Supreme Court Film Title Controversy: नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘घूसखोर पंडत‘ के विवाद थमे भी नहीं थे कि अब एक और फिल्म ‘यादवजी की लव स्टोरी’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। बता दें, यादव समुदाय ने इस फिल्म का विरोध किया और इसके प्रदर्शन को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा दिया, लेकिन कोर्ट ने हाल में इस याचिका को खारिज कर दिया है।
विरोध की आशंकाएं बेबुनियाद
कोर्ट ने साफ किया है कि किसी फिल्म के शीर्षक के कारण सीधे तौर पर किसी समुदाय की छवि खराब नहीं होती। साथ ही, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा, “फिल्म के नाम में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो यादव समाज को नकारात्मक रूप में पेश करता हो। इसलिए विरोध की आशंकाएं बेबुनियाद हैं।” बता दें, कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडत’ के मामले से इस मामले को अलग कहा और बताया कि ‘घूसखोर’ शब्द का अर्थ भ्रष्टाचार से जुड़ा था, जबकि ‘यादवजी की लव स्टोरी’ के शीर्षक में ऐसा कोई नकारात्मक मतलब नहीं है।
इतना ही नहीं, इस फिल्म में प्रगति तिवारी, विशाल मोहन, अंकित बढ़ाना और सुखविंदर विक्की लीड रोल में हैं। ये फिल्म 27 फरवरी को थिएटरों में रिलीज होगी। यादव समुदाय ने फिल्म के टाइटल और ट्रेलर में दिखाए गए प्रेम संबंध को लेकर आपत्ति जताई थी। इनके मुताबिक फिल्म से उनकी सामाजिक गरिमा को ठेस पहुंचती है। इस कारण उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में फिल्म के विरोध में प्रदर्शन हुए और पोस्टर भी जलाए गए।
फिल्म को बैन करने की मांग
बता दें, सोशल मीडिया पर भी फिल्म को बैन करने की मांग की गई और फिल्म के मुख्य कलाकारों को भी इसका निशाना बनाया गया। साथ ही, प्रगति तिवारी ने सफाई दी थी कि फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करे। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिल्म की रिलीज पर लगी रोक हट गई है और सेंसर बोर्ड ने भी इसे रिलीज के लिए प्रमाणित किया है।
बता दें, इस फैसले से साफ हो गया है कि ‘यादवजी की लव स्टोरी’ फिल्म के शीर्षक में कोई भी आपत्तिजनक बात नहीं है और फिल्म अपने निर्धारित समय पर बॉक्सऑफिस में रिलीज हो सकेगी।


