सिद्धार्थनगर में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी राजेंद्र को अदालत ने सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने उस पर 35,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह फैसला 24 फरवरी को सुनाया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, वीरेंद्र कुमार की अदालत में सभी साक्ष्य और गवाह पेश किए गए। इन्हीं के आधार पर आरोपी राजेंद्र, पुत्र टिहुल, निवासी धनौरा बुजुर्ग को दोषी ठहराया गया। अदालत ने इस फैसले के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कानून सख्त है। न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार ने आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत कुल सात साल के कठोर कारावास और 35,000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। इसमें 20,000 रुपए, 10,000 रुपए और 5,000 रुपए के अलग-अलग अर्थदंड शामिल हैं। इस मामले में जिला मॉनिटरिंग सेल और अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पवन कुमार कर पाठक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने समय पर प्रभावी पैरवी और साक्ष्य प्रस्तुत कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में मदद की। स्थानीय लोगों ने इस फैसले को अदालत की त्वरित कार्रवाई और अपराधियों के प्रति सख्ती का उदाहरण बताया है। उनका मानना है कि इस निर्णय से समाज में यह संदेश गया है कि अपराधी कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। इस सजा की घोषणा के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। इस मामले ने समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत किया है, यह दर्शाता है कि गंभीर अपराधों में भी न्यायालय समय पर निर्णय देकर पीड़ितों को राहत प्रदान कर सकता है।


