भारतीय टेनिस में नया सितारा, Vaishnavi Adkar ने WTA Ranking में लगाई 224 पायदान की छलांग

मुंबई से आई खबर ने भारतीय महिला टेनिस में नई उम्मीद जगा दी है। बेंगलुरु में खेले गए डब्ल्यू100 आईटीएफ टूर्नामेंट में उपविजेता बनने के बाद 21 वर्षीय वैष्णवी अडकर ने अपने करियर की अब तक की सबसे बड़ी छलांग लगाई है।बता दें कि वाइल्डकार्ड एंट्री के तौर पर टूर्नामेंट खेलने उतरी वैष्णवी ने तीन करियर-बेस्ट जीत दर्ज कीं और दो टॉप-150 खिलाड़ियों को हराकर फाइनल तक का सफर तय किया। मौजूद जानकारी के अनुसार सोमवार को जारी डब्ल्यूटीए रैंकिंग में उन्होंने 224 स्थान की छलांग लगाते हुए 466वां स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही वह भारत की नई नंबर-2 महिला एकल खिलाड़ी बन गई हैं।गौरतलब है कि आईटीएफ 100 स्तर या उससे ऊपर के टूर्नामेंट में किसी भारतीय महिला खिलाड़ी का फाइनल तक पहुंचना लंबे समय बाद देखने को मिला है। इससे पहले ऐसा प्रदर्शन सानिया मिर्जा के दौर में देखने को मिला था।पुणे की रहने वाली वैष्णवी ने 2022 में प्रोफेशनल टेनिस की शुरुआत की थी। शुरुआती वर्षों में उनकी रैंकिंग 800 के आसपास रही। हालांकि उनके खेल में दमदार बैकहैंड की झलक पहले से दिखाई देती थी। 2024 में उन्होंने अहमदाबाद में आईटीएफ डब्ल्यू15 खिताब जीता और मुंबई ओपन डब्ल्यूटीए 125 में भी ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ी के खिलाफ सेट जीता था।पिछला साल उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। राष्ट्रीय सीनियर खिताब और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने के बावजूद यूरोप में बड़े आईटीएफ टूर्नामेंटों में शुरुआती दौर में हार ने उनके आत्मविश्वास को झटका दिया। खुद वैष्णवी के मुताबिक वह एक समय अपने माता-पिता से पूछने लगी थीं कि क्या यह सफर जारी रखना सही फैसला है।इसी दौर में उनकी मुलाकात रोहन बोपन्ना से हुई, जो पूर्व डबल्स विश्व नंबर-1 रह चुके हैं और बेंगलुरु में अपनी अकादमी चलाते हैं। पिछले महीने वैष्णवी ने अपनी ट्रेनिंग बेस को रोहन बोपन्ना टेनिस अकादमी में शिफ्ट किया। वरिष्ठ कोच बालाचंद्रन मणिक्कथ के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल में तकनीकी और मानसिक दोनों स्तर पर बदलाव किए।कोच मणिक्कथ का कहना है कि वैष्णवी की शॉट चयन क्षमता में खास सुधार हुआ है। कब आक्रामक होना है और कब रैली को नियंत्रित रखना है, इस समझ ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। हालांकि सर्विस और फिटनेस पर अभी भी काम जारी है।मौजूद जानकारी के अनुसार कोच का मानना है कि वैष्णवी में टॉप-200 ही नहीं बल्कि टॉप-100 में पहुंचने की भी क्षमता है। लेकिन असली चुनौती अब इस प्रदर्शन को बरकरार रखने की होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन उसे निरंतरता में नहीं बदल पाए।वैष्णवी खुद मानती हैं कि यह उनके लिए अवसर भी है और परीक्षा भी। वह अब ऊंचे स्तर के टूर्नामेंट खेलने और लगातार प्रदर्शन करने पर ध्यान देना चाहती हैं। आरबीटीए को वह अपने दीर्घकालिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में देख रही हैं, जहां अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी उन्हें आगे बढ़ने में मदद करेगी।कुल मिलाकर बेंगलुरु का यह सप्ताह उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ है और अगर वह इसी लय को बरकरार रख पाती हैं तो भारतीय महिला टेनिस को एक नई पहचान मिल सकती है। 

