बिहार में सड़क-पुल पर खर्च बंद, क्यों आई ऐसी नौबत:1 करोड़ से ज्यादा निकालने पर रोक, क्या जीविका दीदी–फ्री बिजली से बढ़ा लोड

बिहार में सड़क-पुल पर खर्च बंद, क्यों आई ऐसी नौबत:1 करोड़ से ज्यादा निकालने पर रोक, क्या जीविका दीदी–फ्री बिजली से बढ़ा लोड

सरकारी खजाने से 1 करोड़ रुपए या ज्यादा चाहिए तो पहले वित्त विभाग से मंजूरी लेनी होगी। सड़क, पुल-पुलिया बनाने के लिए पैसे चाहिए या मरम्मत करानी है तो एक महीना इंतजार करना होगा। वजह है बिहार सरकार के खजाने की खराब हालत। बिहार सरकार पैसे की कमी का सामना कर रही है। सड़क-पुल पर खर्च बंद कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026-2027 शुरू होने में अभी 34 दिन बाकी हैं। हालत यह है कि सरकार के पास सड़क और भवन बनाने तथा पुल-पुलिया के मरम्मत के लिए पैसे नहीं हैं। बिहार सरकार की आर्थिक स्थिति ऐसी क्यों बनी? किन खर्चों के चलते पैसे की तंगी हुई है? पैसे बचाने के लिए क्या किया जा रहा है? पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट…।
कैसे सामने आई सरकार की खराब माली हालत, 2 आदेश आदेश 1- बिहार सरकार ने कैश बैलेंस सुधारने को लेकर सभी बोर्ड, निगम, सोसाइटी और आयोग को पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि पीएल (पर्सनल लेजर) खाते से अपने पैसे निकालें। आदेश 2- वित्त अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने सभी ट्रेजरी को कहा कि खजाने से 1 करोड़ रुपए से अधिक निकालने के लिए पहले वित्त विभाग से मंजूरी लेना है। ये आदेश सभी जिलों को जारी किया गया। क्यों सरकार को जारी करने पड़े ये आदेश? वित्त वर्ष 2025-26 में बिहार सरकार के पास योजना और गैर योजना मद में खर्च करने के लिए 3,16,895 करोड़ रुपए थे। अब समझिए क्या है पीएल खाता, क्यों देना पड़ा इससे पैसे निकालने का आदेश? PL खाता एक खास अकाउंट है जो बिहार सरकार की ट्रेजरी में खुलवाया जाता है। सरकार से अनुदान या अन्य रूप में पैसे लेने वाले निगम, बोर्ड, अथॉरिटी, एजेंसी, सोसाइटी समेत अन्य संस्थानों को यह खाता खुलवाना होता है। इस खाते में सरकार से मिले पैसे रखे जाते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 खत्म होने को है। ऐसे में सरकार ने कहा है कि सभी निगम, बोर्ड और एजेंसी अपने PL अकाउंट में रखे पैसे इस्तेमाल करें। ऐसा करने पर उन्हें सरकारी खजाने से पैसे नहीं देने होंगे। पहले से जारी फंड के काम होगा। इससे नॉन प्लानिंग हैंड में कैश बैलेंस सुधारने में मदद मिलेगी। क्यों 1 करोड़ रुपए से अधिक निकालने के लिए वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी हुई? सरकारी खजाने से 1 करोड़ रुपए से अधिक की राशि निकालने के लिए वित्त विभाग से मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया है। इससे खजाने से एक बार में ज्यादा पैसे निकालने पर एक्स्ट्रा फिल्टर लग गया है। खर्च पर सरकार के लिए लगाम लगाना आसान होगा। क्या है सरकारी खजाने में पैसे की कमी का असर, 4 पॉइंट में जानिए 1- सड़क, पुल बनाने पर खर्च रुका

सड़क, भवन, पुल-पुलिया की मरम्मत मद के खर्च को रोक दिया गया है। इसके लिए नए वित्तीय वर्ष 2026-27 का इंतजार करना होगा। यहीं नहीं, विभाग के मेंटेनेंस राशि को पीएल खाते में रखने से मना किया है। वित्त विभाग ने कहा है कि पीएल खाते की राशि बचती है तो इसे पार्क कर नहीं रखें। राशि को इसी वित्तीय वर्ष में अनिवार्य रूप से सरेंडर करें। इसका मतलब है कि सरकारी पैसे को अगले साल इस्तेमाल के लिए बचाकर नहीं रखना है। उसे बिहार सरकार को लौटा देना है। 2- ट्रेजरी से निकासी पर प्रतिबंध

वित्त विभाग ने ट्रेजरी से पैसे निकालने की खुली छूट पर पाबंदी लगा दी है। विभाग ने 6 फरवरी 2026 को पत्र जारी कर कहा कि 1 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी के लिए वित्त विभाग से पहले मंजूरी लेनी होगी। यह कदम 31 मार्च को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले खर्चों को कंट्रोल करने के लिए उठाया गया है। 3- बचाकर नहीं रख सकते केंद्र प्रायोजित योजना के पैसे

