस कैसे फैलता है? (How Parvo Virus Spreads in Dogs)

यह वायरस एक कुत्ते से दूसरे कुत्ते में बहुत आसानी से फैल जाता है। संक्रमित कुत्ते के मल, उल्टी या गंदगी के संपर्क में आने से स्वस्थ पिल्ला भी संक्रमित हो सकता है। अगर घर में एक पिल्ले को पार्वो हो जाए और सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो दूसरे पालतू जानवरों में भी यह फैल सकता है।

पिल्लों में पार्वो के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Parvo Virus in Puppies)

अगर पिल्ले को अचानक तेज बुखार हो जाए, वह खाना छोड़ दे, बार-बार उल्टी करे या उसे दस्त लग जाएं, तो सावधान हो जाएं। कई बार उल्टी और दस्त में खून भी दिखाई दे सकता है। पिल्ला बहुत कमजोर और सुस्त भी लग सकता है। कुछ मामलों में यह वायरस दिल को भी प्रभावित करता है, जिसमें बिना ज्यादा लक्षण दिखे अचानक गंभीर समस्या हो सकती है।

पार्वो वायरस का इलाज कैसे होता है? (Treatment of Parvo Virus in Puppies)

पार्वो का कोई सीधा इलाज नहीं है जो वायरस को तुरंत खत्म कर दे। डॉक्टर पिल्ले को ऐसी दवाइयां और इलाज देते हैं जिससे उसका शरीर मजबूत रहे और वह खुद वायरस से लड़ सके। इसमें ड्रिप (फ्लूइड थेरेपी), उल्टी रोकने की दवा, एंटीबायोटिक और जरूरी सपोर्टिव दवाइयां दी जाती हैं। कुछ मामलों में एंटी-पर्वो सीरम भी दिया जाता है।

पार्वो से बचाव कैसे करें? (Precautions to Prevent Parvo Virus)

पार्वो से बचने का सबसे अच्छा तरीका है समय पर वैक्सीनेशन। पिल्ले की कोई भी वैक्सीन मिस न करें। हमेशा अच्छे और रजिस्टर्ड पशु डॉक्टर से ही टीका लगवाएं। जब तक पिल्ले की सभी वैक्सीन पूरी न हो जाएं, उसे बाहर पार्क या सड़क पर न घुमाएं। अगर पहले आपका कोई पालतू पार्वो से मर चुका है, तो नया पिल्ला लाने से पहले कुछ महीने का गैप जरूर रखें।

पार्वो में जल्दी इलाज क्यों जरूरी है? (Importance of Parvo Virus Prevention and Treatment)

पार्वो एक खतरनाक बीमारी है, लेकिन अगर समय पर पहचान ली जाए और तुरंत डॉक्टर को दिखाया जाए तो पिल्ले को बचाया जा सकता है। इसलिए थोड़ी भी शंका हो तो देर न करें। जल्दी इलाज ही पिल्ले की जान बचा सकता है।

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