आंध्र प्रदेश पुलिस सोमवार की सुबह 5:53 बिना वारंट अग्निशमन विभाग के आईजी सुनील नायक के सरकारी आवास पहुंची थी। आंध्र पुलिस आईजी को गिरफ्तार करने पहुंची थी। सूत्रों के अनुसार आंध्र पुलिस ने पहले आईजी के आवास की रेकी की थी। सुनील नायक के वकील के अनुसार टीम में कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में थे और कुछ सादे लिबास में थे। आंध्र पुलिस चहारदीवारी फांदकर आवास के कैंपस में घुसी। सुरक्षा में तैनात कर्मी वर्दीधारी को देखकर हैरान हो गए। उन्हें समझ नहीं आया कि एक अधिकारी इस तरह से आवास में क्यों आया। सुरक्षाकर्मी ने विरोध भी किया था। सुनील नायक बेडरूम से बाहर आए तो उन्हें आंध्र पुलिस ने बताया कि 2024 में दर्ज केस में पूछताछ के लिए चलना होगा। नायक ने पूछा कि क्या पटना पुलिस को सूचना दी गई है। इसके बाद उन्होंने बिहार के वरीय अधिकारियों को जानकारी दी। कुछ ही देर में बिहार पुलिस और होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंच गए। स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच करीब सात घंटे तक कानूनी बहस चलती रही। वहां विभाग के कर्मियों की काफी ज्यादा भीड़ जुट गई थी। कर्मियों ने आवास को चारों तरफ से घेरकर सुरक्षा घेरा बना लिया था। मजबूर होकर आंध्र पुलिस ने लोकल पुलिस स्टेशन शास्त्री नगर को सूचना दी, जबकि इस मामले में सबसे पहले लोकल पुलिस को खबर करनी होती है। आंध्र पुलिस के आने की जानकारी विभाग के कर्मियों को कैसे हुई, आईजी के सुरक्षाकमियों ने क्या किया, कैसे जुटी भीड़…पढ़िए रिपोर्ट सुरक्षाकर्मियों ने विभाग के अधिकारी और कर्मियों को दी जानकारी जब आंध्र पुलिस आईजी के सरकारी आवास पर पहुंची तब सभी लोग सोए हुए थे। आवास परिसर में सुरक्षाकर्मियों का पहरा था। सब कुछ सामान्य था। इसी बीच आवास का दरवाजा जोर-जोर से पीटने की आवाज आई। सुरक्षाकर्मियों को समझ नहीं आ रहा था कि इस तरह से कौन दरवाजा पीट रहा है। गेट नहीं खुला तो कुछ ही देर में आंध्र पुलिस के एएसपी रैंक के अधिकारी दीवार फांदकर आवास में घुसे। सुरक्षाकर्मियों ने आंध्र पुलिस का विरोध किया। उनसे आवास में आने का कारण पूछा, पर सुरक्षाकर्मियों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी। मजबूर होकर सुरक्षकर्मियों ने विभाग के अधिकारियों और दूसरे सह कर्मियों को फोन लगाना शुरू कर दिया। बात ऊपर से लेकर नीचे के स्तर के कर्मियों तक पहुंच गई। सुबह का वक्त था, विभाग के अधिकतर कर्मी मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। जैसे-जैसे उन्हें अपने अफसर के बारे में पता चला, वे सभी सरकारी आवास पर जुट गए। थोड़ी ही देर में आवास पर काफी भीड़ जुट गई। अग्नशमन के कर्मियों और आंध्र पुलिस में होती रही बहस सरकारी आवास पर अग्निशमन के जवानों की आंध्र की पुलिस काफी बहस हुई। जवानों से कहा कि आपलोग इस तरह से हमारे अधिकारी को नहीं ले जा सकते हैं। आप लोग नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं। जब आंध्र पुलिस को लगा कि वो इतनी आसानी वे सुनील नायक को नहीं ले जा सकते तब पटना की लोकल पुलिस को जानकारी दी। शास्त्रीनगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पटना पुलिस ने बड़े ही शालिनता से आंध्र पुलिस की मदद की। दोपहर 1 बजे के बाद सिविल कोर्ट पहुंची आंध्र पुलिस सुबह 5:53 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे कोर्ट पहुंचने तक आंध्र पुलिस की कस्टडी में ही सुनील नायक रहे। इस दौरान आवास के अंदर ही एक कमरे में आंध्र की पुलिस उन्हें अपने साथ बैठा कर रखी थी। हालांकि खबर मिलने के बाद दोपहर 12:30 बजे तक विभाग की अधिकारियों के आने का सिलसिला सरकारी आवास पर जारी रहा। सुबह से ही सेंट्रल एसपी भानु प्रताप सिंह और सचिवालय sdpo-2 साकेत कुमार आवास पर मौजूद रहे। दोपहर 12:30 के बाद आंध्र पुलिस सुनील नायक को आवास से लेकर निकाली और मेडिकल कराने के लिए अस्पताल पहुंची। मेडिकल कराने के बाद दोपहर 1:00 बजे पटना सिविल कोर्ट पहुंच गई।
