झुंझुनूं में निजी बसों का ‘चक्का जाम’ दूसरे दिन भी:यात्री बेहाल, रोडवेज पर बढ़ा भारी दबाव, जिले से निकलती है 55 स्लिपर बसें, लाखों के टिकट हुए रिफंड

झुंझुनूं में निजी बसों का ‘चक्का जाम’ दूसरे दिन भी:यात्री बेहाल, रोडवेज पर बढ़ा भारी दबाव, जिले से निकलती है 55 स्लिपर बसें, लाखों के टिकट हुए रिफंड

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर निजी बस ऑपरेटरों द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल आज बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस हड़ताल ने जिले की समूची परिवहन व्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है। झुंझुनूं का सबसे व्यस्त रहने वाला ‘पीरू सिंह सर्किल’ आज लगातार दूसरे दिन वीरान नजर आया, जहां आमतौर पर यात्रियों की भारी भीड़ और बसों का शोर रहता था। करोड़ों का कारोबार प्रभावित, लाखों के टिकट हुए रिफंड हड़ताल का सबसे बड़ा आर्थिक झटका बस संचालकों और उन यात्रियों को लगा है जिन्होंने लंबी दूरी की यात्रा के लिए पहले से बुकिंग करा रखी थी। निजी बस एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार झुंझुनूं से संचालित होने वाली करीब 55 स्लीपर बसों का संचालन पूरी तरह ठप है। हड़ताल के कारण अब तक 50 लाख रुपये से अधिक की राशि यात्रियों को टिकट कैंसिलेशन के रूप में लौटानी पड़ी है। सूरत, बड़ौदा, अहमदाबाद और चंडीगढ़ जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों के लिए जाने वाले यात्री सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
रोडवेज बसों में ‘पैर रखने की जगह नहीं’, जयपुर रूट का बुरा हाल निजी बसों के सड़कों से नदारद होने का सीधा असर राजस्थान रोडवेज की सेवाओं पर पड़ा है। लोक परिवहन और स्लीपर बसें बंद होने से सारा भार रोडवेज की बसों पर आ गया है। पिलानी-जयपुर और झुंझुनूं-जयपुर मार्ग पर रोडवेज की बसें क्षमता से दोगुनी सवारियां लेकर चल रही हैं। बसों में भारी भीड़ के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है। इन प्रमुख रूटों पर थमे बसों के पहिये एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश गजराज ने बताया कि जिले के प्रमुख मार्ग प्रभावित हैं। अध्यक्ष राकेश गजराज ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर उचित समाधान नहीं निकालते, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम जारी रहेगा। 58 लोक परिवहन बसें: पिलानी से जयपुर रूट पूरी तरह प्रभावित। स्लीपर कोच: दिल्ली, गुजरात और पंजाब जाने वाली 55 बसें बंद। स्थानीय मार्ग: उदयपुरवाटी, खेतड़ी, बीकानेर और चिड़ावा रूट की करीब 50 से अधिक बसें खड़ी रहीं।

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