घोड़े के बालों से जोड़ा टूटा जबड़ा, एनेस्थीसिया के बिना हुई सर्जरी

घोड़े के बालों से जोड़ा टूटा जबड़ा, एनेस्थीसिया के बिना हुई सर्जरी

साइबेरिया के उकोक पठार पर मिली एक महिला की ममी ने प्राचीन चिकित्सा कौशल की अद्भुत कहानी सामने रखी है। करीब 2,500 साल पहले 25–30 वर्ष की यह महिला संभवतः घोड़े से गिर गई थी। दुर्घटना में उसका दाहिना जबड़ा बुरी तरह चकनाचूर हो गया। वह न बोल पा रही थी, न खा सकती थी। बिना इलाज के उसकी मौत लगभग तय थी और चेहरा पूरी तरह विकृत हो जाता। प्राचीन लौह युग की ‘पाजिरिक संस्कृति’ के लोगों ने महिला की जटिल सर्जरी करते हुए उसकी जान बचाई।

सीटी स्कैन ने खोला रहस्य

‘नोवोसिबिर्स्क स्टेट यूनिवर्सिटी’ के वैज्ञानिकों द्वारा जारी रिसर्च में ममी के सीटी स्कैन से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जबड़े की हड्डी में बेहद सूक्ष्म और चिकने छेद किए गए थे, जो 90 डिग्री के कोण पर एक-दूसरे से मिलते थे। इन छेदों में घोड़े के बालों से बना लचीला धागा पिरोया गया था, जिसने टूटे जबड़े को मज़बूती से थाम लिया।

एनेस्थीसिया के बिना हुई सर्जरी

रिसर्च से पता चला कि महिला के टूटे जबड़े की सर्जरी बिना एनेस्थीसिया के हुई। प्राचीनकाल में यह काम किसी चमत्कार जैसा था।

आर्थिक स्थिति नहीं, जीवन की कीमत

रिसर्च का सबसे मार्मिक पहलू उसकी सामाजिक स्थिति है। महिला को शाही ठाठ-बाट के बजाय साधारण लकड़ी की खाट पर विग के साथ दफनाया गया। कब्र में कोई कीमती सामान नहीं मिला, जिससे संकेत मिलता है कि वह निचले आर्थिक वर्ग से थी। शोधकर्ता नतालिया पोलोसमाक के अनुसार इस समाज में हर व्यक्ति की ज़िंदगी की अहमियत थी।

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