एसआईआर पर अल्पसंख्यकों को​ निशाना बनाया गया तो बड़ा आंदोलन होगा : सुप्रियो

एसआईआर पर अल्पसंख्यकों को​ निशाना बनाया गया तो बड़ा आंदोलन होगा : सुप्रियो

बंगाल में एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद झामुमो के महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्‌टाचार्य ने चुनाव आयोग पर तंज कसा है। कहा, वह भाजपा का टूल बनकर काम करना बंद करे। अप्रैल में झारखंड में भी एसआईआर होना है। अगर भाषा एवं पहनावे को देखते हुए अल्पसंख्यकों को को निशाना बनाया गया तो बड़ा िवरोध होगा। इसके लिए चुनाव आयोग को तैयार रहना चाहिए। बहुत कम मौकों पर सुप्रीम कोर्ट आर्टिकल-142 का इस्तेमाल करती है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसी पावर का इस्तेमाल करते हुए बंगाल में एसआईआर मामले में नया एवं ऐतिहासिक निर्देश दिया। इसलिए यह इलेक्शन कमीशन के साथ-साथ केंद्र में सत्तासीन भाजपा के लिए भी बड़ा सबक है। सुप्रियो ने कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि अपने राज्य के नागरिकों की रक्षा के लिए एक वर्तमान सीएम ममता बनर्जी ने खुद केस की पैरवी की। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया। इसका मतलब साफ है कि इलेक्शन कमीशन के ऑब्जर्वर और उसके अफसर किस तरह से काम कर रहे थे। झामुमो महासचिव सुप्रियो ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मामले में भी ईडी को आईना दिखाया है। ईडी को बता दिया कि 2022-23 से एक काम करने वाले सीएम को समन, हाजिरी के नाम पर परेशान किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसी को निशाना न बनाएं, अपना मूल कार्य करे। इसके बाद ईडी और केंद्र सरकार द्वारा एजेंसियों के इस्तेमाल पर फिर से एक सवाल खड़ा हो गया है। उम्मीद है कि अब केंद्रीय एजेंसियां अपना मूल कार्य पूरी इमानदारी से करेंगी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झामुमो नेता सुप्रियो के बयान पर पलटवार किया है। शाहदेव ने कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में लिया गया। वहां मतदाता सूची में लगभग 80 लाख विसंगतियां पाई गई थीं।वहीं, दूसरे मुद्दे पर प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत को ऐतिहासिक राहत मिलने का जेएमएम का दावा पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री को केवल समन की अवहेलना (नॉन-कम्प्लायंस) से जुड़े तकनीकी पहलू पर राहत मिली है। जबकि कथित भूमि घोटाले से संबंधित मूल आपराधिक मामला आज भी यथावत चल रहा है। बंगाल में एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद झामुमो के महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्‌टाचार्य ने चुनाव आयोग पर तंज कसा है। कहा, वह भाजपा का टूल बनकर काम करना बंद करे। अप्रैल में झारखंड में भी एसआईआर होना है। अगर भाषा एवं पहनावे को देखते हुए अल्पसंख्यकों को को निशाना बनाया गया तो बड़ा िवरोध होगा। इसके लिए चुनाव आयोग को तैयार रहना चाहिए। बहुत कम मौकों पर सुप्रीम कोर्ट आर्टिकल-142 का इस्तेमाल करती है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसी पावर का इस्तेमाल करते हुए बंगाल में एसआईआर मामले में नया एवं ऐतिहासिक निर्देश दिया। इसलिए यह इलेक्शन कमीशन के साथ-साथ केंद्र में सत्तासीन भाजपा के लिए भी बड़ा सबक है। सुप्रियो ने कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि अपने राज्य के नागरिकों की रक्षा के लिए एक वर्तमान सीएम ममता बनर्जी ने खुद केस की पैरवी की। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया। इसका मतलब साफ है कि इलेक्शन कमीशन के ऑब्जर्वर और उसके अफसर किस तरह से काम कर रहे थे। झामुमो महासचिव सुप्रियो ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मामले में भी ईडी को आईना दिखाया है। ईडी को बता दिया कि 2022-23 से एक काम करने वाले सीएम को समन, हाजिरी के नाम पर परेशान किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसी को निशाना न बनाएं, अपना मूल कार्य करे। इसके बाद ईडी और केंद्र सरकार द्वारा एजेंसियों के इस्तेमाल पर फिर से एक सवाल खड़ा हो गया है। उम्मीद है कि अब केंद्रीय एजेंसियां अपना मूल कार्य पूरी इमानदारी से करेंगी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झामुमो नेता सुप्रियो के बयान पर पलटवार किया है। शाहदेव ने कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में लिया गया। वहां मतदाता सूची में लगभग 80 लाख विसंगतियां पाई गई थीं।वहीं, दूसरे मुद्दे पर प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत को ऐतिहासिक राहत मिलने का जेएमएम का दावा पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री को केवल समन की अवहेलना (नॉन-कम्प्लायंस) से जुड़े तकनीकी पहलू पर राहत मिली है। जबकि कथित भूमि घोटाले से संबंधित मूल आपराधिक मामला आज भी यथावत चल रहा है।  

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