Lucknow Municipal Corporation: राजधानी लखनऊ नगर निगम में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जिलाधिकारी विशाख जी द्वारा नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए नगर आयुक्त को पत्र भेजे जाने के बाद निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया। जांच में सामने आया कि नागरिकों की 300 से अधिक शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर दिया गया था। इसके बाद नगर निगम के 23 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए दो दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। दोष सिद्ध होने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
डीएम के पत्र से खुला बड़ा मामला
सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी विशाख जी को जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन और स्थानीय निरीक्षणों के दौरान लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नगर निगम द्वारा समस्याओं का समाधान कागजों में दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं। इसी आधार पर डीएम ने नगर आयुक्त को विस्तृत पत्र भेजकर शिकायतों की जांच कराने और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे नगर निगम तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया।
बिना काम किए सड़क मरम्मत की रिपोर्ट
जांच में पाया गया कि कई क्षेत्रों में सड़क मरम्मत, गड्ढा भराई और निर्माण कार्यों की रिपोर्ट सिस्टम में अपलोड कर दी गई थी, जबकि मौके पर कोई कार्य नहीं हुआ था। नागरिकों ने बताया कि शिकायत बंद दिख रही थी, लेकिन सड़कें पहले जैसी खराब बनी रहीं। यह मामला सामने आने के बाद अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सीवर लीकेज शिकायतें सिर्फ कागजों में निपटाईं
नगर निगम के सीवर और जल निकासी से जुड़े मामलों में भी बड़ी अनियमितता उजागर हुई है। दर्जनों इलाकों में सीवर लीकेज और जलभराव की शिकायतों को सिस्टम में “समाधान” दिखाकर बंद कर दिया गया, जबकि स्थानीय लोगों को समस्या से राहत नहीं मिली। इससे साफ संकेत मिला कि शिकायतों का वास्तविक समाधान किए बिना केवल पोर्टल अपडेट कर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की गई।

हाउस टैक्स और म्यूटेशन मामलों में भी गड़बड़ी
जांच का दायरा बढ़ने पर हाउस टैक्स और संपत्ति म्यूटेशन से जुड़े मामलों में भी अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि कई मामलों में फाइलें लंबित रहने के बावजूद निस्तारण दिखाया गया, जबकि नागरिक महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे। राजस्व से जुड़े मामलों में ऐसी लापरवाही को प्रशासन ने बेहद गंभीर माना है।
23 अधिकारी जांच के घेरे में
कार्रवाई के दायरे में नगर निगम के विभिन्न स्तरों के अधिकारी शामिल हैं, जिनमें जोनल अधिकारी,अधिशासी अभियंता (XEN),सहायक अभियंता,चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी,संबंधित शाखाओं के कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। नगर आयुक्त ने सभी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
मुख्य सचिव और शासन स्तर की सख्ती
सूत्रों के अनुसार हाल ही में शासन स्तर पर शहरी सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी, जिसमें शिकायतों के फर्जी निस्तारण पर सख्त नाराजगी जताई गई थी। मुख्य सचिव स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी सख्ती के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज हुई।
नगर आयुक्त का सख्त रुख
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने स्पष्ट किया है कि नागरिक सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि शिकायतों का वास्तविक समाधान अनिवार्य है। फर्जी रिपोर्टिंग पर सख्त कार्रवाई होगी। जवाबदेही तय कर दोषियों को दंडित किया जाएगा,उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि भविष्य में सभी शिकायतों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
दो दिन में मांगा गया जवाब
सभी 23 अधिकारियों से दो दिन के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर निलंबन, विभागीय जांच और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि पूरी रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही शासन को भेजी जाएगी।
जनता में बढ़ी उम्मीद
नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद आम नागरिकों में उम्मीद जगी है कि अब शिकायतों का वास्तविक समाधान होगा। लंबे समय से लोग सीएम हेल्पलाइन और नगर निगम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के बावजूद समस्या के बने रहने से नाराज थे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस प्रकार की सख्ती लगातार जारी रही तो शहर की सफाई, सड़क, जल निकासी और कर सेवाओं में सुधार संभव है।
डिजिटल सिस्टम पर भी उठे सवाल
इस मामले ने यह भी उजागर किया है कि डिजिटल शिकायत निस्तारण प्रणाली का गलत उपयोग किया जा रहा था। केवल ऑनलाइन स्टेटस अपडेट कर शिकायत बंद करने की प्रवृत्ति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है। अब प्रशासन तकनीकी निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन दोनों को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।
शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
जिलाधिकारी द्वारा उठाए गए इस मुद्दे को शासन स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद दोषी अधिकारियों की सूची और कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी। संभावना है कि आने वाले दिनों में नगर निगम में प्रशासनिक सुधारों की नई प्रक्रिया शुरू हो सकती है।


