मोतिहारी के सुगौली रेलवे स्टेशन से बरामद चरस के ईंट में बदल जाने के सनसनीखेज मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने इस प्रकरण में सुगौली के तत्कालीन जीआरपी थानाध्यक्ष सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। यह प्राथमिकी पुलिस मुख्यालय के आदेश पर गठित त्रिस्तरीय जांच समिति और एडीजी रेलवे की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई है। 9 अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज नामजद अभियुक्तों में तत्कालीन सुगौली जीआरपी थानाध्यक्ष सोती कुमार, आरपीएफ ओपी प्रभारी संजीव रतन प्रसाद सिंह, आरपीएफ सिपाही गोविंद कुमार महतो, अनुसंधान पदाधिकारी सह इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार, जीआरपी सिपाही समीर आलम, जीआरपी सिपाही मो. जाकिर, आरपीएफ एएसआई प्रभु हाजरा, आरपीएफ प्रधान आरक्षी रितेश प्रसाद वर्मा और दंडाधिकारी सह अंचलाधिकारी कुंदन कुमार शामिल हैं। यह मामला मार्च 2025 का है, जब सुगौली रेल थाना में कांड संख्या 04/25 दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में पैकेट में भारी मात्रा में चरस बरामद करने का दावा किया था। हालांकि, लगभग दो महीने बाद जब जब्त सामान को न्यायालय में प्रदर्श के लिए प्रस्तुत किया गया, तो पैकेट खोलने पर चरस की जगह ईंटें मिलीं। इस चौंकाने वाली घटना के सामने आने के बाद विस्तृत जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम गठित जांच के लिए मोतिहारी के एडीएम शैलेंद्र कुमार भारती, समस्तीपुर के आरपीएफ कमांडेंट शेख जन अहमद जानी और मुजफ्फरपुर रेल एसपी बीणा कुमारी की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे करते हुए बताया कि सभी नौ अभियुक्तों ने आपस में मिलीभगत कर आपराधिक षड्यंत्र रचा था। जांच समिति ने जब्ती सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बताया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सभी पदाधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद तत्कालीन सुगौली जीआरपी थानाध्यक्ष ने जब्ती सूची पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इस मामले में आगे की विधिसम्मत कार्रवाई जारी है। मोतिहारी के सुगौली रेलवे स्टेशन से बरामद चरस के ईंट में बदल जाने के सनसनीखेज मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने इस प्रकरण में सुगौली के तत्कालीन जीआरपी थानाध्यक्ष सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। यह प्राथमिकी पुलिस मुख्यालय के आदेश पर गठित त्रिस्तरीय जांच समिति और एडीजी रेलवे की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई है। 9 अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज नामजद अभियुक्तों में तत्कालीन सुगौली जीआरपी थानाध्यक्ष सोती कुमार, आरपीएफ ओपी प्रभारी संजीव रतन प्रसाद सिंह, आरपीएफ सिपाही गोविंद कुमार महतो, अनुसंधान पदाधिकारी सह इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार, जीआरपी सिपाही समीर आलम, जीआरपी सिपाही मो. जाकिर, आरपीएफ एएसआई प्रभु हाजरा, आरपीएफ प्रधान आरक्षी रितेश प्रसाद वर्मा और दंडाधिकारी सह अंचलाधिकारी कुंदन कुमार शामिल हैं। यह मामला मार्च 2025 का है, जब सुगौली रेल थाना में कांड संख्या 04/25 दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में पैकेट में भारी मात्रा में चरस बरामद करने का दावा किया था। हालांकि, लगभग दो महीने बाद जब जब्त सामान को न्यायालय में प्रदर्श के लिए प्रस्तुत किया गया, तो पैकेट खोलने पर चरस की जगह ईंटें मिलीं। इस चौंकाने वाली घटना के सामने आने के बाद विस्तृत जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम गठित जांच के लिए मोतिहारी के एडीएम शैलेंद्र कुमार भारती, समस्तीपुर के आरपीएफ कमांडेंट शेख जन अहमद जानी और मुजफ्फरपुर रेल एसपी बीणा कुमारी की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे करते हुए बताया कि सभी नौ अभियुक्तों ने आपस में मिलीभगत कर आपराधिक षड्यंत्र रचा था। जांच समिति ने जब्ती सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बताया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सभी पदाधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद तत्कालीन सुगौली जीआरपी थानाध्यक्ष ने जब्ती सूची पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इस मामले में आगे की विधिसम्मत कार्रवाई जारी है।


