समस्तीपुर में जहां लगजरी वाहन, हैलीकॉप्टर से लोग बारात जाते हैं, वहीं बुधवार को समस्तीपुर में एक ऐसी भी बारात निकली, जिसे देख कर लोगों को पुरानी भारतीय सभ्यता संस्कृति की याद ताजा हुई। बाराती बैलगाड़ी से जाती दिखी। बारातियों ने करीब 2 किलोमीटर का सफर बैलगाड़ी से तय किया। बारातियों को ढोने के लिए 32 बैलगाड़ियों को लगाया गया था। जिसे 64 बैल खींच रहे थे। यहां तक इस बाराती में बैंड की जगह पुराने जमाने में बजाए जाने वाले वाद्ध से शहनाई की धुन भी सुनाई पड़ी। बारातियों को बैल से जाता देख लोगों की भी जुट गई। जिससे समस्तीपुर-दरभंगा पथ पर जाम भी लग गया। बारातियों की व्यवस्था देख रहे दूल्हे के चाचा महेंद्र प्रधान ने बताया कि उन्हें पशुओं से प्रेम है। बाराती में अधिक वाहनों का उपयोग होता है। जिससे प्रदूषण भी होता है। प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से उन्होंने भतीजे की शादी की बारात बैलगाड़ी से ले जाने का फैसला लिया। इसके लिए जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से बैलगाड़ी को मंगवाया। बाराती को परेशानी नहीं हो इसके लिए बैलगाड़ी पर ही सौफे को भी रखा गया। दूल्हें को घोड़ी पर भेजा गया। होटल कारोबारी के बेटे की थी शादी बताया गया है कि शहर के मगरदही रोड के एक होटल कारोबारी के बेटी की शादी थी। बारात होटल से दरभंगा रोड में बाजार समिति के पास जाना था। जिसकी दूरी करीब 2 किलोमीटर है। कारोबारी के चाचा महेंद्र प्रधान पशु प्रेमी के नाम से जाने जाते हैं। वह हाथी के साथ ही विभिन्न प्रकार के पशुओं के शौकीन हैं। उनके गजराज पैलेस में हाथी के साथ ही सारस, बंदर, हिरण, खरगोश, कई प्रकारों के चूहे उपलब्ध हैं। जिसे देखने के लिए बच्चे पहुंचते रहे हैं। बाराती के कारण लोगों को हुई परेशानी इस अनुठी बारात के कारण इस रोड से चलने वाले लोगों को परेशानी का भी सामाना करना पड़ा। एक साथ 32 बैलगाड़ी के सड़क पर रहने के कारण मगरदही पुल से लेकर गणेश चौक पर वाहनों का आवागमन ठप पर गया। जिससे इस रास्ते जा रहे लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा। समस्तीपुर में जहां लगजरी वाहन, हैलीकॉप्टर से लोग बारात जाते हैं, वहीं बुधवार को समस्तीपुर में एक ऐसी भी बारात निकली, जिसे देख कर लोगों को पुरानी भारतीय सभ्यता संस्कृति की याद ताजा हुई। बाराती बैलगाड़ी से जाती दिखी। बारातियों ने करीब 2 किलोमीटर का सफर बैलगाड़ी से तय किया। बारातियों को ढोने के लिए 32 बैलगाड़ियों को लगाया गया था। जिसे 64 बैल खींच रहे थे। यहां तक इस बाराती में बैंड की जगह पुराने जमाने में बजाए जाने वाले वाद्ध से शहनाई की धुन भी सुनाई पड़ी। बारातियों को बैल से जाता देख लोगों की भी जुट गई। जिससे समस्तीपुर-दरभंगा पथ पर जाम भी लग गया। बारातियों की व्यवस्था देख रहे दूल्हे के चाचा महेंद्र प्रधान ने बताया कि उन्हें पशुओं से प्रेम है। बाराती में अधिक वाहनों का उपयोग होता है। जिससे प्रदूषण भी होता है। प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से उन्होंने भतीजे की शादी की बारात बैलगाड़ी से ले जाने का फैसला लिया। इसके लिए जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से बैलगाड़ी को मंगवाया। बाराती को परेशानी नहीं हो इसके लिए बैलगाड़ी पर ही सौफे को भी रखा गया। दूल्हें को घोड़ी पर भेजा गया। होटल कारोबारी के बेटे की थी शादी बताया गया है कि शहर के मगरदही रोड के एक होटल कारोबारी के बेटी की शादी थी। बारात होटल से दरभंगा रोड में बाजार समिति के पास जाना था। जिसकी दूरी करीब 2 किलोमीटर है। कारोबारी के चाचा महेंद्र प्रधान पशु प्रेमी के नाम से जाने जाते हैं। वह हाथी के साथ ही विभिन्न प्रकार के पशुओं के शौकीन हैं। उनके गजराज पैलेस में हाथी के साथ ही सारस, बंदर, हिरण, खरगोश, कई प्रकारों के चूहे उपलब्ध हैं। जिसे देखने के लिए बच्चे पहुंचते रहे हैं। बाराती के कारण लोगों को हुई परेशानी इस अनुठी बारात के कारण इस रोड से चलने वाले लोगों को परेशानी का भी सामाना करना पड़ा। एक साथ 32 बैलगाड़ी के सड़क पर रहने के कारण मगरदही पुल से लेकर गणेश चौक पर वाहनों का आवागमन ठप पर गया। जिससे इस रास्ते जा रहे लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा।


