जेडीयू विधायक ने जूट मिल का मुद्दा विधानसभा में उठाया:सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे महेश्वर हजारी, जल्द से जल्द चालू करने की मांग

जेडीयू विधायक ने जूट मिल का मुद्दा विधानसभा में उठाया:सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे महेश्वर हजारी, जल्द से जल्द चालू करने की मांग

समस्तीपुर के कल्याणपुर से जदयू के विधायक महेश्वर हजारी ने मंगलवार को विधानसभा में बंद रामेश्वर जूट मिल का मुद्दा उठाया। इसको लेकर श्रम और उद्योग विभाग के मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे। दोनों विभाग के मंत्री ने एक-दूसरे के विभाग में संचिका भेजने की बात कही। यह जूट मिल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बंद हो गया था। चुनाव के दौरान विधायक ने इसे चालू कराने की घोषणा की थी। विधानसभा में महेश्वर हजारी ने सवाल उठाया कि कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित रामेश्वर जूट मिल बंद है। कभी इस जूट मिल में 5 हजार मजदूर तीन शिफ्ट में काम करते थे, घटकर इसकी संख्या 800 के करीब हो गई। लेकिन पिछले साल इसे बंद कर दिया गया। प्रबंधन ने बैंक से करोड़ों रुपए लिए, लेकिन मिल की जगह खुद के विकास में लगा दिया। यहां तक की बंद पड़े मिल का पार्ट-पूर्जा भी बेचा जा रहा है। 4200 मजदूरों का पीएफ और रिटायर्ड की राशि बकाया है। इस बंद पड़े मिल को जल्द चालू कराया जाए। ताकि लोगों को रोजगार मिल सके। इस सवाल का जब जवाब आया तो वह हैरान करने वाला है। उद्योग विभाग के मंत्री ने कहा कि संचिका श्रम विभाग को भेज दी गई। जबकि श्रम विभाग के मंत्री ने कहा कि संचिका उद्योग विभाग को दे दी गई है। जिस पर विधायक ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। बैठक से पहले लगा ताला दैनिक मजदूरी बढ़ाने को लेकर मिल प्रबंधन और मजदूर यूनियन के साथ पिछले साल नवंबर महीने में बैठक होनी थी। उससे पहले प्रबंधन ने मिल बंद होने की नोटिस लगा दिया। साथ ही मेन गेट में ताला जड़ दिया। रामेश्वर जूट मिल संघर्ष समिति के संयोजक रामू बली महतो ने बताया कि मजदूर सरकारी प्रावधान 660 रुपए रोज देने की मांग कर रहे थे, जबकि प्रबंधन की ओर से 400 रुपए रोजाना दिया जा रहा था। इसके अलावा मजदूरों के पीएफ का पैसा काटा जा रहा था, लेकिन अकाउंट में राशि जमा नहीं की जा रही थी। मजदूर मिल को तीनों पाली में चलाने की मांग कर रहे थे। जबकि अभी मिल दो पाली में ही चल रहा था। इसके साथ ही सेवा मुक्त कर्मियों का पैसा बकाया है। पेंशन की राशि भी नहीं दी जा रही है। पूर्व के वार्ता में भाग लेने वाले कर्मियों को काम से हटा दिया गया है। 1926 में स्थापना की गई थी समस्तीपुर शहर से दो किमी. दूर मुक्तापुर में 84 एकड़ रकबा में स्थित वसम इंटरनेशनल लिमिटेड की रामेश्वर जूट मिल की स्थापना 1926 में हुई थी। 1954 तक दरभंगा महाराज ने इसे चलाया। इसके बाद 1976 तक मेसर्स बिरला ब्रदर्स ने चलाया। 1976 में एमपी बिरला ने इसका अधिग्रहण कर लिया। 1986 से मिल का स्वामित्व ‘वसम इंडिया’ के पास है। 125 करोड़ के सालाना कारोबार वाली उत्तर भारत की एकमात्र जूट मिल बिहार के लिए गौरव थी। बंद होने से पहले तक इस जूट मिल में 300 लूम चल रहे थे। चार साल में अगलगी की तीन बड़ी घटनाओं के चलते मिल को काफी नुकसान हुआ। इस वजह से भी वित्तीय स्थिति चरमराई। पहली बार मार्च 2012 में आग लगी। जिसमें 14 करोड़ का नुकसान हुआ। अप्रैल 2014 में अगलगी की दूसरी घटना हुई, जिसमें छह करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ। 