काले हिरण शिकार मामले में वनकर्मियों की भूमिका संदिग्ध:डीएफओ बोले; एरिए से दोबारा नौकरी नहीं देंगे, विभाग की छवि हो रही खराब

काले हिरण शिकार मामले में वनकर्मियों की भूमिका संदिग्ध:डीएफओ बोले; एरिए से दोबारा नौकरी नहीं देंगे, विभाग की छवि हो रही खराब

नर्मदापुरम जिले में अवैध कटाई, अतिक्रमण और शिकार जैसे मामलों में कार्रवाई में देरी तथा तथ्यों को छिपाने की घटनाओं से वन विभाग की छवि प्रभावित हो रही है। हाल ही में सिवनी मालवा क्षेत्र में दो काले हिरणों के शिकार के मामले में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद रेंजर, डिप्टी रेंजर सहित छह वनकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इससे पहले छिपीखापा बीट में अवैध कटाई के मामले में 1200 पेड़ों की जगह केवल 383 पेड़ों की कटाई दर्ज किए जाने का मामला सामने आया था। उस प्रकरण में भी रेंजर, एसडीओ और डीएफओ की भूमिका पर सवाल उठे थे। लगातार सामने आ रही घटनाओं से विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। शिकार के साक्ष्य मिटाने के आरोप वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने आरोप लगाया है कि काले हिरण के शिकार के बाद वन अमले ने साक्ष्य मिटाने की कोशिश की। उनका कहना है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य है। उन्होंने इस मामले में शामिल वन अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित पशु चिकित्सक पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सेवा से बर्खास्त करने की मांग की है। अजय दुबे ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) अजय अंबाड़े को शिकायत भेजकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत कदाचार और कर्तव्य की घोर उपेक्षा के आधार पर सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की जानी चाहिए। दो काले हिरण मिले डीएफओ गौरव शर्मा ने बताया कि 21 जनवरी 2026 को सिवनी मालवा के पास बासनिया गांव में यह घटना हुई। दो काले हिरणों का शिकार कर आरोपी उन्हें ले जा रहे थे। ग्रामीणों को भनक लगने पर आरोपी हिरणों को छोड़कर फरार हो गए। प्रारंभिक स्तर पर विभागीय स्टाफ ने घटना की सही जांच नहीं की और पूरी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई। एक जीवित हिरण, जिसके पैर बंधे हुए थे, उसे खोलकर छोड़ दिया गया। दूसरे मृत हिरण को प्राकृतिक मौत बताकर गांव में ही पोस्टमार्टम कराया गया और शव को जला दिया गया। पोस्टमार्टम के दौरान निकाले गए नमूनों को जांच के लिए भेजने के बजाय नष्ट कर दिया गया। कुछ दिनों बाद ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो और फोटो सामने आने पर मामले में विभागीय कर्मचारियों की भूमिका उजागर हुई। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकलवाकर पूछताछ की गई, जिसमें शिकार के मामले को दबाने की बात सामने आई। डीएफओ शर्मा ने कहा कि मामले में कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी और दोषी कर्मचारियों को दोबारा उसी क्षेत्र में पदस्थ नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में वन्यजीव शिकार, अवैध कटाई, खनन या अतिक्रमण के मामलों में किसी भी प्रकार की मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संदिग्ध भूमिका पर छह वनकर्मी सस्पेंड मामले में सिवनी मालवा रेंजर आशीष रावत, वनपाल महेश गौर तथा वनरक्षक मनीष गौर, रूपक झा, ब्रजेश पगारे और पवन उइके को निलंबित कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। गौरतलब है कि इससे पहले बालाघाट जिले में शिकार किए गए बाघ को जलाकर नष्ट करने के मामले में भी कड़ी कार्रवाई की गई थी। उसी तर्ज पर इस मामले में भी सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है। इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नर्मदापुरम में 2 काले हिरण का शिकार, छह सस्पेंड नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा में दो काले हिरण के हुए शिकार के मामले में चार वन कर्मचारि अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। लापरवाही बरतने पर रेंजर, डिप्टी रेंजर के अलावा चार वनरक्षकों को सस्पेंड किया गया। सोमवार देर रात को सभी को निलंबन करने के आदेश दिए। पूरी खबर पढ़ें…

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *