KGMU के HRF (हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड) विभाग में तैनात एक महिला कर्मचारी ने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है। पीड़िता ने मामले की शिकायत संस्थान प्रशासन से की है। कुलपति ने मामले की जांच के लिए विशाखा कमेटी को पत्र लिखा है। पीड़िता की ओर से 20 फरवरी को शिकायत पत्र के माध्यम से उत्पीड़न, छुट्टी से इनकार, गर्भावस्था के दौरान असंवेदनशील व्यवहार और बुनियादी सुविधाओं से वंचित किए जाने जैसे आरोप लगाए हैं। उन्होंने इन परिस्थितियों को अपनी नौकरी से इस्तीफा देने का प्रमुख कारण बताया है। परिवार में मृत्यु होने पर भी नहीं मिला अवकाश शिकायत में कहा गया है कि सेवा अवधि के दौरान, गर्भवती होने के बावजूद उन्हें कोई विशेष सहयोग या सुविधा प्रदान नहीं की गई। पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होने के बाद भी उन पर अप्रत्यक्ष दबाव डाला गया और टिप्पणियां की गईं, जिससे मानसिक तनाव की स्थिति बनी रही। आरोप लगाया कि पारिवारिक शोक जैसी आपात स्थिति में अवकाश का अनुरोध करने पर भी उन्हें सहानुभूति या समर्थन नहीं मिला। उन्होंने इसे प्रशासनिक असंवेदनशीलता और महिला कर्मचारियों के प्रति उदासीन रवैया बताया है। बहन को भी परेशान करने का लगाया आरोप शिकायत में एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान वॉशरूम उपयोग की अनुमति और चाबी देने से इनकार कर दिया गया, जिसके कारण उन्हें दूसरे विभाग में जाना पड़ा। इस देरी के चलते उनसे जवाब-तलब भी किया गया। इस्तीफा देने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी ने अपमानजनक टिप्पणी की।आरोप यह भी है कि इस्तीफे के बाद उनकी बहन, जो उसी संस्थान में फार्मासिस्ट के पद पर तैनाती हैं, को भी मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। विशाखा कमेटी की चेयरमैन को भेजा गया प्रकरण KGMU के मीडिया सेल प्रभारी डॉ.केके सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही कुलपति की तरफ से इस प्रकरण को विशाखा कमेटी के चेयरमैन को भेजा गया हैं। वो खुद इस पर निर्णय लेंगी कि इस विषय की जांच विशाखा कमेटी की परिधि में हैं या नहीं। विश्वविद्यालय में किसी भी महिला या फीमेल स्टॉफ या स्टूडेंट्स से जुड़े मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाती हैं, इसलिए कार्रवाई नहीं होगी, इसका सवाल ही नहीं उठता।