मुंबई से आई खबर ने भारतीय महिला टेनिस में नई उम्मीद जगा दी है। बेंगलुरु में खेले गए डब्ल्यू100 आईटीएफ टूर्नामेंट में उपविजेता बनने के बाद 21 वर्षीय वैष्णवी अडकर ने अपने करियर की अब तक की सबसे बड़ी छलांग लगाई है।
बता दें कि वाइल्डकार्ड एंट्री के तौर पर टूर्नामेंट खेलने उतरी वैष्णवी ने तीन करियर-बेस्ट जीत दर्ज कीं और दो टॉप-150 खिलाड़ियों को हराकर फाइनल तक का सफर तय किया। मौजूद जानकारी के अनुसार सोमवार को जारी डब्ल्यूटीए रैंकिंग में उन्होंने 224 स्थान की छलांग लगाते हुए 466वां स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही वह भारत की नई नंबर-2 महिला एकल खिलाड़ी बन गई हैं।
गौरतलब है कि आईटीएफ 100 स्तर या उससे ऊपर के टूर्नामेंट में किसी भारतीय महिला खिलाड़ी का फाइनल तक पहुंचना लंबे समय बाद देखने को मिला है। इससे पहले ऐसा प्रदर्शन सानिया मिर्जा के दौर में देखने को मिला था।
पुणे की रहने वाली वैष्णवी ने 2022 में प्रोफेशनल टेनिस की शुरुआत की थी। शुरुआती वर्षों में उनकी रैंकिंग 800 के आसपास रही। हालांकि उनके खेल में दमदार बैकहैंड की झलक पहले से दिखाई देती थी। 2024 में उन्होंने अहमदाबाद में आईटीएफ डब्ल्यू15 खिताब जीता और मुंबई ओपन डब्ल्यूटीए 125 में भी ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ी के खिलाफ सेट जीता था।
पिछला साल उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। राष्ट्रीय सीनियर खिताब और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने के बावजूद यूरोप में बड़े आईटीएफ टूर्नामेंटों में शुरुआती दौर में हार ने उनके आत्मविश्वास को झटका दिया। खुद वैष्णवी के मुताबिक वह एक समय अपने माता-पिता से पूछने लगी थीं कि क्या यह सफर जारी रखना सही फैसला है।
इसी दौर में उनकी मुलाकात रोहन बोपन्ना से हुई, जो पूर्व डबल्स विश्व नंबर-1 रह चुके हैं और बेंगलुरु में अपनी अकादमी चलाते हैं। पिछले महीने वैष्णवी ने अपनी ट्रेनिंग बेस को रोहन बोपन्ना टेनिस अकादमी में शिफ्ट किया। वरिष्ठ कोच बालाचंद्रन मणिक्कथ के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल में तकनीकी और मानसिक दोनों स्तर पर बदलाव किए।
कोच मणिक्कथ का कहना है कि वैष्णवी की शॉट चयन क्षमता में खास सुधार हुआ है। कब आक्रामक होना है और कब रैली को नियंत्रित रखना है, इस समझ ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। हालांकि सर्विस और फिटनेस पर अभी भी काम जारी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार कोच का मानना है कि वैष्णवी में टॉप-200 ही नहीं बल्कि टॉप-100 में पहुंचने की भी क्षमता है। लेकिन असली चुनौती अब इस प्रदर्शन को बरकरार रखने की होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन उसे निरंतरता में नहीं बदल पाए।
वैष्णवी खुद मानती हैं कि यह उनके लिए अवसर भी है और परीक्षा भी। वह अब ऊंचे स्तर के टूर्नामेंट खेलने और लगातार प्रदर्शन करने पर ध्यान देना चाहती हैं। आरबीटीए को वह अपने दीर्घकालिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में देख रही हैं, जहां अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी उन्हें आगे बढ़ने में मदद करेगी।
कुल मिलाकर बेंगलुरु का यह सप्ताह उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ है और अगर वह इसी लय को बरकरार रख पाती हैं तो भारतीय महिला टेनिस को एक नई पहचान मिल सकती है।

​Hindi News – News in Hindi – Latest News in Hindi | Prabhasakshi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *