पूर्व सांसद के कंबलों ने बढ़ाई ‘गर्मी’:CM की जनसुनवाई में ‘सास-बहू और बुआ’; घोड़ी वाला ‘डिलीवरी बॉय’

पूर्व सांसद के कंबलों ने बढ़ाई ‘गर्मी’:CM की जनसुनवाई में ‘सास-बहू और बुआ’; घोड़ी वाला ‘डिलीवरी बॉय’

नमस्कार टोंक के निवाई में पूर्व सांसद ने कंबल बांटते वक्त नाम-धरम पूछा तो राजनीतिक ‘गर्मी’ बढ़ गई। जयपुर में एक विवाहिता अपनी सास, बुआ और जेठानी के साथ ज्ञापन लेकर सीएम के सामने पहुंची। उदयपुर में एक शादी समारोह में पहुंचे सांसद बोले-तेल लेने गए नियम। घोड़ीवाला डिलीवरी बॉय चर्चा का विषय बन गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पूर्व सांसद ने बांटे कंबल तो बढ़ गई ‘गर्मी’ इससे पहले कि संसदीय क्षेत्र के लोग उन्हें भूल जाते, उन्हें याद आया कि जनता को याद दिलाना है कि हम भी हैं। हालांकि सर्दी के दिन बीत गए हैं और लोग पंखा चलाने और रजाई बांधकर टांड पर रखने के मुहूर्त निकलवा रहे हैं। लेकिन जनता को मौजूदगी याद दिलाने पूर्व सांसदजी कंबल बांटने क्षेत्र में निकल पड़े। जरूरतमंदों को कतार में बैठाकर कंबल बांटे। कंबल सिर पर रखवाए ताकि फोटो में कंबल ही कंबल दिखें। इस दौरान भीड़ में ऐसी महिला नजर आई जिनका नाम-धर्म पूर्व सांसद को पसंद नहीं। उन्होंने महिला को लाभार्थियों की टोली से अलग कर दिया। सख्त हिदायत दी कि ‘इन्हें’ लाभ नहीं देना। हालांकि नेताजी को तत्काल लोगों ने ‘धर्म’ की परिभाषा समझाई। कहा- सभी को समानता का आधिकार है। पूर्व सांसद बोले-बहस मत करो। सांसदजी तो निकल गए, लेकिन कंबल वाकई गर्म निकले। राजनीतिक पारा हाई हो गया। गांव-समाज के लोग जुटे। बोले- हम सब भाईचारे से साथ-साथ रहते हैं, ये भेदभाव नहीं चलेगा। हमारे स्वाभिमान पर चोट लगी है। सांसद जी अपने किए पर पछता रहे हैं। माफी मांग रहे हैं। लेकिन लगता है अब स्वाभिमान की जंग भयंकर होगी। पहली लड़ाई निकाय-पंचायत के स्तर की होगी। इसके ढाई साल बाद विधानसभा स्तर की और तीन साल बाद लोकसभा स्तर की। 2. जनसुनवाई में ‘सास-बुआ की सिफारिश’ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी सरलता और सादगी के लिए जाने जाते हैं। वे एक आम जन की तरह ही जनता से संवाद करते हैं। जयपुर में वाटिका से लौटते हुए चाय पीने का मन हुआ तो एक थड़ी पर काफिला रुक गया। साथ में विधायक कैलाश वर्मा और अन्य नेता थे। थड़ी पर ही मजमा लग गया। भीड़ जुट गई। मुख्यमंत्री ने बच्चों से बात की। कुछ लोग याचिका लेकर भी पहुंच गए। सीएम उनसे संवाद करने लगे। इस दौरान एक ग्रामीण महिला ज्ञापन लेकर आई। साथ में दो-तीन अन्य महिलाएं भी थीं। सीएम ने एप्लीकेशन हाथ में ली और साथी महिलाओं के बारे में पूछा। महिला ने बताया-ये मेरी सास हैं और ये मेरी बुआ हैं। सीएम ने विनोद के स्वर में कहा- अच्छा, ये सास हैं और ये बुआ हैं। चार-चार की सिफारिश है इसमें। आपका काम हो जाएगा। 3. सांसद बोले- रूल गए तेल लेने चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी एक शादी समारोह में शामिल होने उदयपुर के वल्लभनगर पहुंचे। सांसद को कार्यक्रम में आया देख कुछ मेहमानों को याद आया कि वे किसान हैं और मुआवजे के कारण परेशान हैं। परेशानी का ख्याल करते हुए किसानों ने सांसद महोदय को घेर लिया। शिकायत करने लगे कि मुआवजा दिए बिना कंपनी काम कर रही है। किसानों के चेहरे पर परेशानी थी और सांसद जी के चेहरे पर मोबाइल कैमरा तना हुआ था। उन्होंने स्थिति को भांप लिया। एक किसान ने वहीं से सीधे कंपनी के अधिकारी को फोन लगा दिया। अधिकारी से सांसद ने नरमाई से कहा- किसानों को बिना मुआवाजा दिए फसल बर्बाद कर रहे हो? जब तक मुआवजा नहीं मिले तब तक गांव में नहीं आना। अधिकारी ने रूल बुक निकाली और सांसद जी को बताने लगा। सांसद का पारा हाई हो गया। बोले- रूल गए तेल लेने। जब तक मुआवजा नहीं मिले तब तक गांव में नहीं आना। 4. चलते-चलते.. ‘जो दिखता है वह होता नहीं’। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते वक्त इस ब्रह्मवाक्य को मन ही मन बार बार दोहराना चाहिए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया गया। एक अंकल काली घोड़ी पर बैठे थे, ब्लिंकिट का बॉक्स कंधे पर लटकाए हुए थे। शेयर करने वाले ने लिखा- ये राजस्थान है, यहां सामान की डिलीवरी भी घोड़े पर होती है। जिसने देखा उसी ने आनंद पाया। घोड़े से डिलीवरी। ये अलग ही गिग वर्कर। छा गए गुरु। असल में अंकल जी घोड़ी वाले हैं। बारात के लिए घोड़ी लेकर जा रहे थे। पीछे जो बॉक्स लटकाया था उसमें घोड़ी की सजावट का सामान था। इनपुट सहयोग- महावीर बैरवा (टोंक), ऋतुपर्णा मुखर्जी (चित्तौड़गढ़), राघवेंद्र गुर्जर (दौसा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..

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