गयाजी में केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ‘AI समिट’ को लेकर विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का राजनीतिक हंगामा देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है। जब दुनिया के 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारत की तकनीकी ताकत और क्षमता को देखने समझने आए हैं। उस समय विरोध-प्रदर्शन करना लोकतंत्र का नंगापन है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होती है। देश के सम्मान से ऊपर कोई राजनीति नहीं हो सकती। नेता प्रतिपक्ष के बयान पर कहा कि शायद तेजस्वी यादव को एआई का सही मतलब भी नहीं पता होगा। यह किसी राजनीतिक दल की रैली या सभा नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी भविष्य का बड़ा मंच है। ऐसे आयोजनों को राजनीति के चश्मे से देखना ठीक नहीं है।
विपक्ष का बयान गैर-जिम्मेदाराना है केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे कदमों से पार्टी खुद ही जनता के बीच अपनी सोच और मंशा उजागर कर रही है। देश जब वैश्विक मंच पर आगे बढ़ रहा है। तब विपक्ष का यह रवैया नकारात्मक और गैर-जिम्मेदाराना है। इस दौरान मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। पीएम को तपस्वी और संत प्रवृत्ति का नेता बताते हुए कहा… मोदी देश को तकनीकी महाशक्ति बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विपक्ष के विरोध से प्रधानमंत्री की छवि पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर सोचना होगा केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि देश के विकास और तकनीकी प्रगति जैसे मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय की सबसे बड़ी ताकत है और भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह समय राजनीतिक टकराव का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकजुटता का है। अगर देश मजबूत होगा तो राजनीति भी मजबूत होगी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में सभी दलों की जिम्मेदारी है। ऐसे में विपक्ष को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। गयाजी में केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ‘AI समिट’ को लेकर विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का राजनीतिक हंगामा देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है। जब दुनिया के 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारत की तकनीकी ताकत और क्षमता को देखने समझने आए हैं। उस समय विरोध-प्रदर्शन करना लोकतंत्र का नंगापन है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होती है। देश के सम्मान से ऊपर कोई राजनीति नहीं हो सकती। नेता प्रतिपक्ष के बयान पर कहा कि शायद तेजस्वी यादव को एआई का सही मतलब भी नहीं पता होगा। यह किसी राजनीतिक दल की रैली या सभा नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी भविष्य का बड़ा मंच है। ऐसे आयोजनों को राजनीति के चश्मे से देखना ठीक नहीं है।
विपक्ष का बयान गैर-जिम्मेदाराना है केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे कदमों से पार्टी खुद ही जनता के बीच अपनी सोच और मंशा उजागर कर रही है। देश जब वैश्विक मंच पर आगे बढ़ रहा है। तब विपक्ष का यह रवैया नकारात्मक और गैर-जिम्मेदाराना है। इस दौरान मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। पीएम को तपस्वी और संत प्रवृत्ति का नेता बताते हुए कहा… मोदी देश को तकनीकी महाशक्ति बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विपक्ष के विरोध से प्रधानमंत्री की छवि पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठकर सोचना होगा केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि देश के विकास और तकनीकी प्रगति जैसे मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय की सबसे बड़ी ताकत है और भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह समय राजनीतिक टकराव का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकजुटता का है। अगर देश मजबूत होगा तो राजनीति भी मजबूत होगी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में सभी दलों की जिम्मेदारी है। ऐसे में विपक्ष को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।


