मुरादाबाद महानगर कांग्रेस कमेटी ने बुधवार को प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के खिलाफ कथित दमनकारी कार्रवाई तथा दर्ज मुकदमों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। ज्ञापन कमेटी अध्यक्ष हाजी जुनैद इकराम (बंटी) के नेतृत्व में सौंपा गया। कांग्रेस कमेटी ने आरोप लगाया है कि सनातन धर्म की प्रमुख पीठ ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य के साथ हाल की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाती हैं। समिति के अनुसार, कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य और उनके अनुयायियों को पवित्र स्नान करने से रोका गया। इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। कमेटी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने शंकराचार्य के साथ आए छात्रों और शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि ऐसी कार्रवाई धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित करती है। ज्ञापन में स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित अन्य के खिलाफ दर्ज गंभीर आरोपों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने एफआईआर की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त करते हुए इसकी जांच किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय एजेंसी से कराने की मांग की है। कमेटी ने शिकायतकर्ताओं की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम के संभावित कारणों की भी गहन जांच की मांग की है। कांग्रेस कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में पारदर्शी जांच नहीं कराई गई और कथित उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से जन-आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी सौंपी गई है।