वित्त विभाग ने कहा है कि केंद्र प्रायोजित योजना के पैसे बचाकर नहीं रखना है। अगर किसी योजना के लिए केंद्र सरकार से पैसे मिले हैं तो उसे इसी वित्त वर्ष में खर्च करना है। पैसे खर्च नहीं हो पा रहे हैं तो उसे सरकार के पास सरेंडर करना होगा। बोर्ड, एजेंसी या निगम सरकार के खजाने से पैसे निकालकर अपने बैंक खाता में नहीं रख सकते। 4- 20 मार्च 2026 तक जमा करने होंगे सभी बिल

20 मार्च 2026 तक सभी तरह के बिल जमा करने होंगे। ट्रेजरी में जनवरी 2026 तक का बिल 28 फरवरी 2026, फरवरी 2026 तक का बिल 15 मार्च 2026 और केवल मार्च 2026 का बिल 20 मार्च 2026 तक जमा किया जाएगा। 20 मार्च 2026 के बाद किसी तरह का बिल जमा नहीं लिया जाएगा। अब जानिए क्यों बनी ऐसी स्थिति विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सरकार ने मुफ्त बिजली, पेंशन वृद्धि, महिलाओं को 10-10 हजार रुपए समेत कई लोक-लुभावन घोषणाएं की। बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियां दी गईं। इसके कारण खर्च बढ़े। जैसे- 1- महिलाओं को 10-10 हजार रुपए
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को 18,100 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इस योजना के तहत जीविका दीदियों को 2-2 लाख रुपए देने हैं। पहले फेज में 10-10 रुपए दिए गए हैं। दूसरे फेज में 20 हजार, तीसरे में 40 हजार, चौथे फेज में 80 हजार और पांचवें व आखिरी फेज में 60 हजार रुपए मिलेंगे। 2- वेतन-पेंशन पर खर्च पिछले कुछ वर्षों में बिहार में सरकारी पदों पर बड़े पैमाने पर भर्ती हुई है। इससे सरकारी कर्मियों की संख्या बढ़ी है और वेतन खर्च में इजाफा हुआ है। 3- कर्ज के ब्याज पर खर्च बिहार सरकार पर कर्ज 3.74 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। सरकार ने 22664.83 करोड़ रुपए कर्ज लौटाने और 25363.67 करोड़ रुपए ब्याज पर खर्च किए हैं। पिछले साल कर्ज 3,32,740 करोड़ रुपए था। सरकार ने 22819 करोड़ रुपए कर्ज लौटाने और 23013.94 करोड़ रुपए ब्याज देने पर खर्च किया। 4. मुफ्त बिजली बिहार सरकार प्रति परिवार 125 यूनिट बिजली मुफ्त देती है। इसके चलते 2025 में करीब 19 हजार 370 करोड़ रुपए अनुदान देना पड़ा। सरकारी खजाने से 1 करोड़ रुपए या ज्यादा चाहिए तो पहले वित्त विभाग से मंजूरी लेनी होगी। सड़क, पुल-पुलिया बनाने के लिए पैसे चाहिए या मरम्मत करानी है तो एक महीना इंतजार करना होगा। वजह है बिहार सरकार के खजाने की खराब हालत। बिहार सरकार पैसे की कमी का सामना कर रही है। सड़क-पुल पर खर्च बंद कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026-2027 शुरू होने में अभी 34 दिन बाकी हैं। हालत यह है कि सरकार के पास सड़क और भवन बनाने तथा पुल-पुलिया के मरम्मत के लिए पैसे नहीं हैं। बिहार सरकार की आर्थिक स्थिति ऐसी क्यों बनी? किन खर्चों के चलते पैसे की तंगी हुई है? पैसे बचाने के लिए क्या किया जा रहा है? पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट…।
कैसे सामने आई सरकार की खराब माली हालत, 2 आदेश आदेश 1- बिहार सरकार ने कैश बैलेंस सुधारने को लेकर सभी बोर्ड, निगम, सोसाइटी और आयोग को पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि पीएल (पर्सनल लेजर) खाते से अपने पैसे निकालें। आदेश 2- वित्त अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने सभी ट्रेजरी को कहा कि खजाने से 1 करोड़ रुपए से अधिक निकालने के लिए पहले वित्त विभाग से मंजूरी लेना है। ये आदेश सभी जिलों को जारी किया गया। क्यों सरकार को जारी करने पड़े ये आदेश? वित्त वर्ष 2025-26 में बिहार सरकार के पास योजना और गैर योजना मद में खर्च करने के लिए 3,16,895 करोड़ रुपए थे। अब समझिए क्या है पीएल खाता, क्यों देना पड़ा इससे पैसे निकालने का आदेश? PL खाता एक खास अकाउंट है जो बिहार सरकार की ट्रेजरी में खुलवाया जाता है। सरकार से अनुदान या अन्य रूप में पैसे लेने वाले निगम, बोर्ड, अथॉरिटी, एजेंसी, सोसाइटी समेत अन्य संस्थानों को यह खाता खुलवाना होता है। इस खाते में सरकार से मिले पैसे रखे जाते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 खत्म होने को है। ऐसे में सरकार ने कहा है कि सभी निगम, बोर्ड और एजेंसी अपने PL अकाउंट में रखे पैसे इस्तेमाल करें। ऐसा करने पर उन्हें सरकारी खजाने से पैसे नहीं देने होंगे। पहले से जारी फंड के काम होगा। इससे नॉन प्लानिंग हैंड में कैश बैलेंस सुधारने में मदद मिलेगी। क्यों 1 करोड़ रुपए से अधिक निकालने के लिए वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी हुई? सरकारी खजाने से 1 करोड़ रुपए से अधिक की राशि निकालने के लिए वित्त विभाग से मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया है। इससे खजाने से एक बार में ज्यादा पैसे निकालने पर एक्स्ट्रा फिल्टर लग गया है। खर्च पर सरकार के लिए लगाम लगाना आसान होगा। क्या है सरकारी खजाने में पैसे की कमी का असर, 4 पॉइंट में जानिए 1- सड़क, पुल बनाने पर खर्च रुका

