रतलाम में कंपनी की स्कीम बताकर रुपए ऐंठे:महिला संचालिका ने रुपए लेकर खुद का मकान बना लिया; कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

रतलाम में कंपनी की स्कीम बताकर रुपए ऐंठे:महिला संचालिका ने रुपए लेकर खुद का मकान बना लिया; कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

कंपनी के नाम पर चैन सिस्टम चलाकर रुपए ऐंठने के मामले में कोर्ट ने स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी जयपुर की फ्रेंचाइजी शाखा रतलाम की संचालिका को कोर्ट ने दोषी माना है। कोर्ट ने अनीता (49) पति संजय दग्दी निवासी मालीकुआं रतलाम को 7 साल की सजा व 56 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है। फैसला न्यायालय सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने सुनाया है। अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि वसीम पिता उमर खान द्वारा 5 मार्च 2013 को थाना माणक चौक पर एक लिखित शिकायत की थी। जिसमें अनिता दग्दी को स्टेवेल इन्फोटेक जयपुर कंपनी के फ्रेंचाइजर के रूप में उपभोक्ताओं से कंपनी के लिए रूपए प्राप्त करने हेतु नियुक्त करने की बात बताई। रतलाम स्थित कंपनी की समस्त गतिविधियां अनिता दग्दी द्वारा संचालित करते हुए कंपनी की स्कीम बताकर रुपए ऐंठे गए। अनिता दग्दी द्वारा कंपनी की लोभ लुभावन स्कीम जनता को बताकर 25 से 50 हजार रूपए की वसूली की शिकायत की। जनता को गुमराह कर और लालच देकर नये सदस्यों की भर्ती कर चैनल चलाने का कार्य रतलाम में करने की बात बताई। रुपए लेकर कुछ दिनों से अनिता दग्दी गायब हो गई। पुलिस ने जांच के बाद धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की थी। रुपए लेकर मकान बना लिए पुलिस जांच के अनुसार कंपनी के नाम पर जनता से रुपए लेकर अनिता दग्दी द्वारा कंपनी में रुपए जमा न करते हुए उन पैसों से कल्याण नगर कॉलोनी रतलाम में 2 से 3 मकान खरीद लिए है। जनता द्वारा पैसे मांगने पर उनके साथ गाली-गलौच की गई। जांच में यह पाया कि स्टे वेल कंपनी जयपुर की फ्रेंचाइजी अधिकृत शाखा रतलाम की संचालक अनिता दग्दी थी, इस फ्रेंचाइजी का नाम मां कृपा इन्फोटेक हरमाला रोड लोकेंद्रनाथ मार्ग के पास में था। विज्ञापन देकर लुभाया अभियुक्त अनिता ने विज्ञापन में बताया कि स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी जयपुर में यदि 25 हजार रूपये जमा करते हैं तो इसके बदले 9,600 रूपए प्रतिमाह 12 माह तक नेट पर थोड़ा बहुत काम करने के बाद 9,600 रुपए कंपनी द्वारा दिया जाएगा। इस आधार पर फरियादी ने 9 लाख रुपए जमा कर स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी का सदस्य बना। इसके बाद फरियादी के भाई आशिफ ने भी स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी में नेटवर्किंग हेतु 50 हजार रुपए अनिता को नगद दिए थे। ताकि वह संबंधित कंपनी की ब्रांच खोल सके। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फरियादी वसीम द्वारा 09 लाख रूपए व उसके भाई आसिफ द्वारा 1 लाख रुपए जमा करने के बाद भी अनिता दग्दी, शाखा रतलाम की संचालिका, व स्टे वेल इन्फोटेक कंपनी के प्रबंधकगण शक्ति सिंह शेखावत, अजीत सिंह, अश्विन पारिख द्वारा रुपए जमा जमा करने के बावजूद विज्ञापन में दिए गए स्कीम अनुसार उन्हें लाभ नहीं देकर धोखाधड़ी की। गिरफ्ताकर भेजा जेल शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया जांच के दौरा दस्तावेज, चैक, खाता खोलने के दस्तावेज आदि जप्त कर अभियुक्तगण को गिरफ्तार कर साक्षियों के बयान लिए। अनिता के हस्तलेख की जांच विज्ञान प्रयोगशाला से कराई गई। जांच के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। विचारण के बाद न्यायालय ने अभियुक्त अनीता दग्दी को दोषी माना। अभियुक्त शक्तिसिंह को दोषमुक्त कर दिया। अनीता जमानत पर थी। बुधवार शाम कोर्ट का फैसला आते ही उसे अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया।

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