17 मार्च 2017 को भी आग लगने से पांच करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। मिल कब-कब बंद हुआ 6 जुलाई 2017 14 नवंबर 2022 समस्तीपुर के कल्याणपुर से जदयू के विधायक महेश्वर हजारी ने मंगलवार को विधानसभा में बंद रामेश्वर जूट मिल का मुद्दा उठाया। इसको लेकर श्रम और उद्योग विभाग के मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे। दोनों विभाग के मंत्री ने एक-दूसरे के विभाग में संचिका भेजने की बात कही। यह जूट मिल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बंद हो गया था। चुनाव के दौरान विधायक ने इसे चालू कराने की घोषणा की थी। विधानसभा में महेश्वर हजारी ने सवाल उठाया कि कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित रामेश्वर जूट मिल बंद है। कभी इस जूट मिल में 5 हजार मजदूर तीन शिफ्ट में काम करते थे, घटकर इसकी संख्या 800 के करीब हो गई। लेकिन पिछले साल इसे बंद कर दिया गया। प्रबंधन ने बैंक से करोड़ों रुपए लिए, लेकिन मिल की जगह खुद के विकास में लगा दिया। यहां तक की बंद पड़े मिल का पार्ट-पूर्जा भी बेचा जा रहा है। 4200 मजदूरों का पीएफ और रिटायर्ड की राशि बकाया है। इस बंद पड़े मिल को जल्द चालू कराया जाए। ताकि लोगों को रोजगार मिल सके। इस सवाल का जब जवाब आया तो वह हैरान करने वाला है। उद्योग विभाग के मंत्री ने कहा कि संचिका श्रम विभाग को भेज दी गई। जबकि श्रम विभाग के मंत्री ने कहा कि संचिका उद्योग विभाग को दे दी गई है। जिस पर विधायक ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। बैठक से पहले लगा ताला दैनिक मजदूरी बढ़ाने को लेकर मिल प्रबंधन और मजदूर यूनियन के साथ पिछले साल नवंबर महीने में बैठक होनी थी। उससे पहले प्रबंधन ने मिल बंद होने की नोटिस लगा दिया। साथ ही मेन गेट में ताला जड़ दिया। रामेश्वर जूट मिल संघर्ष समिति के संयोजक रामू बली महतो ने बताया कि मजदूर सरकारी प्रावधान 660 रुपए रोज देने की मांग कर रहे थे, जबकि प्रबंधन की ओर से 400 रुपए रोजाना दिया जा रहा था। इसके अलावा मजदूरों के पीएफ का पैसा काटा जा रहा था, लेकिन अकाउंट में राशि जमा नहीं की जा रही थी। मजदूर मिल को तीनों पाली में चलाने की मांग कर रहे थे। जबकि अभी मिल दो पाली में ही चल रहा था। इसके साथ ही सेवा मुक्त कर्मियों का पैसा बकाया है। पेंशन की राशि भी नहीं दी जा रही है। पूर्व के वार्ता में भाग लेने वाले कर्मियों को काम से हटा दिया गया है। 1926 में स्थापना की गई थी समस्तीपुर शहर से दो किमी. दूर मुक्तापुर में 84 एकड़ रकबा में स्थित वसम इंटरनेशनल लिमिटेड की रामेश्वर जूट मिल की स्थापना 1926 में हुई थी। 1954 तक दरभंगा महाराज ने इसे चलाया। इसके बाद 1976 तक मेसर्स बिरला ब्रदर्स ने चलाया। 1976 में एमपी बिरला ने इसका अधिग्रहण कर लिया। 1986 से मिल का स्वामित्व ‘वसम इंडिया’ के पास है। 125 करोड़ के सालाना कारोबार वाली उत्तर भारत की एकमात्र जूट मिल बिहार के लिए गौरव थी। बंद होने से पहले तक इस जूट मिल में 300 लूम चल रहे थे। चार साल में अगलगी की तीन बड़ी घटनाओं के चलते मिल को काफी नुकसान हुआ। इस वजह से भी वित्तीय स्थिति चरमराई। पहली बार मार्च 2012 में आग लगी। जिसमें 14 करोड़ का नुकसान हुआ। अप्रैल 2014 में अगलगी की दूसरी घटना हुई, जिसमें छह करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ। 17 मार्च 2017 को भी आग लगने से पांच करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। मिल कब-कब बंद हुआ 6 जुलाई 2017 14 नवंबर 2022  

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