Ahmedabad. सिविल मेडिसिटी के गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट ने एक बार फिर चिकित्सा नवाचार और मानवीय सेवा का अद्भुत उदाहरण पेश किया है। यहां आयोजित दूसरे इंडो-अमेरिकन स्पाइन सर्जरी कैंप में सात बच्चों की जटिल काइफोस्कोलियोसिस सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इन बच्चों की रीढ़ की हड्डी सांप की तरह टेढ़ी-मेढ़ी हो चुकी थी, जिससे उनका जीवन कठिनाई और खतरे से भरा था।गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. पियुष मित्तल ने बताया कि इस तरह की सर्जरी का खर्च निजी अस्पतालों में 5 से 10 लाख रुपए तक होता है, लेकिन सरकारी सहयोग से यह उपचार पूरी तरह नि:शुल्क किया गया। इस पहल से न केवल गुजरात बल्कि अन्य राज्यों से आए बच्चों को भी नई उम्मीद मिली है।
4-5 घंटे चली हाई-रिस्क सर्जरी
डॉ. मित्तल के अनुसार यह अत्यंत जोखिमपूर्ण ऑपरेशन होता है। 4 से 5 घंटे तक चलने वाली इस प्रक्रिया में रीढ़ की हड्डी को सीधा करते समय नसों और रक्तवाहिनियों के बीच बेहद सावधानी से काम करना पड़ता है। थोड़ी चूक भी मरीज को जीवनभर का लकवाग्रस्त कर सकती है। इस जोखिम को कम करने के लिए अमेरिकी न्यूरो-मॉनिटरिंग टीम और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने अहम भूमिका निभाई। सर्जरी के बाद बच्चों के लिए पोस्ट-ऑपरेटिव रिहैबिलिटेशन पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। इस सफल प्रयोग ने साबित किया है कि उच्च तकनीक और विशेषज्ञ हाथ मिलकर आम लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
ग्रॉइंग रॉड तकनीक से भविष्य सुरक्षित
कैंप में 9 वर्षीय बच्चे पर ‘ग्रॉइंग रॉड सर्जरी’ की गई। यह तकनीक बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ को सीधा रखने में मदद करेगी। इससे बच्चों के भविष्य को नया सहारा मिला है।
टीमवर्क और वैश्विक साझेदारी
इस कैंप का नेतृत्व डॉ. पियुष मित्तल और डॉ. प्रेरक यादव ने किया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. रीमा वणसोल और डॉ. किंजल आनंद शामिल रहे। वहीं अमेरिका से आए विशेषज्ञ डॉ. विरल जैन, डॉ. हर्षद पटेल, डॉ. केरन यंग, डॉ. डेवेल कैरोल व डॉ. स्कॉट कोवन भी थे। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने इस मानवीय प्रयास की सराहना की।


