चंबल विकास बोर्ड गठन की मांग तेज:तीन राज्यों में विकास यात्रा, पीएम-राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

चंबल विकास बोर्ड गठन की मांग तेज:तीन राज्यों में विकास यात्रा, पीएम-राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

चंबल घाटी के सर्वांगीण विकास की मांग को लेकर ‘चंबल विकास यात्रा’ ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। चंबल विकास समिति के राष्ट्रीय संयोजक ठाकुर जोगिंद्र सिंह भदौरिया के नेतृत्व में यह यात्रा 20 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश के जनापाव कुटी से शिव अभिषेक, चंबल कुंड पूजन और हरि झंडी के साथ शुरू हुई। यह यात्रा मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश इन तीन राज्यों से गुजरते हुए 1-2 मार्च 2026 को पचनदा संगम पर संपन्न होगी। बुधवार को यात्रा के धौलपुर पहुंचने पर यात्रा से जुड़ी समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजकर ‘चंबल विकास बोर्ड’ के गठन की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया है कि चंबल घाटी, जो कभी बीहड़ों और डकैतों के लिए कुख्यात थी, आज देश की सबसे स्वच्छ नदियों में से एक है, लेकिन यह क्षेत्र अभी भी विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है। समिति के अनुसार, इस क्षेत्र में जल संकट, बीहड़ समस्या, रोजगार की कमी, पर्यटन का अभाव और वन्यजीव संरक्षण जैसी कई गंभीर चुनौतियाँ मौजूद हैं। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में पाए जाने वाले घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन जैसी दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। ज्ञापन में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि तीनों राज्यों के समन्वय से एक विशेष पैकेज और नीति निर्माण के लिए चंबल विकास बोर्ड का गठन किया जाए। इसके अतिरिक्त, चंबल क्षेत्र को विशेष पर्यटन क्षेत्र घोषित कर जनापाव कुटी, पचनदा संगम और अन्य धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों का विकास करने की अपील की गई है। समिति ने प्राचीन मंदिरों और तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार, जल संरक्षण, कृषि-सिंचाई, मत्स्य पालन और बीहड़ों में रोजगार सृजन देने का आग्रह किया है।समिति ने ‘नमामि गंगे’ जैसी सफल परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए चंबल के लिए भी इसी प्रकार की समग्र योजना लागू करने की अपील की है। इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु चंबल माँ की आरती और पूजा में भाग ले रहे हैं, जो इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दे रहा है। आयोजकों का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य चंबल क्षेत्र को विकास की एक नई पहचान दिलाना है।

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