सड़क, भवन, पुल-पुलिया की मरम्मत मद के खर्च को रोक दिया गया है। इसके लिए नए वित्तीय वर्ष 2026-27 का इंतजार करना होगा। यहीं नहीं, विभाग के मेंटेनेंस राशि को पीएल खाते में रखने से मना किया है। वित्त विभाग ने कहा है कि पीएल खाते की राशि बचती है तो इसे पार्क कर नहीं रखें। राशि को इसी वित्तीय वर्ष में अनिवार्य रूप से सरेंडर करें। इसका मतलब है कि सरकारी पैसे को अगले साल इस्तेमाल के लिए बचाकर नहीं रखना है। उसे बिहार सरकार को लौटा देना है। 2- ट्रेजरी से निकासी पर प्रतिबंध

वित्त विभाग ने ट्रेजरी से पैसे निकालने की खुली छूट पर पाबंदी लगा दी है। विभाग ने 6 फरवरी 2026 को पत्र जारी कर कहा कि 1 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी के लिए वित्त विभाग से पहले मंजूरी लेनी होगी। यह कदम 31 मार्च को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले खर्चों को कंट्रोल करने के लिए उठाया गया है। 3- बचाकर नहीं रख सकते केंद्र प्रायोजित योजना के पैसे

वित्त विभाग ने कहा है कि केंद्र प्रायोजित योजना के पैसे बचाकर नहीं रखना है। अगर किसी योजना के लिए केंद्र सरकार से पैसे मिले हैं तो उसे इसी वित्त वर्ष में खर्च करना है। पैसे खर्च नहीं हो पा रहे हैं तो उसे सरकार के पास सरेंडर करना होगा। बोर्ड, एजेंसी या निगम सरकार के खजाने से पैसे निकालकर अपने बैंक खाता में नहीं रख सकते। 4- 20 मार्च 2026 तक जमा करने होंगे सभी बिल

20 मार्च 2026 तक सभी तरह के बिल जमा करने होंगे। ट्रेजरी में जनवरी 2026 तक का बिल 28 फरवरी 2026, फरवरी 2026 तक का बिल 15 मार्च 2026 और केवल मार्च 2026 का बिल 20 मार्च 2026 तक जमा किया जाएगा। 20 मार्च 2026 के बाद किसी तरह का बिल जमा नहीं लिया जाएगा। अब जानिए क्यों बनी ऐसी स्थिति विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सरकार ने मुफ्त बिजली, पेंशन वृद्धि, महिलाओं को 10-10 हजार रुपए समेत कई लोक-लुभावन घोषणाएं की। बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियां दी गईं। इसके कारण खर्च बढ़े। जैसे- 1- महिलाओं को 10-10 हजार रुपए
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को 18,100 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इस योजना के तहत जीविका दीदियों को 2-2 लाख रुपए देने हैं। पहले फेज में 10-10 रुपए दिए गए हैं। दूसरे फेज में 20 हजार, तीसरे में 40 हजार, चौथे फेज में 80 हजार और पांचवें व आखिरी फेज में 60 हजार रुपए मिलेंगे। 2- वेतन-पेंशन पर खर्च पिछले कुछ वर्षों में बिहार में सरकारी पदों पर बड़े पैमाने पर भर्ती हुई है। इससे सरकारी कर्मियों की संख्या बढ़ी है और वेतन खर्च में इजाफा हुआ है। 3- कर्ज के ब्याज पर खर्च बिहार सरकार पर कर्ज 3.74 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। सरकार ने 22664.83 करोड़ रुपए कर्ज लौटाने और 25363.67 करोड़ रुपए ब्याज पर खर्च किए हैं। पिछले साल कर्ज 3,32,740 करोड़ रुपए था। सरकार ने 22819 करोड़ रुपए कर्ज लौटाने और 23013.94 करोड़ रुपए ब्याज देने पर खर्च किया। 4. मुफ्त बिजली बिहार सरकार प्रति परिवार 125 यूनिट बिजली मुफ्त देती है। इसके चलते 2025 में करीब 19 हजार 370 करोड़ रुपए अनुदान देना पड़ा।  

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