JKK exhibition Jaipur: जयपुर में रामनिवास बाग स्थित विश्व प्रसिद्ध अल्बर्ट हॉल की डिजायन प्रिंस ऑफ वेल्स ने स्वीकृत की थी और विशेष पत्र के जरिये सेकेट्री स्टेट ऑफ इंडिया को दी थी। वहीं जयपुर की रियासतकालीन संपत्तियों के बेचान को लेकर मालिकों और स्टेट ऑफ इंडिया के अधिकारियों के बीच पत्राचार हुआ।
राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत सरकार की ओर से जवाहर कला केन्द्र में भारत की विश्व विरासत: राजस्थान विषय पर आधारित प्रदर्शनी में 18-19वीं शताब्दी में रियासतकाल के दौरान ढूंढ़ाड़, मेवाड़, मारवाड़ और हाड़ौती के किले, महल, स्मारकों से जुडे दस्तावेज की अनूठी झलक देखने को मिल रही है।
1879: लंदन से लिखा था पत्र
अल्बर्ट हॉल की डिजाइन की मंजूरी को लेकर प्रिंस ऑफ वेल्स के लंदन स्थित इंडिया ऑफिस से 16 अक्टूबर 1879 में यह पत्र लिखा गया। पत्र में प्रिंस ऑफ वेल्स का 1876 में जयपुर दौरे का हवाला देते हुए मंजूरी देना बताया गया। इसी तरह से रियासतकालीन कई पत्रों को भी इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया है।

1962: टोंक कलक्टर को भेजा था पत्र
प्रदर्शनी में 1962 का एक पत्र भी चर्चा में बना हुआ है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से टोंक कलक्टर को पत्र भेजकर टोंक के टोडारायसिंह स्थित हाडी रानी की बावड़ी को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की सूचना दी गई।
1956: गृह मंत्रालय ने किया हस्तक्षेप
भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से जयपुर में रियासतकालीन संम्पत्ति को एक निजी होटल समूह को 50 हजार रुपए प्रतिमाह किराए पर देने के मामले में हस्तक्षेप करने संबंधी पत्र भी प्रदर्शनी में रखा गया। पत्र को 1956 में गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने लिखा था।
महाराणा प्रताप का का कवच था 14 किलो से ज्यादा वजन
प्रदर्शनी में महाराणा प्रताप का कवच व अन्य हथियारों को लेकर भी अनूठी जानकारियां इस प्रदर्शनी में दी गई हैं। महाराणा प्रताप के कवच का वजन 14 किलो 640 ग्राम था। वहीं ढाल का वजन 2 किलो 402 ग्राम, भाले का वजन 2 किलो 930 ग्राम और तलवार का वजन 3 किलो 26 ग्राम था। उनकी कटार का वजन डेढ़ किलो से ज्यादा था।
जेकेके प्रदर्शनी में इन रियासतों की धरोहर का प्रदर्शन
- झालावाड़ की विरासत-गागरोन
- जयपुर विरासत
- ढूंढ़ाड़ विरासत
- मेवाड़ महादुर्ग-चित्तौडगढ़
- मारवाड़ की विरासत
- मेवाड की विरासत
- हाड़ौती की विरासत:बूंदी और कोटा