पटना सिविल कोर्ट ने आंध्रप्रदेश पुलिस से केस डायरी मांगी
कोर्ट ने आंध्रप्रदेश पुलिस से वारंट और केस डायरी मांगी। दस्तावेज नहीं दिए जाने पर अदालत ने ट्रांजिट रिमांड देने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनील नायक को इस शर्त पर मुक्त किया कि वे 30 दिनों के भीतर सक्षम न्यायालय से राहत प्राप्त करेंगे। साथ ही आंध्रप्रदेश पुलिस को भी विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया गया। आदेश के बाद फिलहाल 30 दिनों तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकेगी।
पूर्व सांसद ने लगाया हत्या के प्रयास का आरोप पूरा मामला साल 2021 का है, जब सुनील कुमार नायक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश में CID में तैनात थे। उस वक्त तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के रघुरमा कृष्ण राजू आंध्र प्रदेश के नरसापुरम से सांसद थे। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और उनकी पार्टी YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। इसके बाद पूर्व सांसद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और CID की टीम हैदराबाद पहुंचकर उन्हें उनके आवास से गिरफ्तार कर गुंटूर स्थित CID कार्यालय ले गई। पूर्व सांसद का आरोप है कि हिरासत के दौरान उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और सरकार के इशारे पर उन्हें जान से मारने की साजिश रची गई। उन्होंने दावा किया कि यह महज कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि सियासी रंजिश निकालने का तरीका था। के रघुराम कृष्णा राजू वर्तमान में आंध्र प्रदेश विधानसभा में डिप्टी स्पीकर हैं।
आंध्र प्रदेश के पूर्व CM, 2 IPS समेत 5 पर केस इसी सिलसिले में उन्होंने गुंटूर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। 2023 में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और दो IPS अफसरों समेत 5 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया। पूर्व सांसद का आरोप था कि जगन रेड्डी ने IPS पीवी सुनील कुमार नायक और IPS पीएसआर सीतारमंजनेयुलु के साथ मिलकर उनके खिलाफ आपराधिक साजिश रची। मामले में रिटायर्ड पुलिस अधिकारी आर विजय पॉल और गुंटूर सरकारी जनरल अस्पताल की पूर्व सुपरिटेंडेंट जी प्रभावत भी आरोपी हैं। कोर्ट के आदेश पर सुनील कुमार नायक के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। अब उनकी जमानत रद्द होने के बाद आंध्र पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करेगी और ट्रांजिट रिमांड लेकर आंध्र प्रदेश ले जाएगी। पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे थे IPS अफसर बताया जा रहा है कि जांच अधिकारी ने सुनील नायक को दो बार पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था। लेकिन वे निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद आंध्र पुलिस ने पटना पहुंचकर कार्रवाई की है। IPS एम. सुनील नायक 2005 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी हैं। फिलहाल वे बिहार के अग्निशमन विभाग में तैनात हैं। इस कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। आंध्र प्रदेश पुलिस सोमवार की सुबह 5:53 बिना वारंट अग्निशमन विभाग के आईजी सुनील नायक के सरकारी आवास पहुंची थी। आंध्र पुलिस आईजी को गिरफ्तार करने पहुंची थी। सूत्रों के अनुसार आंध्र पुलिस ने पहले आईजी के आवास की रेकी की थी। सुनील नायक के वकील के अनुसार टीम में कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में थे और कुछ सादे लिबास में थे। आंध्र पुलिस चहारदीवारी फांदकर आवास के कैंपस में घुसी। सुरक्षा में तैनात कर्मी वर्दीधारी को देखकर हैरान हो गए। उन्हें समझ नहीं आया कि एक अधिकारी इस तरह से आवास में क्यों आया। सुरक्षाकर्मी ने विरोध भी किया था। सुनील नायक बेडरूम से बाहर आए तो उन्हें आंध्र पुलिस ने बताया कि 2024 में दर्ज केस में पूछताछ के लिए चलना होगा। नायक ने पूछा कि क्या पटना पुलिस को सूचना दी गई है। इसके बाद उन्होंने बिहार के वरीय अधिकारियों को जानकारी दी। कुछ ही देर में बिहार पुलिस और होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंच गए। स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच करीब सात घंटे तक कानूनी बहस चलती रही। वहां विभाग के कर्मियों की काफी ज्यादा भीड़ जुट गई थी। कर्मियों ने आवास को चारों तरफ से घेरकर सुरक्षा घेरा बना लिया था। मजबूर होकर आंध्र पुलिस ने लोकल पुलिस स्टेशन शास्त्री नगर को सूचना दी, जबकि इस मामले में सबसे पहले लोकल पुलिस को खबर करनी होती है। आंध्र पुलिस के आने की जानकारी विभाग के कर्मियों को कैसे हुई, आईजी के सुरक्षाकमियों ने क्या किया, कैसे जुटी भीड़…पढ़िए रिपोर्ट सुरक्षाकर्मियों ने विभाग के अधिकारी और कर्मियों को दी जानकारी जब आंध्र पुलिस आईजी के सरकारी आवास पर पहुंची तब सभी लोग सोए हुए थे। आवास परिसर में सुरक्षाकर्मियों का पहरा था। सब कुछ सामान्य था। इसी बीच आवास का दरवाजा जोर-जोर से पीटने की आवाज आई। सुरक्षाकर्मियों को समझ नहीं आ रहा था कि इस तरह से कौन दरवाजा पीट रहा है। गेट नहीं खुला तो कुछ ही देर में आंध्र पुलिस के एएसपी रैंक के अधिकारी दीवार फांदकर आवास में घुसे। सुरक्षाकर्मियों ने आंध्र पुलिस का विरोध किया। उनसे आवास में आने का कारण पूछा, पर सुरक्षाकर्मियों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी। मजबूर होकर सुरक्षकर्मियों ने विभाग के अधिकारियों और दूसरे सह कर्मियों को फोन लगाना शुरू कर दिया। बात ऊपर से लेकर नीचे के स्तर के कर्मियों तक पहुंच गई। सुबह का वक्त था, विभाग के अधिकतर कर्मी मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। जैसे-जैसे उन्हें अपने अफसर के बारे में पता चला, वे सभी सरकारी आवास पर जुट गए। थोड़ी ही देर में आवास पर काफी भीड़ जुट गई। अग्नशमन के कर्मियों और आंध्र पुलिस में होती रही बहस सरकारी आवास पर अग्निशमन के जवानों की आंध्र की पुलिस काफी बहस हुई। जवानों से कहा कि आपलोग इस तरह से हमारे अधिकारी को नहीं ले जा सकते हैं। आप लोग नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं। जब आंध्र पुलिस को लगा कि वो इतनी आसानी वे सुनील नायक को नहीं ले जा सकते तब पटना की लोकल पुलिस को जानकारी दी। शास्त्रीनगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पटना पुलिस ने बड़े ही शालिनता से आंध्र पुलिस की मदद की। दोपहर 1 बजे के बाद सिविल कोर्ट पहुंची आंध्र पुलिस सुबह 5:53 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे कोर्ट पहुंचने तक आंध्र पुलिस की कस्टडी में ही सुनील नायक रहे। इस दौरान आवास के अंदर ही एक कमरे में आंध्र की पुलिस उन्हें अपने साथ बैठा कर रखी थी। हालांकि खबर मिलने के बाद दोपहर 12:30 बजे तक विभाग की अधिकारियों के आने का सिलसिला सरकारी आवास पर जारी रहा। सुबह से ही सेंट्रल एसपी भानु प्रताप सिंह और सचिवालय sdpo-2 साकेत कुमार आवास पर मौजूद रहे। दोपहर 12:30 के बाद आंध्र पुलिस सुनील नायक को आवास से लेकर निकाली और मेडिकल कराने के लिए अस्पताल पहुंची। मेडिकल कराने के बाद दोपहर 1:00 बजे पटना सिविल कोर्ट पहुंच गई।
