फर्जी जन्मतिथि से अनुकम्पा नौकरी का प्रयास:मऊ में महिला को दो साल की कैद, पति ने दर्ज कराया था केस

फर्जी जन्मतिथि से अनुकम्पा नौकरी का प्रयास:मऊ में महिला को दो साल की कैद, पति ने दर्ज कराया था केस

मऊ में अनुकम्पा नौकरी पाने के लिए फर्जी जन्मतिथि प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में घोसी कोतवाली क्षेत्र की एक महिला को दोषी करार दिया गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. के.पी. सिंह ने आरोपी प्रीति गुप्ता को दो साल कारावास और आठ हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतने का भी आदेश दिया गया है। यह मामला आरोपी महिला के पति अमित कुमार जायसवाल ने दर्ज कराया था। बलिया जनपद के गडवार थाना क्षेत्र के रतसड़ निवासी अमित ने घोसी कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी प्रीति गुप्ता ने अनुकम्पा नौकरी के लिए धोखाधड़ी की है। प्राथमिकी के अनुसार, प्रीति गुप्ता ने 1997 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी, जिसमें उसकी जन्मतिथि 1982 दर्ज थी। बाद में उसने 2007 में एक कूटरचित जन्मतिथि प्रमाण पत्र बनवाया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 1993 अंकित थी। इसी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर उसने दोबारा हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा दी, ताकि अनुचित लाभ प्राप्त कर सके। आरोपी के पिता राधेश्याम गुप्ता गोरखपुर रेलवे आरएमएस पोस्ट ऑफिस में कर्मचारी थे, जिनकी हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी। उनके स्थान पर मृतक के बड़े बेटे (आरोपी के बड़े भाई) को अनुकम्पा नौकरी मिली थी, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उनकी भी मृत्यु हो गई। इसके बाद प्रीति गुप्ता ने अनुकम्पा नौकरी प्राप्त करने का प्रयास किया। पति ने आरोप लगाया था कि इस कूटरचना के षड्यंत्र में आरोपी की मां और भाई भी शामिल थे। पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन के आधार पर आरोपी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में अभियोजन अधिकारी हरेन्द्र सिंह ने कुल चार गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराकर अभियोजन कथानक को संदेह से परे साबित किया। मामले में आरोप पत्र 9 सितंबर 2022 को न्यायालय द्वारा संज्ञान में लिया गया था। इसके बाद, 6 मार्च 2025 को मामले में आरोप विरचित किए गए और सुनवाई के बाद अब यह फैसला सुनाया गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की गहन समीक्षा, आरोपी की उम्र व तथ्य एवं परिस्थितियों को देखते हुए दो साल कारावास और आठ हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाया। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतने का भी आदेश जारी किया।

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