मधुबनी में आयुष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित:पंडौल सहित 2 जगह सफल आयोजन, सैकड़ों छात्र-छात्राएं लाभान्वित

मधुबनी में आयुष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित:पंडौल सहित 2 जगह सफल आयोजन, सैकड़ों छात्र-छात्राएं लाभान्वित

मधुबनी जिला आयुष समिति ने सोमवार को पंडौल स्थित विवेकानंद मिशन विद्यापीठ विद्यालय प्रांगण में आयुर्विद्या कार्यक्रम का दूसरा चरण सफलतापूर्वक आयोजित किया। यह आयोजन बिहार राज्य आयुष समिति के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रेमलता, विद्यालय के प्राचार्य अभिषेक कुमार और प्रबंध निदेशक साहिल पूर्वे ने औषधीय पौधों का वितरण कर किया। इस शिविर में 300 से अधिक छात्र-छात्राओं, दर्जनों शिक्षक-शिक्षिकाओं और आयुर्वेदिक, यूनानी तथा होम्योपैथिक चिकित्सकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिभागियों के स्वास्थ्य जांच की हुई जांच शिविर के दौरान प्रतिभागियों की स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें निशुल्क औषधियां वितरित की गईं। डॉ. प्रेमलता ने प्राकृतिक आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या और योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए इलाज से बेहतर परहेज है और आवश्यकता पड़ने पर सस्ती व वैज्ञानिक आयुष औषधियों से निरोगी जीवन प्राप्त किया जा सकता है। अन्य चिकित्सकों ने स्थानीय औषधीय पौधों, मौसमी फल-सब्जियों, सात्विक आहार और सदाचार की उपयोगिता पर जोर दिया। उन्होंने ‘आयुर्विद्या आयु बढ़ाने की विद्या’ के मंत्र को साझा किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. ओंकारनाथ झा बटोहिया, डॉ. दीपक कुमार दैंता, डॉ. मनोज कुमार बथने, डॉ. जय ओम उच्चैठ, डॉ. कमर संकोर्थ, डॉ. हक सीमा, डॉ. कौशलेश बिठुवार, डॉ. मनीष तिवारी (देवहार) सहित डीआईएमओ कार्यालय के हेमंत झा और पप्पू पासवान का उल्लेखनीय सहयोग रहा। तीसरा आयुर्विद्या कार्यक्रम राम चौक पर आयोजित इसके अतिरिक्त, मिथिला प्राकृतिक चिकित्सा योग शोध संस्थान के सचिव डॉ. उमेश कुमार उषाकर, नेचुरोपैथी योग होम्योपैथी हॉस्पिटल के डॉ. मोहम्मद रमीज, मनीषा, ईना और योग प्रशिक्षक डॉली कुमारी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी क्रम में, तीसरा आयुर्विद्या कार्यक्रम शहर के राम चौक स्थित मदरसा क़ बरक़ातुलउल्लूम में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों और अभिभावकों को यूनानी, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा की उपयोगिता और बढ़ते महत्व से अवगत कराया गया। विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं ने इसमें सक्रिय सहभागिता की। रूबी खातून, अभेष झा और मनोज कुमार महतो सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में योग, प्राणायाम और आयुष पद्धतियां विद्यार्थियों को मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक रूप से सशक्त बनाती हैं। मधुबनी जिला आयुष समिति ने सोमवार को पंडौल स्थित विवेकानंद मिशन विद्यापीठ विद्यालय प्रांगण में आयुर्विद्या कार्यक्रम का दूसरा चरण सफलतापूर्वक आयोजित किया। यह आयोजन बिहार राज्य आयुष समिति के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला देशी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रेमलता, विद्यालय के प्राचार्य अभिषेक कुमार और प्रबंध निदेशक साहिल पूर्वे ने औषधीय पौधों का वितरण कर किया। इस शिविर में 300 से अधिक छात्र-छात्राओं, दर्जनों शिक्षक-शिक्षिकाओं और आयुर्वेदिक, यूनानी तथा होम्योपैथिक चिकित्सकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिभागियों के स्वास्थ्य जांच की हुई जांच शिविर के दौरान प्रतिभागियों की स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें निशुल्क औषधियां वितरित की गईं। डॉ. प्रेमलता ने प्राकृतिक आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या और योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए इलाज से बेहतर परहेज है और आवश्यकता पड़ने पर सस्ती व वैज्ञानिक आयुष औषधियों से निरोगी जीवन प्राप्त किया जा सकता है। अन्य चिकित्सकों ने स्थानीय औषधीय पौधों, मौसमी फल-सब्जियों, सात्विक आहार और सदाचार की उपयोगिता पर जोर दिया। उन्होंने ‘आयुर्विद्या आयु बढ़ाने की विद्या’ के मंत्र को साझा किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. ओंकारनाथ झा बटोहिया, डॉ. दीपक कुमार दैंता, डॉ. मनोज कुमार बथने, डॉ. जय ओम उच्चैठ, डॉ. कमर संकोर्थ, डॉ. हक सीमा, डॉ. कौशलेश बिठुवार, डॉ. मनीष तिवारी (देवहार) सहित डीआईएमओ कार्यालय के हेमंत झा और पप्पू पासवान का उल्लेखनीय सहयोग रहा। तीसरा आयुर्विद्या कार्यक्रम राम चौक पर आयोजित इसके अतिरिक्त, मिथिला प्राकृतिक चिकित्सा योग शोध संस्थान के सचिव डॉ. उमेश कुमार उषाकर, नेचुरोपैथी योग होम्योपैथी हॉस्पिटल के डॉ. मोहम्मद रमीज, मनीषा, ईना और योग प्रशिक्षक डॉली कुमारी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी क्रम में, तीसरा आयुर्विद्या कार्यक्रम शहर के राम चौक स्थित मदरसा क़ बरक़ातुलउल्लूम में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों और अभिभावकों को यूनानी, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा की उपयोगिता और बढ़ते महत्व से अवगत कराया गया। विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं ने इसमें सक्रिय सहभागिता की। रूबी खातून, अभेष झा और मनोज कुमार महतो सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में योग, प्राणायाम और आयुष पद्धतियां विद्यार्थियों को मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक रूप से सशक्त बनाती हैं।  

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