पटना सिविल कोर्ट ने आंध्रप्रदेश पुलिस से केस डायरी मांगी
कोर्ट ने आंध्रप्रदेश पुलिस से वारंट और केस डायरी मांगी। दस्तावेज नहीं दिए जाने पर अदालत ने ट्रांजिट रिमांड देने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनील नायक को इस शर्त पर मुक्त किया कि वे 30 दिनों के भीतर सक्षम न्यायालय से राहत प्राप्त करेंगे। साथ ही आंध्रप्रदेश पुलिस को भी विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया गया। आदेश के बाद फिलहाल 30 दिनों तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकेगी।
पूर्व सांसद ने लगाया हत्या के प्रयास का आरोप पूरा मामला साल 2021 का है, जब सुनील कुमार नायक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश में CID में तैनात थे। उस वक्त तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के रघुरमा कृष्ण राजू आंध्र प्रदेश के नरसापुरम से सांसद थे। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और उनकी पार्टी YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। इसके बाद पूर्व सांसद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और CID की टीम हैदराबाद पहुंचकर उन्हें उनके आवास से गिरफ्तार कर गुंटूर स्थित CID कार्यालय ले गई। पूर्व सांसद का आरोप है कि हिरासत के दौरान उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और सरकार के इशारे पर उन्हें जान से मारने की साजिश रची गई। उन्होंने दावा किया कि यह महज कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि सियासी रंजिश निकालने का तरीका था। के रघुराम कृष्णा राजू वर्तमान में आंध्र प्रदेश विधानसभा में डिप्टी स्पीकर हैं।
आंध्र प्रदेश के पूर्व CM, 2 IPS समेत 5 पर केस इसी सिलसिले में उन्होंने गुंटूर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। 2023 में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और दो IPS अफसरों समेत 5 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया। पूर्व सांसद का आरोप था कि जगन रेड्डी ने IPS पीवी सुनील कुमार नायक और IPS पीएसआर सीतारमंजनेयुलु के साथ मिलकर उनके खिलाफ आपराधिक साजिश रची। मामले में रिटायर्ड पुलिस अधिकारी आर विजय पॉल और गुंटूर सरकारी जनरल अस्पताल की पूर्व सुपरिटेंडेंट जी प्रभावत भी आरोपी हैं। कोर्ट के आदेश पर सुनील कुमार नायक के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। अब उनकी जमानत रद्द होने के बाद आंध्र पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करेगी और ट्रांजिट रिमांड लेकर आंध्र प्रदेश ले जाएगी। पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे थे IPS अफसर बताया जा रहा है कि जांच अधिकारी ने सुनील नायक को दो बार पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था। लेकिन वे निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद आंध्र पुलिस ने पटना पहुंचकर कार्रवाई की है। IPS एम. सुनील नायक 2005 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी हैं। फिलहाल वे बिहार के अग्निशमन विभाग में तैनात हैं। इस कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है।


