Salary Increment: इस बार कितना इंक्रीमेंट करेंगी कंपनियां… किस सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़ेगी सैलरी?

Salary Increment: इस बार कितना इंक्रीमेंट करेंगी कंपनियां… किस सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़ेगी सैलरी?

Salary Hike Percentage: जैसे-जैसे यह वित्त वर्ष खत्म होने को आ रहा है, कॉरपोरेट वर्ल्ड में इंक्रीमेंट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कर्मचारियों को अपने अप्रेजल का बेसब्री से इंतजार है। कई कंपनीज में अप्रेजल की प्रक्रिया भी स्टार्ट हो गई है। अब बड़ा सवाल यह है कि इस साल कंपनियां कितना इंक्रीमेंट करेंगी। कंसल्टिंग फर्म Aon की एक स्टडी के अनुसार, भारत में कंपनियां इस बार 9.1 फीसदी इंक्रीमेंट कर सकती हैं।

Aon के 32वें एनुअल सैलरी इंक्रीज एंड टर्नओवर सर्वे 2025-26 के अनुसार, 2025 में एक्चुअल सैलरी इंक्रीज 8.9 फीसदी पर पहुंची थी। यह 9.2 फीसदी के अनुमान से कम है। कंपनी ने 45 इंडस्ट्रीज के 1400 से अधिक संगठनों में सर्वे किया है।

रियल एस्टेट और NBFC में सबसे अधिक इंक्रीमेंट

इंडस्ट्री के आधार पर अलग-अलग वेतन वृद्धि का अनुमान है। रियल एस्टेट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर और एनबीएफसी सेक्टर में सबसे अधिक इंक्रीमेंट होने का अनुमान है। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल एंड व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग डिजाइन सर्विसेज, इंजीनियरिंग एंड मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर में भी औसत से थोड़ी अधिक वेतन वृद्धि मिलने की संभावना है।

अच्छे टैलेंट में निवेश करना चाहती हैं कंपनियां

एओन इंडिया के टैलेंट सॉल्यूशंस में पार्टनर और रिवार्ड्स कंसल्टिंग लीडर रूपांक चौधरी ने कहा, “मजबूत घरेलू मांग, घटती महंगाई और नए ट्रेड एग्रीमेंट्स मध्यम अवधि में सकारात्मक आर्थिक माहौल बना रहे हैं। हालांकि, कंपनियां भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का सामना भी कर रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “रियल एस्टेट, NBFC और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में ज्यादा वेतन वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनियां महत्वपूर्ण टैलेंट में निवेश करना चाहती हैं और स्थायी पे स्ट्रक्चर बनाना चाहती हैं।”

पिछले दशक में धीमी रही वेतन वृद्धि

पिछले 10 वर्षों में वेतन वृद्धि की गति धीरे-धीरे कम हुई है। उदाहरण के लिए, 2015 में औसत वेतन वृद्धि 10.4% थी, जो अब कम होकर लगभग 9% के आसपास रह गई है।

लेबर कोड का प्रभाव

यह सीमित वेतन वृद्धि ऐसे समय में हो रही है, जब कंपनियां नए लेबर कोड के प्रभाव से जूझ रही हैं। मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की टॉप-30 कंपनियों में से 25 को वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में लगभग 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसका कारण यह है कि नए लेबर कोड के तहत नियोक्ता और कर्मचारियों दोनों को सामाजिक सुरक्षा में अधिक योगदान देना होगा, साथ ही रिटायरमेंट लाभ भी बढ़ेंगे।

टैरिफ, ट्रेड वॉर और AI का प्रभाव

वेतन वृद्धि में यह कमी टैरिफ बदलाव, ग्लोबल ट्रेड वॉर और आईटी सेक्टर में AI के कारण नौकरियों पर पड़ रहे प्रभाव के बीच देखी जा रही है। इस अनिश्चितता के कारण टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली बढ़ी है, जिससे कंपनियों का भरोसा भी प्रभावित हुआ है।

EY की रिपोर्ट में भी 9.1% वेतन वृद्धि का अनुमान

EY की फ्यूचर ऑफ पे 2026 रिपोर्ट के अनुसार भी भारत में 2026 में वेतन में 9.1% होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल सर्विसेज, ई-कॉमर्स, लाइफ साइंसेज और फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में बेहतर वेतन वृद्धि होगी। वहीं, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपेक्षाकृत मध्यम वेतन वृद्धि देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कंपनियां अब स्किल-बेस्ड पे पर ज्यादा ध्यान दे रही है। खासकर AI और डिजिटल स्किल वाले कर्मचारियों को अधिक वेतन मिल रहा है।

एओन इंडिया के टैलेंट सॉल्यूशंस में एसोसिएट पार्टनर अमित कुमार ओटवानी ने कहा, “भारत में लेबर कोड लागू होने के बाद कंपनियां पिछले कई दशकों के सबसे बड़े नियामकीय बदलाव का सामना कर रही हैं।” उन्होंने कहा, “वेतन की नई परिभाषा और बढ़ी हुई सामाजिक सुरक्षा के कारण कई कंपनियां अपनी वेतन संरचना की समीक्षा और पुनर्गठन कर रही हैं। इन बदलावों के बारे में स्पष्ट जानकारी देना कर्मचारियों का भरोसा बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होगा।”

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