अरवल व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार पांडे की अदालत ने पुराने न्यायालय परिसर ब्लॉक-बी से चोरी के मामले में तीन आरोपियों को कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने सुनवाई के बाद अभियुक्त रोहित कुमार उर्फ वीर भूवन उर्फ अंकित कुमार, गुड्डू कुमार और रंजीत कुमार को दोषी ठहराया। इनमें सबसे गंभीर धारा 112 बीएनएस के तहत 7 साल के कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। इसके अतिरिक्त, अन्य धाराओं में भी 2 से 7 वर्ष तक की कैद और अलग-अलग अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। अभियोजन पदाधिकारी रश्मि सिंहा ने बताया कि यह मामला न्यायालय के नाजिर अभिमन्यु शर्मा द्वारा अरवल थाना कांड संख्या 351/25 के तहत दर्ज कराया गया था। शिकायत में आरोप था कि ब्लॉक-बी स्थित पुराने न्यायालय भवन से न्यायालय का सामान चोरी कर लिया गया था। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी पाया। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं की जाती है, तो दोषियों को अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा। इस फैसले को न्यायालय की संपत्ति की सुरक्षा के संबंध में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि असामाजिक तत्वों द्वारा ऐसी घटनाओं को अंजाम देने या उनकी योजना बनाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अरवल व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार पांडे की अदालत ने पुराने न्यायालय परिसर ब्लॉक-बी से चोरी के मामले में तीन आरोपियों को कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने सुनवाई के बाद अभियुक्त रोहित कुमार उर्फ वीर भूवन उर्फ अंकित कुमार, गुड्डू कुमार और रंजीत कुमार को दोषी ठहराया। इनमें सबसे गंभीर धारा 112 बीएनएस के तहत 7 साल के कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। इसके अतिरिक्त, अन्य धाराओं में भी 2 से 7 वर्ष तक की कैद और अलग-अलग अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। अभियोजन पदाधिकारी रश्मि सिंहा ने बताया कि यह मामला न्यायालय के नाजिर अभिमन्यु शर्मा द्वारा अरवल थाना कांड संख्या 351/25 के तहत दर्ज कराया गया था। शिकायत में आरोप था कि ब्लॉक-बी स्थित पुराने न्यायालय भवन से न्यायालय का सामान चोरी कर लिया गया था। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी पाया। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं की जाती है, तो दोषियों को अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा। इस फैसले को न्यायालय की संपत्ति की सुरक्षा के संबंध में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि असामाजिक तत्वों द्वारा ऐसी घटनाओं को अंजाम देने या उनकी योजना बनाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


